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मकसद और विचार आज भी वही है जनता को आज़ादी दिलाना : सपा नेता रंजन यादव

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Manoj Dutt Dev

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Latehar : पूर्व भाकपा माओवादी एवं वर्तमान में चतरा लोकसभा से सपा प्रत्याशी रंजन यादव ने गारू प्रखंड के मिरचैया फोल झरना में वन भोज कार्यक्रर्म आयोजित किया. इस दौरान न्‍यूज विंग के संवाददता ने रंजन यादव से खास बात चीत की. उन्होंने बताया कि संघर्ष कल भी जनता के लिए कर रहा था, आज भी जनता के लिए कर रहा हूं. फर्क यही है पहले माओवादी नेता बन कर खुल कर नहीं कर पाता था, आज खुल करता हूं. राजनीती करने का मकसद और विचार वही है, जनता को शोषण से आज़ादी दिलाना.

सवाल : चतरा लोकसभा सीट ही क्यों?

जवाब : समाजवादी पार्टी एवं बहुजन समाजवादी पार्टी ने गठबंधन कर एक साथ चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है. सपा को चतरा और पलामू को बसपा का सीट आवंटित हुआ है. वहीं चतरा लोकसभा का मैं स्थानीय हूं. पलामू सीट से भी बसपा प्रत्याशी स्थानीय होगा. कोई बिहार से आ कर राजनीति नहीं करेगा. हमारी पार्टी समाजवाद स्थापित कर सभी को सामान हक अधिकार न्याय देती है और देगी. असमानता को समाजवाद से ही दूर किया जा सकता है.

सवाल : आपकी संघर्ष यात्रा कब शुरू हुई और मुद्दा क्या था?

जवाब :  रंजन यादव ने बताया कि वर्ष 1190 में ज़मींदारी प्रथा के खिलाफ मैं भाकपा माओवादी में शामिल हुआ. 25 वर्षों तक माओवाद विचार धारा के साथ शोषित दबी कुचली जनता के लिए संघर्ष किया. उन्हें हक अधिकारी दिलाने कि राजनीति की. जमींदारी प्रथा को तकरीबन पूरी तरहा समाप्‍त किया. 25 वर्षों में आठ साल जेल में रह कर भी जनता के लिए संघर्स किया. जेल से निकलने के बाद जंगलों में छुपकर संघर्ष करना छोड़ समाजवादी पार्टी में शामिल होकर खुल कर जनता के लिए संघर्ष करने लगा. जंगलों में रहने वाले ग्रामीण पर वन विभाग दोवारा झूठा केस कर परेशान करने और केस में फंसे ग्रामीणों को निजात दिलाना है.

सवाल : एनएफएफआर की अधिसूचना रद्द नहीं हुई?

जवाब : जब मैं भाकपा माओवादी में था तब भी नेतरहाट फीड फैयरिंग रेंज निर्माण के लिए संघर्ष किया. जनता के बीच जा कर उन्हें अपनी ज़मीन नहीं छोड़ने की बात करता रहा था. एनएफएफआर में शामिल सभी ग्राम आदिवासी ग्राम है, जो एक शोषित आबादी है, गरीब आबादी है. नेतरहाट में किसी भी कीमत पर फायरिंग रेंज नहीं बनने देंगे, मैं पहले भी इसका विरोध करता था, आज भी करता हूं. जब तक एन एफएफआर की अधिसूचना रद्द नहीं होती है, मैं प्रभावित क्षेत्र की जनता साथ इसका विरोध करता रहूंगा.

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सवाल : मंडल डैम निर्माण रोकने के आप अभियुक्‍त रह चुके हैं, अब निर्माण फिर से होगा?

जवाब : मंडल डैम का निर्माण इसलिए रोका गया था क्योंकि 19 ग्राम प्रभावित हो रहे थे. सर्वे मात्र 10 ग्राम का हुआ था. वहीं विथापन का पूरा लाभ नहीं मिल रहा था, इसलिए निर्माण कार्य को रोका गया था. यदि मंडल का निर्माण पुन: हो रहा है तो 10 नहीं, 19 ग्राम को विस्थापित ग्राम में शामिल किया जाना चाहिए. साथ ही साथ ज़मीन मुआवजा के साथ नौकरी भी मिलना चाहिए. मंडल झारखंड का धरोहर है, इसका लाभ झारखंड को मिलना चाहिए ना की बिहार को.

सवाल : आगामी 2019 लोस चुनाव में आपका मुद्दा क्या होगा?

जवाब : पहली बार जब मैं चुनाव 2009 में सपा से लड़ा था मेरा विरोध भाकपा माओवादी संगठन और प्रशासन दोनों ने किया. बावजूद मुझे बेहतर वोट मिला. 2209 में बढनिया घाटी में नक्सली हमला हो गया, जिसके बाद मेरे प्रतिद्धदी प्रत्याशी इंदर सिंह नामधारी ने प्रशासन को इशार कर सभी सुदूर बूथों में वोटिंग बंद करा कर उन्हें वापस बुलवा लिया. नहीं तो मैं 2009 में ही सांसद होता.

सवाल : भाजपा के विरुद्ध आपका गठबंधन कैसे लड़ेगा और जीतेगा?

जवाब : भाजपा सांसद सुनील सिंह एक बाहरी प्रत्याशी हैं. जनता अब स्थानीय सांसद चाहती है. भाजपा महागठबंधन से सपा और बसपा का गठबंधन नहीं डरती है. इस बार मेरी जित पक्की है. भाजपा मंदिर कि राजनीती करता और कांग्रेस मस्जिद की. लेकिन अब जनता जागरूक हो चुकी है, जाती और धर्म की राजनीति में नहीं फंसने वाली है.

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