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शहरी मतदाताओं का मूड भाजपा के लिए खतरे की घंटी : एडीआर का सर्वे

NewDelhi : एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स)  का सर्वे कहता है कि इस बार शहरी वोटर भाजपा से नाराज दिख रहे हैं.  बता दें कि केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा अपनी वापसी का जोरदार प्रयास कर रही है.  भाजपा की निगाहें खासकर शहरी मतदाताओं पर हैं, जहां पार्टी की अच्छी-खासी पैठ मानी जाती है, लेकिन इस बार शहरी वोटर भी भाजपा से नाराज नजर आ रहे   हैं.  यह खुलासा राजनीतिक सुधारों पर नजर रखने वाली संस्था एडीआर  के एक सर्वे में हुआ है. बता दें कि एडीआर ने आम जन से जुड़े 24 प्रमुख मुद्दों को लेकर शहरी मतदाताओं के बीच एक सर्वे किया.

सर्वे की मानें तो शहरी वोटर यानी अर्बन वोटरों में रोजगार, स्वास्थ्य, पानी, प्रदूषण और शिक्षा समेत तमाम मोर्चे पर मोदी सरकार के कामकाज को लेकर बेहद निराशा  है . शहरी वोटरों ने औसत से भी कम यानी बिलो एवरेज रेटिंग दी है. यह  भाजपा के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है.

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मोदी सरकार के कामकाज को पूरी तरह नकार दिया

एडीआर (एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स)  के सर्वे के अनुसार शहरी मतदाताओं के लिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है. सर्वे में 51.60 फीसद मतदाताओं ने कहा है कि रोजगार का अवसर उनकी प्राथमिकता है. वहीं, 39.41 फीसद मतदाताओं ने स्वास्थ्य, 37.17 फीसद मतदाताओं ने यातायात व्यवस्था, 35.03 फीसद मतदाताओं ने पीने का पानी, 34.91 फीसद मतदाताओं ने अच्छी सड़क और 34.14 फीसद मतदाताओं ने पानी और वायु प्रदूषण को अपना प्रमुख मुद्दा बताया है.

सर्वे कहता है कि शहरी मतदाताओं के लिए रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है और उन्होंने इस फ्रंट पर मोदी सरकार के कामकाज को पूरी तरह नकार दिया है. मोदी सरकार भले ही नयी नौकरियां पैदा करने का दावा कर रही हो, लेकिन शहरी मतदाता रोजगार के मोर्चे पर सरकार द्वारा उठाये गये कदमों को औसत से भी कम मानते हैं.

इसी क्रम मे रोजमर्रा के जीवन से जुड़े तमाम मुद्दों स्वास्थ्य सुविधाएं, पीने का पानी, सड़क, शिक्षा, अतिक्रमण और बिजली जैसे मुद्दों पर भी शहरी मतदाता सरकार के साथ खड़े नहीं दिख रहे हैं. जान लें कि इन मुद्दों पर भी पांच में से 2.64 से भी कम यानी औसत से भी कम अंक भाजपा को मिले हैं.

ग्रामीण मतदाता भी सरकार के कामकाज से खुश नहीं

जहां तक ग्रामीण मतदाताओं की बात है तो शहरी मतदाताओं के अलावा ग्रामीण मतदाता भी सरकार के कामकाज से खुश नहीं है. एडीआर के ही सर्वे में यह बात भी सामने आयी है. इस सर्वे के अनुसार ग्रामीण मतदाताओं के लिए भी रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है और 44.21 फीसद ग्रामीण मतदाता इसके पक्ष में हैं, लेकिन उनका भी मानना है कि मोदी सरकार ने इस फ्रंट पर खास काम नहीं किया है. ग्रामीण मतदाताओं ने रोजगार के मोर्चे पर सरकार के कामकाज को 5 में से 2.17 रेटिंग दी है. यहऔसत से भी कम है.

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