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50 साल पहले गायब हुआ परमाणु उपकरण भी गंगा के प्रदूषित होने के लिए जिम्मेदार!   

Dehradun : 50 साल पहले गायब हुआ एक परमाणु उपकरण गंगा के प्रदूषित होने के लिए जिम्मेदार हो सकता है. बता दें कि हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के क्रम में  उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने यह बात उनसे कही है. महाराज ने 1965 के असफल नंदा देवी अभियान का जिक्र करते हुए गंगा के प्रदूषित होने का एक संभावित कारण पीएम मोदी के सामने रखा.

जानकारी के अनुसार अक्टूबर 1965 में, अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी सीआईए और भारत के आईबी ने चीन पर नजर रखने के लिए नंदा देवी चोटी के शिखर पर परमाणु संचालित जासूसी उपकरण स्थापित करने के लिए एक सीक्रेट मिशन शुरू किया था.

खबरों के अनुसार उस टीम ने बर्फबारी की वजह से परमाणु-ईंधन वाले जनरेटर और प्लूटोनियम कैपसूल को वहीं छोड़ दिया था. बाद में टीम कुछ माह बाद लौटी और खेाजबीन की, तो प्लूटोनियम के स्टॉक समेत सभी उपकरण गायब हो चुके थे. माना जाता है कि प्लूटोनियम कैपसूल की उम्र सौ साल से अधिक होती है और उसके अब भी बर्फ में कहीं दबे होने की संभावना है.

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सक्रिय प्लूटोनियम कैप्सूल से विकिरण की संभावना हो सकती है

महाराज ने इस सदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि अभी भी सक्रिय प्लूटोनियम कैप्सूल से विकिरण की संभावना हो सकती है. यह नंदा देवी इलाके से गंगा में गिरने वाली बर्फ को प्रदूषित कर रही है. उन्होंने कहा कि  मैंने प्रधानमंत्री से प्राथमिकता के आधार पर इसका अध्ययन करने और संज्ञान लेकर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है.

सोमवार को देहरादून में सतपाल महाराज ने दावा किया कि उन्होंने अतीत में भी मुद्दा उठाया था, लेकिन तब इसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि विकिरण रिसाव की एक बड़ी संभावना है जो नदी को प्रदूषित कर रही है. इसकी जांच की जानी चाहिए.

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