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जिस अधीक्षण अभियंता को भ्रष्‍टाचार के आरोप में हेमंत सरकार ने दिया था हटाने का आदेश, रघुवर सरकार में मिली प्रोन्‍नति

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Ranchi: पथ निर्माण विभाग में एक अधीक्षण अभियंता को मुख्य अभियंता का प्रभार दिये जाने के बाद झारखंड सरकार के मंत्री सरयू राय ने नाराजगी व्ययक्तप की है. इस पर सरयू राय ने पथ निर्माण विभाग के सचिव को एक पत्र लिखा है.

सचिव को लिखे पत्र में मंत्री सरयू राय ने कहा है कि राज्य के लोक निर्माण विभागों की कार्यसंस्कृति के बारे में 18 मार्च 2018 एक पत्र लिखी गई थी, जिसमें पिछले पांच सालों से अबतक की वस्तुस्थिति की विवरण था. इस विवरण की जानकारी के बाद उम्मीद थी कि राज्य सरकार के कार्य विभागों में स्वस्थ एवं पारदर्शी कार्य संस्कृति स्थापित करने एवं वहां काबिज निहित स्वार्थी समूहों की व्यूह रचना खंडित करने का प्रयास होगा. उन्होंने पत्र में अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि ऐसा होने के सकारात्मक संकेत प्राप्त नहीं हो रहे हैं.

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वरीयता प्रदान कर मुख्‍य अभियंता को दे दिया गया प्रभार

उन्होंने कहा कि हाल में कार्यपालक अभियंताओं को अधीक्षण अभियंता का प्रभार देने और कतिपय अधीक्षण अभियंताओं को मुख्य अभियंता का प्रभार देने के संबंध में पथ निर्माण विभाग द्वारा प्रकाशित सूची को सरसरी तौर पर देखने से लगता है कि अधोहस्ताक्षरी द्वारा उद्धृत पत्र की टिप्पणी में उल्लिखित बिन्दुओं का विभाग ने संज्ञान नहीं लिया है. अधीक्षण अभियंता के प्रभार में भेजे गये एक व्यक्ति की तो नौकरी ज्वाइन करने की सही तिथि को नजरअंदाज किया गया है और उन्हें वरीयता प्रदान कर मुख्य अभियंता का प्रभार दे दिया गया है.

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हेमंत सरकार ने पद से हटाने, वसूली करने का दिया था आदेश

मंत्री ने बताया कि उन्होंने पहले जो चिट्ठी लिखी थी, उसकी टिप्पणी में कई लोगों के साथ भवन निर्माण के मुख्य अभियंता के नाम का उल्लेख भी है. मंत्री ने उन अभियंताओं के कार्यकलाप से जुड़ी एक फाइल की कॉपी भी अटैच करने की बात कही है. इसमें उनकी बातों को प्रमाणित करने के लिए तथ्य हैं. सरयू राय ने पत्र में बताया कि उसमें वर्तमान विकास आयुक्त डीके तिवारी की तत्कालीन टिप्पणी के आलोक में तब के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें भवन निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता पद से हटाने, उनसे वसूली करने और उन्हें अकार्य पद पर भेजने का स्पष्ट आदेश दिया था.

मंत्री ने पत्र में कहा है कि कुछ समय बाद इस संचिका पर तत्कालीन प्रधान सचिव और बाद में मुख्य सचिव पद से अवकाश ग्रहण करने वाली प्रशासनिक अधिकारी राजबाला वर्मा की टिप्पणी भी है, जिसमें मामले को भटकाने का प्रयास स्पष्ट है. विभागीय तत्कालीन मंत्री हाजी हुसैन अंसारी ने 22 अक्टूबर 2014 को इसे अस्वीकृत कर दिया. फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई और मामला भटका दिया गया.

सरयू राय ने कहा है कि नतीजा है कि वे तबसे अबतक मुख्य अभियंता, भवन निर्माण विभाग के पद पर कार्यरत हैं. लम्बे समय से निहित स्वार्थी समूह विभाग में ताकतवर हैं तो निश्चित तौर पर इसे प्रभावशाली संरक्षण प्राप्त हैं. 2014 में जिसके विरुद्ध कार्रवाई का स्पष्ट आदेश दिया था वर्तमान सरकार बनने के बाद भी उस आदेश की अवहेलना की गई है और सम्बंधित अधिकारी वरीयता सूची में कनीय होने के बावजूद तब से आज तक मुख्य अभियंता, भवन निर्माण विभाग के प्रभावशाली पद के प्रभार में बने हुए हैं.

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