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खाली है मुख्य सूचना आयुक्त का पद, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं भरे गये आयुक्तों के पद : रविकांत

  • एक सूचना आयुक्त के भरोसे चल रहा आयोग, छह हजार से अधिक पेंडिंग मामले
  • कार्मिक ने विज्ञापन तो निकाला लेकिन नियुक्ति पेंडिंग है

Ranchi: राज्य में सूचना आयुक्तों की कमी पहले से है. वहीं पिछले 16 दिनों से मुख्य सूचना आयुक्त का पद खाली है. ऐसे में राज्य सूचना आयोग के पास वर्तमान में मात्र एक ही सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी हैं.

फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्देश दिया गया कि सभी राज्यों में छह माह में सूचना आयुक्तों के सभी पदों को बहाल किया जाये. इसके बाद भी राज्य में सूचना आयुक्तों के पद नहीं भरे गये. उक्त बातें राज्य सूचना अधिकार रक्षा मंच के अध्यक्ष रविकांत ने कहीं.

मुख्य सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप 30 नवंबर को रिटायर हो गये. जबकि इसके पहले से अलग-अलग स्तर पर राज्य में सूचना आयुक्तों के पदों को बहाल करने की मांग की जा रही थी. उन्होंने बताया कि मंच की ओर से राज्यपाल तक को इस संबध में ज्ञापन दिया गया, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई.

उन्होंने कहा कि आचार संहिता होने के कारण राजभवन के समक्ष सांकेतिक प्रदर्शन किया जा रहा है. लेकिन नयी सरकार बनने पर भी आयोग को दुरुस्त नहीं किया गया. विरोध तेज किया जायेगा.

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कार्मिक ने विज्ञापन निकाला, लेकिन मामला अब भी पेंडिंग

फरवरी 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्यों को खाली पड़े सूचना आयुक्तों के पदों को छह माह में भरना है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी आदेश दिया था कि रिक्त सूचना आयुक्त के पद पर रिटायर्ड सूचना आयुक्त ही नहीं, बल्कि अन्य योग्य उम्मीदवार को भी पद पर रखा जा सकता है.

इसके बाद 27 फरवरी को कार्मिक एवं राजभाषा विभाग की ओर से विज्ञापन निकाला गया. रविकांत ने बताया कि इस विज्ञापन में सूचना आयुक्त के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किये गये. आवेदन भरने की अंतिम तिथि 10 अप्रैल थी. इसके बाद भी कार्मिक की ओर से उक्त पदों पर नियुक्ति नहीं की गयी. मामला अब भी पेंडिंग है.

रविकांत ने बताया कि नियमत किसी भी राज्य के सूचना आयोग में एक मुख्य सूचना आयुक्त और दस सूचना आयूक्त होने चाहिए. लेकिन सरकार के सुस्त रवैये के कारण इन पदों को बहाल नहीं किया जा रहा.

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पेंडिंग हैं लगभग छह हजार मामले

इस दौरान मंच के सदस्यों ने बताया कि राज्य सूचना आयोग के पास वर्तमान में आरटीआइ के लगभग पांच हजार मामले पेंडिंग हैं. इसके पहले से राज्य में सूचना आयुक्तों की कमी है. ऐसे में आरटीआइ के मामले आयोग में आने पर साल साल भर बाद का समय मिल रहा है.

कुछ आरटीआइ कार्यकर्ताओं ने कहा कि कई मामलों की तारीख होते हुए भी सुनवाई नहीं हो पाती क्योंकि आयोग में एक ही सूचना आयुक्त हैं.

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