JamshedpurJharkhand

कलेजे के टुकड़े को बांधकर रखने वाली मां को दिखी उम्मीद की किरण

Ghatsila: घाटशिला में कलेजे के टुकड़े को जंजीर से बांध कर रखने को विवश मां को उम्मीद की नई किरण नजर आई है. विक्षिप्त बेटे गंगा राम बानरा को इलाज के लिये रिम्स भेजा गया है. अब तक विक्षिप्त बेटे को रस्सी से बांधकर रखने के लिये मजबूर थी, अब उसे लग रहा है कि रिम्स में इलाज के बाद उनका बेटा ठीक हो जायेगा और बुढ़ापे का सहारा बन जायेगा. घाटशिला विधायक रामदास सोरेन की पहल पर रुयबरी बानरा के बेटे का उपचार शुरू हो रहा है.

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ग्रामीण बताते हैं कि घाटशिला के मुसाबनी प्रखंड के बेनाशोल पंचायत के दुर्गा बस्ती में पिछले एक महीने से जंजीर के सहारे अपने दिल के टुकड़े को घर के आंगन में अमरूद पेड़ के सहारे बांधकर रखा था. दरअसल, गंगा राम बानरा नामक इस युवक की दिमागी हालत ठीक नहीं है और गांव में कहीं भी उत्पात मचाना शुरू कर देता है. इसीलिए गांव वालों ने उनके परिवार को बांध कर रखने की सलाह दी थी और उनका बेहतर जगह इलाज करने को कहा गया था, लेकिन उनकी मां मनरेगा मजदूर है बड़ी मुश्किल से उनका परिवार चलता है उनका पिता भी दूसरी बीवी के साथ कहीं दूसरी जगह रहता है.

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पीड़ित मां ने बताया कि जितना भी जमा पूंजी किए थे बेटे का इलाज में सारा रुपए खर्च कर दिए हैं. अब और इसके इलाज का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं घर में खाने के लाले पड़ गए हैं.

मुखिया सुकुरमुनी हेम्ब्रम और समाजसेवी गौरांग माहली के मदद से उनको एक सरकारी डॉक्टर के पास दिखाया गया था. अब बेहतर इलाज के लिये रिम्स भेजा गया है. बताया गया है कि पीड़ित परिवार के पास ना ही राशन कार्ड है. मनरेगा मजदूरी से वह दो जून की रोटी का जुगाड़ करती है.

पीड़ित युवक की मां बताती है कि अभी वह कई दिनों से काम पर नहीं गई है. जिसके कारण उनके घर में खाने के लाले पड़ गए हैं. स्थानीय समाजसेवी गौरंग माहली का कहना है हमने पहले भी इनका कुछ मदद किया था, लेकिन अब पानी सर के ऊपर से उठ गया है.

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