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RSS प्रमुख मोहन भागवत का छलका दर्द, कहा- विभाजन कभी ना मिटने वाली वेदना

Noida : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ RSS के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भारत-पाकिस्तान के बंटवारे का मुद्दा एकबार फिर उठाया है. उन्होंने कहा है कि मातृभूमि का विभाजन कभी ना मिटने वाली वेदना है, ये दर्द तब खत्म होगा जब विभाजन निरस्त होगा. भारत के विभाजन में सबसे पहली बलि मानवता की ली गई. भागवत ने गुरुवार को नोएडा में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम के दौरान ये बातें कही. उन्होंने आगे कहा कि ये नारों का विषय नहीं है, नारे तब भी लगते थे लेकिन विभाजन हुआ. ये सोचने का विषय है. विभाजन से न तो भारत खुश है, न ही इस्लाम के नाम पर इसकी मांग करने वाले.

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हिंदू समाज को संगठित होने की जरूरत

संघ प्रमुख ने एक बार हिंदू समाज को संगठित होने की बात कही. उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति विविधता में एकता की है, इसलिए हिंदू यह नहीं कह सकता कि मुसलमान नहीं रहेंगे. अनुशासन का पालन सबको करना होगा. अत्याचार को रोकने के लिए बल के साथ सत्य आवश्यक है.

खून की नदियां न बहे इसलिए हुआ बंटवारा

मोहन भागवत ने आगे कहा कि उस समय इस विभाजन को इसलिए स्वीकार करना पड़ा था ताकि देश में ताकि खून की नदियां ना बहें, लेकिन यह दुर्भाग्य है कि इसके उल्टा हुआ और तब से अब तक न जाने कितना खून बह चुका है.

गुरुनानक जी ने इस्लामी आक्रमण को ले चेताया था

भागवत ने कहा कि विभाजन के बाद उनका जन्म हुआ और दस साल बाद समझ में आया और जब समझ में आया तो नींद नहीं आई. उन्होंने कहा कि भारत के विभाजन के पीछे कुछ परिस्थितियां जरूर थी लेकिन इसका सबसे बड़ा कारण इस्लाम और ब्रिटिश आक्रमण ही था. उन्होंने कहा कि गुरु नानक जी ने हमें इस्लाम के आक्रमण को लेकर पहले ही चेताया था लेकिन हम सचेत नहीं हुए थे.

विभाजन से कोई भी खुश नहीं

अगर हम विभाजन को समझना चाहते हैं तो इसे समय के साथ समझना होगा. संघ प्रमुख ने आगे कहा कि जो बिखर गया था उसे एकीकृत करना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है. बता दें कि सर संघचालक मोहन भागवत “विभाजनकालीन भारत के साक्षी” पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे. उन्होंने कहा कि देश कैसे टूटा, उस इतिहास को पढ़कर आगे बढ़ना होगा. विभाजन के बाद भी दंगे होते हैं. दूसरों के लिए भी वही आवश्यक मानना जो खुद को सही लगे, यह गलत मानसिकता है. अपने प्रभुत्व का सपना देखना गलत है. राजा सबका होता है. सबकी उन्नति उसका धर्म है. उन्होंने कहा कि इस विभाजन से कोई भी खुश नहीं है और न ही ये किसी संकट का उपाय था.

किताब के लेखक कृष्णानंद सागर ने “विभाजनकालीन भारत के साक्षी” में देश के उन लोगों के अनकहे और अनसुने अनुभव को शामिल किया है, जो विभाजन के दर्द के गवाह हैं. किताब में विभाजन के साक्षी रहे लोगों के साक्षात्कारों का संकलन है.

पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोल रहे थे भागवत

पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर-12 स्थित भाऊराव देवरस सरस्वती विद्या मंदिर में किया गया. इस कार्यक्रम में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति शंभूनाथ श्रीवास्तव बतौर अध्यक्ष मौजूद रहे. विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री श्रीराम आरावकर और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव कुमार रत्नम बतौर विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे.

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