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Shri Krishna Janmabhoomi जमीन पर बनी शाही ईदगाह को हटाने के मांग संबंधी याचिका सुनवाई के लिए मंजूर, सर्वे का रास्ता हुआ साफ

Mathura : मथुरा की जिला अदालत ने आज श्रीकृष्ण जन्मभूमि (Lord Krishna Janmabhoomi ) मामले में अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री के दावे के रिवीजन को स्वीकार कर लिया है.असल में खुद को भगवान श्री कृष्ण का भक्त बताते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णुशंकर जैन ,रंजना अग्निहोत्री आदि याचिका दायर की थी.

इस मामले में श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट, श्री कृष्ण जन्मभूमि सेवा संस्थान,सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ,शाही ईद गाह मस्जिद कमेटी को प्रतिवादी बनाया गया है. दरअसल निचली अदालत इस मामले में दावा किया गया था और उसे खारिज कर दिया गया था.

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अगली सुनवाई एक जुलाई को

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इसके बाद इसे मथुरा जिला अदालत (Mathura District Court) में दाखिल किया गया है और फैसले के लिए कोर्ट ने 19 मई की तारीख तय की थी. जानकारी के मुताबिक अब इस मामले की अगली सुनवाई एक जुलाई को होगी.
जानकारी के मुताबिक जिला जज का अदालत द्वारा आज मामला स्वीकार करने के बाद विवादित स्थल की सर्वे का रास्ता हुआ साफ हुआ है. याचिकाकर्ता ने श्री कृष्ण जन्मभूमि की 13.37 एकड़ भूमि को मुक्त कराकर शाही ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग की थी. जिस पर कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया है.

उम्मीद की जा रही है कि जिस तरह के वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद में सर्वे किया गया था अब मथुरा में भी इसी तरह का सर्वे किया जा सकता है. हालांकि अभी कोर्ट ने याचिका को स्वीकार किया है.

जिसके बाद सर्वे का रास्ता खुल गया है. दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा के श्रीकृष्णजन्मभूमि विवाद में सभी मामले चार महीने में पूरे करने का आदेश जिला अदालत को दिया था.

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जानिए क्या है मामला

रंजना अग्निहोत्री सुप्रीम कोर्ट की वकील हैं और राम जन्मभूमि अयोध्या मामले में भी उन्होंने कोर्ट में मुकदमा दायर किया था. उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन पर दावा किया था कि ये जमीन श्रीकृष्ण जन्मस्थान की है और यहां पर शाही ईदगाह का निर्माण किया गया है. ईदगाह की जमीन पर भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि और मंदिर का गर्भगृह है. इसको लेकर रंजना अग्निहोत्री और अन्य वकीलों ने याचिका दाखिल की थी.

अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री द्वारा कोर्ट में पेश किए गए वाद में शाही ईदगाह मस्जिद की जमीन को श्रीकृष्ण विराजमान की संपत्ति बताया गया था और कोर्ट में कहा कि संपत्ति श्रीकृष्ण विराजमान को सौंपी जाए. उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि वह स्वयं श्रीकृष्ण की भक्त हैं और उन्हें पूजा का अधिकार है.

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कोर्ट में 5 मई को हुई थी बहस

इस मामले में 5 मई को वादी की ओर से अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन व अन्य ने जिला जज की अदालत में बहस की और प्रतिवादी पक्ष की तरफ से वकील तनवीर अहमद, शाही ईदगाह मस्जिद के सचिव और अन्य अधिवक्ताओं ने भी अदालत में अपना पक्ष रखा था. जिसके बाद जिला जज राजीव भारती ने फैसला सुरक्षित रखते हुए फैसले के लिए 19 मई की तारीख तय की थी.

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साक्ष्यों को नष्ट कर रहे हैं प्रतिवादी-मनीष यादव

दूसरी तरफ मनीष यादव ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवादित स्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की थी. याचिकाकर्ता ने भगवान श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवादित स्थल पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की थी. असल में मथुरा (Mathura)में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुख्य पक्षकार मनीष यादव ने मथुरा के सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में याचिका दायर की थी और कोर्ट में अपील की थी कि ईदगाह में भगवान कृष्ण का गर्भगृह है जहां नमाज अदा की जाती है. विवादित स्थल पर मौजूद साक्ष्य को नष्ट करने की कोशिश की जा रही है. इसलिए वहां साक्ष्य की सुरक्षा के लिए वहां सीसीटीवी लगाए जाने चाहिए, ताकि 24 घंटे सीसीटीवी कैमरे गर्भगृह की निगरानी हो सके.

मनीष यादव ने अपनी याचिका में ये भी कहा कि विवादित स्थल का भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा सर्वेक्षण किया जाना चाहिए ताकि सच्चाई सबके सामने आए.

मनीष यादव ने आरोप लगाया है कि इस मामले में प्रतिवादी पक्ष सबूत नष्ट कर रहा है और वहां पर मौके पर सीसीवीटी लगाए जाने जाने चाहिए. ताकि साक्ष्य को संरक्षित किया जा सके.

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