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वर्तमान युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है : डॉ प्रशांत

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Ranchi : झारखंड ऑफ्थेल्मोलॉजिकल सोसाइटी का तीन दिवसीय नेत्र रोग विशेषज्ञों के सम्मलेन का रविवार को खेलगांव स्थित एथलेटिक स्टेडियम में समापन हो गया. कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में आयोजित अतिथि व्याख्यानमाला में डॉ. मोहिता शर्मा ने मोतियाबिंद सर्जरी में कॉर्नियल टोपोग्राफी जांच एवं प्रेसबाइलासिक के विषय पर जानकारी दी. वहीं, डॉ. प्रशांत अग्निहोत्री ने कहा कि वर्तमान युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कृत्रिम तरीके से विकसित की गयी बुद्धि को कहते हैं. आज इसका क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है. आनेवाले समय में इसका विस्तृत इस्तेमाल चिकित्सा के क्षेत्र में होनेवाला है. आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित ऐसे कंप्यूटर का आविष्कार किया जा रहा है, जो निकट भविष्य में चिकित्सा सुविधा के लिए उपलब्ध रहेंगे. यह कंप्यूटर पर आधारित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर काम करता है. इसमें हजारों लाखों मरीजों की बीमारियों का डेटा फीड होता है. उदाहरण के तौर पर डायबिटिक रेटिनोपैथी का मरीज जब कंप्यूटर पर बैठता है, तो कंप्यूटर उस डेटा बैंक के आधार पर उसके डायबिटिक रेटिनोपैथी के ग्रेड का डायग्नोसिस कर लेता है और कंप्यूटर यह भी बता देता है कि मरीज को किस प्रकार का और कितना ट्रीटमेंट चाहिए.

आंख के सामने मक्खी-मच्छर जैसा दिखना या बिजली जैसा चमकना पर्दा फटने के हैं लक्षण

रेटिना अपडेट सत्र में डॉ विभूति पी. कश्यप ने कहा कि आंखों के पर्दे की बीमारी और पर्दे का फटना एक इमरजेंसी है. ऐसे में ऑपरेशन जल्द से जल्द करना चाहिए. अचानक से रोशनी का जाना, आंख के आगे मक्खियां, मच्छर जैसा आना और परदे के आगे बिजली का चमकना ये सारे लक्षण होते हैं पर्दा फटने के. ऐसे में यदि सर्जरी जल्द नहीं करायी जाये, तो आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है.

दृष्टिहीनता विकासशील देशों में प्रमुख स्वास्थ्य समस्या

जयपुर से आये राजस्थान आई बैंक के प्रमुख डॉ स्वाति तोमर ने कहा कि दृष्टिहीनता विकासशील देशों में प्रमुख स्वास्थ्य समस्या में से एक है. भारत में अनुमान लगाया गया है कि दृष्टिहीनता के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम के मुताबिक, लगभग 68 मिलियन लोग कम से कम एक आंख में 6/60 से कम दृष्टि रखते हैं. अनुमान है कि वर्तमान में देश में 12 हजार कॉर्निया जनित दृष्टिहीन हैं. एक अनुमान के मुताबिक देश में हर साल 25 से 30 हजार कॉर्निया से जुड़े दृष्टिहीन लोगों की संख्या बढ़ रही है. सम्मेलन में डॉ पूनम सिंह, डॉ विजया जोजो, डॉ सुबोध, डॉ पारिजात चंद्रा, डॉ एसपी तिवारी, डॉ राकेश, डॉ मलय कुमार द्विवेदी एवं डॉ अंशुमन सिन्हा समेत अन्य डॉक्टरों ने अपने-अपने विचार रखे.

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