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बिहार में पल-पल बदल रही राजनीतिक परिस्थति, अगले दो से तीन दिनों में साफ होगा माजरा

Patna : बिहार में एनडीए पर संकट बढ़ता जा रहा है. पल-पल बदलती परिस्थति और नेताओं के बयान से सरकार की सेहत का अंदाजा लगाया जा सकता है. भाजपा और जदयू के बीच संबंधों की समीक्षा हो रही है. ऐसे में दोनों दल साथ रहेंगे या एक बार फिर अपने अपने रास्ते निकल पड़ेंगे, अगले दो तीन दिनों में यह तय हो जायेगा. इस बीच, पटना के सियासी गलियारे में अब यह चर्चा भी शुरू हो गयी है कि नीतीश कुमार अगर भाजपा का साथ छोड़ने का फैसला करते हैं तो गठबंधन से निकलने का इस बार उनका तरीका क्या होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस्तीफा देंगे या भाजपा कोटे के मंत्रियों को बरखास्त करेंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है.

नीतीश कुमार 2013 का इतिहास दोहरा सकते हैं. 2013 में नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़ कर उसे सत्ता से बाहर कर दिया था. तब नीतीश कुमार ने तत्कालीन डिप्टी सीएम सुशील मोदी समेत भाजपा के सारे मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था. इस बार भी वो इतिहास दोहराया जा सकता है.

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नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की हैसियत से भाजपा के सारे मंत्रियों को बर्खास्त करने की सिफारिश राज्यपाल से कर सकते हैं. राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री की सिफारिश मानने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है.

एनडीए के बीच बढ़ती दरार और जदयू के भाजपा से अलग होने की अटकलों के भी राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी कहा है कि नीतीश कुमार अगर भाजपा से अलग होना चाहेंगे, तो हमारे सामने सिर्फ एक ही रास्ता है उनको समर्थन करना. हम सरकार को गिरने नहीं दे सकते हैं. उन्होंने कहा कि अगर नीतीश भाजपा से अगल हो गये तो उस स्थिति में हम सरकार को गिरने नहीं देंगे. हमारा दायित्व बनता है कि नीतीश कुमार अगर एनडीए से बाहर निकले हैं, तो हम उनका समर्थन करें.

हमारे सामने दूसरा कोई विकल्प नहीं है. नीतीश एनडीए से अलग होते हैं तो आरजेडी को उनका साथ देना ही है. अगर भाजपा से कोई अलग होता है तो हम उसका छाती खोल कर स्वागत करेंगे.

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