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हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है “सूरत” बदलने कीः सरयू राय

कहा, प्रवक्ता की वजह से हुई है पार्टी की छवि धूमिल

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Akshay Kumar Jha

Ranchi: सरयू राय बनाम रघुवर दास प्रकरण में रोज ही कुछ नयी बातें सामने आ रही हैं. सरयू राय अपने आवास पर मीडिया के कुछ लोगों से बात कर रहे थे. उन्होंने पूरे मामले दुष्यंत कुमार की गजल की दो पंक्तियां पेश की. उनका कहना था, हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि “सूरत” बदलनी चाहिये. 28 तारीख के अल्टीमेटम पर मंत्री सरयू राय ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर के नेता व्यस्त रहते हैं. चुनाव का वक्त है. ऐसे में यह सोच लिया जाए कि जाते ही आपको पार्टी अध्यक्ष से मुलाकात हो जायेगी, तो ऐसी उम्मीद करना कुछ ज्यादा उम्मीद करने के जैसा होगा. मुझे उम्मीद है कि कोई ना कोई मेरी बातों पर गौर करेगा. मैं उसकी प्रतिक्षा कर रहा हूं. मैं जो बातें कर रहा हूं लिखित रूप से या मीडिया में देकर उन बातों पर विचार करना मेरे ख्याल से राज्यहित में होगा.

मैंने उचित जगह पर बात रखी, नतीजा नहीं निकला, तो दिल्ली गया

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मुझे केंद्रीय नेतृत्व पर पूरा भरोसा है और मेरे मन में इन सारी बातों को लेकर कोई दुविधा नहीं है. ऐसा समझना गलत होगा कि मैं कोई दबाव बना रहा हूं. जो भी हो रहा है जाहिर तौर पर मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा है. मेरा मानना है कि उचित स्थान, जो राज्य के स्तर पर है उन्हीं जगहों पर मैंने बात रखी है. ऐसी जगहों पर जब बात रखी जाए, तो उसपर कार्रवाई होनी चाहिये. उसका नतिजा निकलना चाहिये. ऐसा नहीं होने की सूरत में दिल्ली जाना पड़ता है. ऐसा नहीं होने पर ही बात मीडिया में भी जाती है.

प्रवक्ता की वजह से हुई है पार्टी की छवि धूमिल

इसी संदर्भ में बीजेपी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने संतुलित प्रतिक्रिया दी. और उनके जो प्रवक्ता पदाधिकारी हैं, वो ठीक इसके उल्ट हैं. इससे यही निष्कर्ष निकलेगा कि पार्टी के प्रवक्ता या पार्टी के पदाधिकारी पार्टी के आला अधिकारियों से निर्देश नहीं लेते हैं, कुछ भी कहने से पहले. प्रदेश के अध्यक्ष से अगर वो लोग निर्देश नहीं लेंगे और अपने विवेक के मुताबिक अपनी प्रतिक्रिया देंगे. तो ऐसे में पार्टी से प्रवक्ता का सामंजस्य कैसे बैठेगा. ऐसा करने से छवि धूमिल होती है. इन मामलों पर सरकार को गंभीरता से बात करनी चाहिये, सरकार को भी मीडिया को भी. यह वाकई आश्चर्यजनक है कि मुझे यह नसीहत मीडिया के माध्यम से दी जाती है कि मुझे मीडिया में चीजों को सार्वजनिक नहीं करना चाहिये. इन्हीं सभी कारणों की वजह से मन कुंठित होता है और दूरियां बढ़ती हैं. यह कहना भी सही होगा कि प्रवक्ता तव्जजो नहीं देते हैं.

कांग्रेस की जो कार्यसंस्कृति है, उससे उन्हें मेरी बात समझ में नहीं आयेगी

कांग्रेस की जो कार्यसंस्कृति है, उसके हिसाब से उन्हें मेरी बात समझ में नहीं आयेगी. मैंने ना ही कोई मोर्चा खोला है और ना ही कोई ऐसा काम कर रहा हूं, जो मुझे नहीं करना चाहिये. मैं 2016 से ही अपनी बात उठाते आया हूं. बातें मीडिया में भी आते रही हैं. कांग्रेस को यह एक विशेष परिस्थिति लग रही होगी. उन्हें लग रहा होगा कि इस बात का फायदा उठाना चाहिये. कांग्रेस को कुछ कहने से पहले बीजेपी की कार्यप्रणाली और कार्यसंस्कृति को समझने की जरूरत है. बीजेपी में परिवार की भावना से नेता कार्यकर्ता काम करते हैं कांग्रेस के लोगों को इस बात को समझना चाहिये. मैं इन सारे मामलों में इतना निश्चिंत हूं कि मैं हर मोर्चे से पीछे हटने को तैयार हूं. मेरे मन में कोई दुनिधा नहीं है, इसलिए अपनी बातों को कहा है.

मैंने सीएम की वजह से मंच नहीं छोड़ा था

हमलोग मंच पर 12 बजे से ही बैठे थे. मेरा भाषण भी हो गया था. जो भी कार्यकर्ता आये थे सभी का भाषण सुन रहे थे. मैंने अपने भाषण में भी कहा था कि अभी मुझे सुन रहे हैं, इसके बाद और भी कइयों को सुनियेगा. कार्यक्रम में काफी देर हो रही थी, मैंने कई लोगों को वक्त दे रखा था. मैं अपनी बात खत्म कर वहां से निकला. मैं जब वहां से निकला तो हमारे राष्ट्रीय महासचिव भी वहां मौजूद थे.

गौरतलब है कि सोमवार को सरयू राय जमशेदपुर के भाजपा कोल्हान प्रमंडल कार्यकर्ता सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे थे. लेकिन जैसे ही सीएम की आने की घोषणा हुई, सरयू राय टॉयलेट जाने की बात कह कर मंच से चले गये. और फिर नहीं लोटे.

सबसे गंभीर मामला है महाधिवक्ता का बार काउंसिल में मेरे खिलाफ प्रस्ताव पारित करना

उन्होंने आगे कहा किसी भी बात की गंभीरता से समझनी चाहिये. महाधिवक्ता की नियुक्ति कैबिनेट करती है. ऐसे में महाधिवक्ता की तरफ से किसी कैबिनेट मेंबर के खिलाफ बार काउंसिल में प्रस्ताव पास कराना काफी गंभीर मामला है. मैंने बार काउंसिल को भी कहा कि अगली बैठक में आप मुझे बुलाइये. मैं तो प्रतीक्षा कर रहा हूं कि कब उधर से बुलावा आता है. उन्होंने अपने प्रस्ताव में यह भी कहा था कि राजनीति करने वाले कानूनी दांवपेंच नहीं जानते हैं. मैंने कहा उनलोगों को कि मैं कई बार कोर्ट में पर्सनली एपियर हुआ हूं. उन्हें पहले मेरी बारे में जानकारी दुरुस्त करने की जरूरत है.

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