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कोरोना की हर पर्ची पर लिखा जाता है जिस Dolo-650 का नाम, उसके MD ने बताई दवा की सफलता की कहानी  

New Delhi : अभी कोरोना महामारी के दौर में अगर सबसे ज्यादा कोई नाम सुना जाता है तो वह सीरम इंस्टीट्यूट की वैक्सीन कोविशील्ड और भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवैक्सीन (Covaxin)  है.

इसी बीच एक दवा ने अपनी मौजूदगी ऐसी बनाई है कि किसी को भरोसा नहीं होगा. जी हां. इस दवा का नाम डोलो-650 (Dolo-650) है. यह वही दवा है जो लगभग हर कोरोना मरीज की पर्ची लिखी जाती है. दरअसल यह दवा बुखार के खिलाफ काम करती है और इसका कॉम्बिनेशन पैरासिटामोल (Paracetamol) है, जिसे आप कालपोल के तौर पर लेते रहे हैं.

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माइक्रो लैब्स बनाती है ये दवा

कोरोना में इस दवा ने उतना ही नाम कमाया है जितना कि कोविशील्ड और कोवैक्सीन ने कमाया है. इस दवा के बारे में पढ़ें तो इसे बनाने वाली कंपनी का नाम माइक्रो लैब्स है. यह दवा ‘माइल्ड एनालजेसिक’ यानी कि दर्द निवारक और ‘एंटीपायरेटिक’ अर्थात बुखार घटाने वाली श्रेणी में आती है. माइक्रो लैब्स के चेयरमैन और एमडी का नाम है दिलीप सुराना. सुराना के नाम फार्मा इंडिस्ट्री में 30 साल का लंबा चौड़ा तजुर्बा है और वे अभी घर का ही बिजनेस संभाल रहे हैं. ‘मनीकंट्रोल’ से खास बातचीत में सुराना ने बताया कि डोलो-650 के इतना लोकप्रिय होने की वजह आखिर क्या है.

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दवा को कैसे मिली लोकप्रियता

अपनी दवा शुरू करने की प्लानिंग के बारे में दिलीप सुराना ने कहा कि पैरासिटामोल 500 एमजी का बाजार हमेशा से भीड़भाड़ वाला रहा है. यानी बहुतेरी कंपनियां है जो पैरासिटामोल 500 एमजी बनाती और बेचती हैं. लेकिन सुराना को लगा कि वे पैरासिटामोल 500 एमजी को कुछ खास अंदाज में पेश कर सकते हैं. पैरासिटामोल 500 केवल बुखार और दर्द से राहत देने के लिए है. दर्द और बुखार का दायरा बढ़ाया गया क्योंकि दर्द भी कई तरह का हो सकता है और बुखार भी. यही सोच कर पैरासिटामोल को 650 एमजी में उतारा गया. फिर डोलो-650 का इजाद किया गया.

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लोगों को बीच ऐसे पहुंची डोलो-650

सुराना ने बताया कि कई साल से डोलो-650 मार्केट में चल रहा है, लेकिन हाल में इसे सबसे अधिक लोकप्रियता मिली. सुराना ने कहा कि कई वजह है जिसने डोलो को लोकप्रियता दी. बुखार और बदन दर्द कोविड के मुख्य लक्षण हैं जिसके लिए डोलो-650 सबसे अच्छी दवा हो सकती है. कोविड के दौरान लोग क्वारंटीन थे. यहां तक कि डॉक्टर भी मरीजों को नहीं देख रहे थे. इस बीच डोलो 650 का नाम व्हाट्सऐप, एसएमएस और वॉयस मैसेज में खूब प्रचारित हुआ. शायद यही वजह है कि कोरोना के दौरान एक व्यक्ति के मुंह से निकली बात किसी और तक पहुंची और देखते-देखते इस चेन से असंख्य लोग जुड़ गए. आज डोलो-650 देश के कई परिवारों तक पहुंच गया है.

कंपनी ने अपनाई ये रणनीति

दिलीप सुराना कहते हैं कि कोरोना के दौरान जनजागरूकता के चलते भी डोलो 650 को लोकप्रियता मिली. वैक्सीनेशन ड्राइव के दौरान पोस्टर लगाकर माइक्रो लैब्स लोगों को बताती रही कि आपको क्या करना है और क्या नहीं. ये पोस्टर पूरे देश के वैक्सीनेशन सेंटर पर चस्पा किए गए. पोस्टर पर डोलो का नाम था.

इसके साथ ही माइक्रो लैब्स के कर्मचारी-पदाधिकारी वैक्सीनेशन सेंटर पर गए और हेल्थकेयर वर्कर्स को डोलो-650 एमजी के बारे में बताया. वैक्सीनेशन सेंटर पर हेल्थ कर्मचारियों को डोलो-650, मास्क और सैनिटाइजर दिए गए. अगर वैक्सीन लेने के बाद किसी व्यक्ति को बुखार आता है, तो डॉक्टर्स ने डोलो-650 एमजी खाने की सलाह दी. इस तरह लोगों के बीच से यह दवा निकली और जमीनी स्तर से लेकर बड़े-बड़े अस्पतालों में इसे पर्चियों पर लिखा जा रहा है.

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