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जमशेदपुर के युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है मेंटल ब्रेकडाउन की समस्या, जानें क्या हैं इसके लक्षण और उपचार

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Jamshedpur  : जिस उम्र में युवाओं को कूल रहने की सीख दी जाती है, उस उम्र में वे क्रोध और आक्रोश से भरते जा रहे हैं. इसका असर भी दिखने लगा है. घर से लेकर सड़क तक मारपीट और गाली-गलौज के मामले आम हो गए हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है खुद से लेकर सोसायटी तक की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाना. ऐसे मामले मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में तेजी से पहुंच रहे हैं. युवा फोन करके डॉक्टर्स से अपनी परेशानी बयां कर रहे हैं. उनकी काउंसिलिंग कर उन्हें गुस्से से निजात दिलाई जा रही है. एक्सपर्ट्स की मानें तो इस सिचुएशन को मेंटल ब्रेकडाउन कहा जाता है.

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केस-1

डिमना के रहने वाले दीपक (परिवर्तित नाम) की उम्र 29 साल है. वह एमबीए पास है लेकिन ढंग की नौकरी नहीं मिलने से वह लगातार अवसाद में जा रहे हैं. पिछले दिनों उन्होंने अपने दोस्तों से झगड़ा कर लिया. जब इसकी खबर पेरेंट्स को लगी तो उन्होंने एक्सपर्ट से कांटेक्ट किया. डॉक्टर्स ने उनकी काउंसिलिंग कर उन्हे शांत रहने को कहा है.

केस-2

मानगो निवासी रोशन (परिवर्तित नाम) की शादी हाल में हुई है. ससुराल में उनके संबंध ठीक नहीं चल रहे हैं. पिछले दिनों वह मायके लौट आईं. घर वालों ने समझाया लेकिन वह जाने को तैयार नही हैं. पति का कहना है कि वह बात-बात पर गुस्सा करती है. मायके वाले रोशन के बिहेवियर को लेकर डॉक्टर से संपर्क कर चुके हैं. जल्द उसका इलाज शुरू होगा

केस-3

पेशे से साफ्टवेयर इंजीनियर इमरान (परिवर्तित नाम) गोलमुरी निवासी हैं. आजकल काफी परेशान हैं. उनकी घर और बाहर कहीं किसी से नहीं बन रही. अचानक कुछ महीनों से उन्हें चिड़चिड़ापन और गुस्सा अधिक आ रहा है. फिलहाल वह डॉक्टर के संपर्क में है और कुछ दवाएं लेने से उनको मानसिक रूप से आराम मिला है.

हर महीने आते हैं 10 से 15 मामले

डॉक्टरों के अनुसार ऐसे मामले सबसे ज्यादा 25 से 40 साल की उम्र के लोगों में अधिक सामने आ रहे हैं. जबकि माना जाता है कि इस आयु में लोग अधिक कूल और धैर्यवान होते हैं. लेकिन बदलते सामाजिक परिदृश्य और अन्य कारणों से लोग अपना धैर्य खोते जा रहे हैं. ऐसे मामले काल्विन अस्पताल स्थित मानसिक स्वास्थ्य केंद्र में तेजी से आ रहे हैं. डॉक्टर्स का कहना है कि महीने में दस से पंद्रह ऐसे मामले आने लगे हैं.

इन लक्षणों पर दीजिए ध्यान

बात-बात पर गुस्सा आना. मन बेचैन  रहना. किसी की बात पसंद न आना. छोटी-छोटी बात पर लड़ने को तैयार रहना हर बात पर मान-सम्मान को आड़े ले आना. टीवी और इंटरनेट पर मारधाड़ वाली मूवी पसंद आना. बातचीत में गाली-गालौज करने का मन करना. हर व्यक्ति को शक की निगाह से देखना. बात बात पर सामने वाले का अपमान करने का मन बनाना.

लोगों के व्यवहार में परिवर्तन का कारण डोपामीन हार्मोन है. अब ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें 25 से 40 साल एज ग्रुप के युवा गुस्सा और एग्रेशन का शिकार हो रहे हैं. कुछ मामलों को काउंसिलिंग के साथ फैमिली आब्जर्वेशन में रखा गया है. कुछ मामलों में ट्रीटमेंट भी की जा रही है.

डॉ निधि श्रीवास्तव, मनोचिकित्सक

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