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नेता प्रतिपक्ष नहीं होने के कारण मुख्य चुनाव आयुक्त का पद रिक्त, इस कारण पंचायत चुनाव में है बाधा: JMM

Ranchi : हेमंत सरकार से जल्द से जल्द पंचायत चुनाव कराने के प्रदेश भाजपा नेताओं की मांग पर झाऱखंड मुक्ति मोर्चा ने उन्हें मध्यप्रदेश की स्थिति देखने की नसीहत दे दी है.
प्रदेश प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि भाजपा शासित मध्यप्रदेश में विगत 9 माह से पंचायत चुनाव नहीं हुआ है. लेकिन इस कोरोना महामारी में वहां विधानसभा चुनाव जरूर कराया गया. जेएमएम नेता ने कहा है कि जिस भाजपा राज में पंचायत चुनाव नहीं हुए, वे आज हेमंत सरकार को चुनाव कराने की नसीहत दे रहे है.

उन्होंने कहा है कि जेएमएम तो स्वयं चाहती है कि राज्य में पंचायत चुनाव के साथ खाली हुए शहरी निकायों का भी चुनाव जल्द हो. लेकिन झारखंड के लिए दिक्कत यह है कि राज्य में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद ही रिक्त है. यह राज्य निर्वाचन आयोग का मुखिया होता है. इस पद के लिए नेता प्रतिपक्ष का होना जरूरी है. लेकिन नेता प्रतिपक्ष का चयन अभी नहीं हो सका है. पंचायत चुनाव नहीं हो कराने के पीछ यह एक सबसे बड़ी बाधा है.

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जेएमएम प्रवक्ता ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के कार्यवाही व निर्णयों में प्रदेश भाजपा नेताओं द्वारा दखल देने का काम किया जा रहा है. आज भाजपा द्वारा विधानसभा अध्यक्षों के निर्णय को चैलेंज किया जाता है. क्या देश के संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह परम्परा रही है.

2006 में अर्जुन मुंडा सरकार के दौरान घटी एक घटना का जिक्र करते हुए सुप्रियो ने कहा कि इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष को यह विशेष पावर दिया गया था कि वे किसी भी घटना में स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही कर सकते है. इसी आधार पर पिछले विधानसभा में जेएमएम के 3 और कांग्रेस के 1 विधायक पर कार्यवाही हुई थी. आज वहीं भाजपा नेता अपने द्वारा बनाये नियम-कानून व्यवस्था को तोड़ रहे है. ऐसे में यह सवाल बनता है कि क्या देश के संवैधानिक संस्थाएं भाजपा के दफ्तर से चलेगी.

सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि हेमंत सरकार के सत्ता में आये अभी तो केवल एक वर्ष ही बीता है. वहीं भाजपा का एक वर्ष पहले ही राम नाम सत्य हो चुका है. यदि कुछ बचा है तो वह 14 साल का वनवास. ऐसे में प्रदेश भाजपा नेता को मानसिक रूप से तैयार होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि केवल अपने राजनीतिक लाभ के लिए भाजपा नेताओं द्वारा मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना सही नहीं है. अगर उन्हें लड़ाई लड़नी है, तो वे सैंद्धांतिक तरीके से लड़ाई लड़े. जेएमएम भाजपा नेताओं से उम्मीद करती है कि वे नीतिगत बातों के साथ एक मंच पर आये, तो पार्टी उनसे चर्चा करने को तैयार हैं.

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