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नक्सलियों को खबर थी कि तीन दिन पर होगी फोर्स की अदला-बदली, घात लगाकर किया विस्फोट

इंटेलिजेंस फेल्योर और रणनीतिक चूक का नतीजा है टोकलो का नक्सली हमला

Sohan Singh

Ranchi: चाईबासा में नक्सलियों द्वारा किये गये क्लोमोर माइंस विस्फोट में झारखंड जगुआर के तीन जवानों की शहादत और इतने ही जवानों के जख्मी की घटना इंटेलिजेंस फेल्योर का नतीजा है. जिस स्थान पर नक्सलियों ने विस्फोट किया है, उसके पास पुलिस ने कई दिनों से कैंप कर रखा था.

पुलिस और अर्धसैन्य बल के जवान जिस पगडंडीनुमा रास्ते से आते-जाते थे, वहां नक्सलियों द्वारा जमीन के नीचे मौत का जाल बिछा देना इस बात का सबूत है कि उनका सूचना तंत्र और नेटवर्क पुलिस से कहीं ज्यादा मजबूत है. पुलिस की ऱणनीतिक चूक ही उसपर भारी पड़ गयी और इसी वजह से जवानों को हताहत होना पड़ा.

यह घटना चाईबासा के टोकलो थाना क्षेत्र अंतर्गत दो जंगलवर्ती गांव झंझरा और झांझी के बीच आने-जाने वाली पगडंडी पर अंजाम दी गयी है. सूत्र बताते हैं कि झांझी और झरझरा दोनों जगह पर सुरक्षा बल के जवाब पिछले कई दिनों से तैनात थे.

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झांझी पहाड़ी इलाके में ऊपर है, जबकि झरझरा नीचे की ओर स्थित है. दोनों जगहों पर सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवानों की तैनाती थी और हर तीन दिन पर इन दोनों लोकेशंस पर उनकी अदला-बदली होती थी. यह प्रक्रिया पिछले 10 फरवरी से लगातार चल रही थी.

आज यानी 4 मार्च को भी झांझी से झारखंड जगुआर की टीम नीचे उतर कर झरझरा आ रही थी, लेकिन झरझरा से महज 70 मीटर पहले नक्सलियों ने विस्फोट कर दिया, जिसमें तीन जवान शहीद हो गये. माना जा रहा है कि नक्सलियों ने पुलिस की गतिविधि की रेकी करने के बाद ही उनके रास्ते में माइंस बिछायी.

उन्हें संभवतः इस बात की जानकारी मिल गई थी कि आज सुरक्षा बलों की अदला-बदली होगी. घात लगाकर उन्होंने तय वक्त पर विस्फोट किया और पुलिस के जवान हताहत हो गये.

रणनीतिक जानकार बताते हैं कि नक्सली प्रभाव वाले इलाके में एलआरपी या सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाकर्मियों को हर एक ही रास्ते का उपयोग न करने की हिदायत दी जाती है. उन्हें जंगली इलाकों में किसी पगडंडी या तयशुदा रास्ते के बजाय ऐसा रास्ता चुनने की सलाह दी जाती है, जिससे आम तौर पर आवागमन नहीं होता हो.

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घटनास्थल की जो तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध है, उससे साफ है कि नक्सलियों ने पगडंडीनुमा रास्ते के नीचे क्लेमोर माइंस से विस्फोट कराया है. मुमकिन है कि पुलिसकर्मी अगर निश्चित पगडंडीनुमा रास्ते के बजाय दूसरा रास्ता तलाशते तो शायद नक्सली अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाते.

हाल की घटनाओं पर गौर करें तो झारखंड में नक्सलियों ने अपनी बदली हुई रणनीति से पुलिस के लिए कड़ी चुनौती पेश कर दी है. उन्होंने सिंहभूम, पलामू, लातेहार, चतरा सहित कई जिलों में पुलिस के रास्तों में लैंडमाइंस और बम बिछा रखा है. हाल के दिनों में विस्फोट की तकरीबन आधा दर्जन घटनाएं हुई हैं, जिसमें पुलिस के साथ-साथ ग्रामीण भी हताहत हुए हैं.

जाहिर है, तकरीबन दो हफ्ते पहले झारखंड के डीजीपी बने नीरज सिन्हा के सामने पुलिस के सूचना तंत्र और नक्सलियों के खिलाफ रणनीतिक लड़ाई को धार देने की चुनौती है. उम्मीद की जानी चाहिए कि नक्सलियों पर नकेल के लिए पुलिस के अभियान के नतीजे आनेवाले दिनों में दिखेंगे.

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