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स्वास्थ्य मंत्री के पीए ने प्रेस नोट भेज कहा – मंत्री ने MGM अस्पताल के अधीक्षक को सस्पेंड किया, सरयू ने पहले उठाये सवाल, फिर सरकार को कहा थैंक्यू, आखिर क्यों?

Jamshedpur : जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरुण कुमार के निलंबन का मामला विधायक सरयू राय के दो प्रेस बयानों के बाद उलझ गया है. बता दें कि सोमवार को स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के निजी सहायक द्वारा मंत्री के ह्वाट्सअप ग्रुप से दोपहर 2.25 बजे एक विज्ञप्ति जारी कर बताया गया – ” स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन मंत्री बन्ना गुप्ता ने एमजीएम में बदलाव के लिए आज नेपाल हॉउस में उच्च स्तरीय बैठक की जिसमें स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह,स्वास्थ्य मंत्री के आप्त सचिव आसिफ एकराम, सुप्रीटेंडेंट, डीप्यूटी सुप्रीटेंडेंट, संयुक्त सचिव अलोक त्रिवेदी समेत एमजीएम के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इस उच्चस्तरीय बैठक में निम्नलिखित निर्णय लिए गए :-

1)एमजीएम सुप्रीटेंडेंट डॉ अरुण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया।”

इसके जवाब में जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय के ह्वाट्सअप ग्रुप से सोमवार रात 8 बजकर 10 मिनट पर एक प्रेस नोट जारी हुआ. इसमें कहा गया कि –

  1. “एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक का निलंबन और मंत्री के कार्यालय से निलंबन की प्रेस विज्ञप्ति जारी होना एक भलेमानस वरीय चिकित्सक पर प्रशासनिक एवं राजनीतिक अत्याचार है. यह स्वास्थ्य मंत्री का द्वेषपूर्ण मनमाना निर्णय है. 

2. स्वास्थ्य मंत्री को बताना चाहिए कि एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ अरुण कुमार ने कौन सी ऐसी गलती किया है, जो 5 दिन बाद अवकाश ग्रहण कर रहे वरीय चिकित्सक को निलंबन की सजा देने लायक़ है. 5 दिन के भीतर मंत्री जी ऐसा क्या करने वाले थे जिसमें डॉ॰ कुमार बाधक बन रहे थे.”
3.  शालीन निर्णय का तक़ाज़ा था कि मंत्री जी उन्हें अवकाश ग्रहण करने के 5 दिन पहले रिटायर करा देते. इस तरह निलंबित कर अपमानित नहीं करते.

4. डॉ॰ अरुण कुमार का अकारण निलंबन एक असामान्य घटना है. स्वास्थ्य विभाग में हो रही अनियमितता की पोल खोलने वाली है.

इस प्रेस नोट के 50 मिनट बाद सरयू  राय. की तरफ से एक और प्रेस नोट जारी किया गया, जो इस प्रकार है –

सरयू राय का प्रेस नोट

राज्य सरकार को धन्यवाद कि स्वास्थ्य मंत्री की प्रेस विज्ञप्ति के बावजूद सरकार डॉ॰ अरुण कुमार को निलंबित नहीं करेगी बल्कि उन्हें एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक पद से हटायेगी.

सरयू राय के इस ताजा प्रेस नोट से कई सवाल खड़े हो गये हैं. समाचार लिखे जाने तक  स्वास्थ्य विभाग अथवा मंत्री की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि क्या वाकई डॉ अरुण कुमार को निलंबित किया गया है, जैसा कि स्वास्थ्य मंत्री के निजी सहायक की ओर से जारी प्रेस नोट में बताया गया था अथवा सरकार ने मंत्री की विज्ञप्ति के बावजूद एमजीएम अस्पताल के अधीक्षक को सिर्फ पद से हटाया है, निलंबित नहीं किया है. सरयू के प्रेस नोट के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या मंत्री बन्ना गुप्ता अपने ही आदेश पर कायम नहीं रह सके या या विभाग ने अपने मंत्री का ही आदेश नहीं नहीं माना?

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