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चुनाव नजदीक आते ही वामदलों को महसूस होने लगी गठबंधन की जरूरत

अपनी रणनीति बदलते दिख रहे हैं वामपंथी दल

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Ranchi: वामपंथी ताकत एकजुट होकर चुनाव लड़ने की बातें कह रहे थे. लेकिन जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा, वामपंथियों की नीतियों में बदलाव देखा जा रहा है. यही वामपंथी दल पहले कहते थे कि महागठबंधन से कोई सरोकार नहीं है. अकेले भी पार्टी चुनाव में खड़ी हो सकती है. लेकिन अब इनके बोल बदल रहे हैं. शुक्रवार को वामपंथियों की संयुक्त बैठक में कुछ ऐसा ही सुनने को मिला. जहां वामपंथी दलों की ओर से कहा गया कि महागठबंधन को चुनाव में वामपंथियों को शामिल करना चाहिए. नहीं तो बीजेपी की जीत का रास्ता साफ हो जाएगा. वहीं एक तरफ महागठबंधन की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार मीडिया से स्पष्ट कहा चुके हैं कि लोकसभा चुनाव में नहीं विधानसभा चुनाव में पार्टी को सीट दी जाएगी. जिससे नाराज वामपंथियों ने अपनी एकजुटता पेश की.

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विश्वास में लें वामपंथियों को

भाकपा के भुनेश्वर मेहता ने कहा कि महागठबंधन में वामपंथियों को विश्वास में लेना चाहिए. नहीं तो इससे वोटों का बंटवारा होगा और भाजपा को इससे लाभ मिलेगा. अलग-अलग चुनाव लड़ने से बेहतर है कि एकजुट होकर चुनाव में शामिल हों. ताकि बीजेपी को हटाने का मकसद पूरा हो सके. उन्होंने सीपीआइ की ओर से कहा कि महागठबंधन से सहमति नहीं बनती है तो भी सीपीआइ हजारीबाग से लड़ेगी.

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महागठबंधन के इंतजार में हैं वामपंथी दल

यहां यह भी कहा गया कि जब तक महागठबंधन की ओर से प्रत्याशी और सीटों की घोषणा नहीं की जाती. तब तक वामपंथियों की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा नहीं कि जाएगी. महागठबंधन के फैसले के बाद ही वामपंथी अपने निर्णय की घोषणा करेंगे. वामपंथियों की ओर से कहा गया कि महागठबंधन से वामपंथी दल उन्हीं सीटों की मांग कर रहे हैं जहां पार्टी का जनाधार है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि राजमहल से सीपीआइएम की ओर से गोपी सोरेन चुनाव लड़ेंगे.

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