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राज्य की 53 प्रतिशत पंचायतों में ड्रॉप आउट की समस्या बरकरार, 30-35 प्रतिशत बच्चे अनियमित

राज्य शिक्षा परियोजना ने करायी सोशल ऑडिटिंग, परियोजना ने माना- रणनीतियां प्रभावी ढंग से लागू नहीं

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  • इस साल राज्य भर में मात्र 64,660 ड्राॅप आउट बच्चों का नामाकंन हुआ
  • नये नामाकंन 4,51,075 लिया गया, कुल नामाकंन 5,15,735 हुए

Ranchi : राज्य के 53 प्रतिशत पंचायत अभी तक ड्राॅप आउट की समस्या से उबर नहीं पाये हैं. विगत दिनों राज्य शिक्षा परियोजना की ओर से जीरो ड्राॅप आउट पर एक सोशल ऑडिटिंग की गयी. ऑडिटिंग राज्य के 1164 स्कूलों में की गयी.

सर्वे में राज्य के 178 पंचायतों को सैंपल के रूप में लिया गया. इसमें से मात्र 84 पंचायतों को जीरो ड्राॅप आउट पाया गया. आंकड़ों की मानें तो राज्य में 53 प्रतिशत पंचायत अभी भी ड्राॅप आउट की श्रेणी से बाहर नहीं हो पाये हैं.

साल 2018-19 में हुई प्रगति कार्यों की ऑडिटिंग इस दौरान की गयी. इससे पता चलता है कि राज्य में मात्र 47 प्रतिशत पंचायत ही जीरो ड्राॅप आउट हो पाये हैं. राज्य में कुल पंचायतों की संख्या 4398 है. इनमें से 1828 पंचायतों को पूर्व में ही जीरो ड्राॅप आउट घोषित किया जा चुका है.

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इस साल 64,660 ड्राॅप आउट बच्चों का नामाकंन

विद्यालय चलें चलायें अभियान में विशेष फोकस ड्राॅप आउट बच्चों के नामाकंन पर था. अभियान के दौरान 64,660 ड्राॅप बच्चों का ही नामाकंन राज्य भर में किया गया. नये 4,51,075 छात्रों का नामाकंन लिया गया. इस दौरान राज्य भर में कुल 5,15,735 नामाकंन लिये गये.

इन आंकड़ों को देखे तो ड्राॅप आउट बच्चों का काफी कम नामाकंन लिया गया जबकि सोशल ऑडिटिंग जिन 178 पंचायतों में की गयी, वहां मात्र 1310 छात्रों को पाया गया, जो ड्राॅप आउट हो चुके है.

इन पंचायतों में 1164 स्कूलों को इस ऑडिटिंग में शामिल किया गया. इसके लिये अलग से प्रयास कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है.

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अनियमित बच्चों की संख्या 30 से 35 प्रतिशत पायी गयी

ऑडिटिंग में पाया गया कि राज्य के स्कूलों में 30 से 35 प्रतिशत छात्र अनियमित पाये जाते हैं जो भविष्य में कभी भी ड्राॅप आउट हो सकते हैं. वहीं दिव्यांग बच्चों के लिये बनायी गयी रणनीति प्रभावी ढंग से लागू नहीं होने के कारण और न ही स्कूलों में सही संसाधन होने के कारण दिव्यांग बच्चों का ठहराव स्कूलों में नहीं हो पाता.

बच्चों का घर में काम करना प्रमुख कारण

इस ऑडिटिंग में ड्राॅप आउट के कारकों पर भी चर्चा की गयी जिसमें पाया गया कि सबसे अधिक छात्र घर में काम करने के कारण स्कूल नहीं आ पाते है. इन कारणों को नंबर देने के लिये 450 अंकों तक का मानक बनाया गया जिसमें इस कारण को 385 अंक मिलें. वहीं अज्ञात कारणों को 198 अंक दिये गये. इसमें प्रवास को 107 अंक मिले हैं. अन्य कारणों में स्कूलों की दूरी, बाल विवाह, पारिवारिक परेशानी, अभिभावकों की गैर जिम्मेदारी समेत अन्य कारण पाये गये.

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