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मोदी सरकार ने यूपीए की नीतियों पर ही की है रफाल डील, कैबिनेट सुरक्षा समिति ने दी थी मंजूरी  

जानकारी मिल रही है कि साल 2013 की रक्षा खरीद नीति के अनुसार ही रफाल जेट खरीदे गये थे.  उस समय देश में यूपीए की सरकार थी.

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NewDelhi :  रक्षा मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट में रफाल डील पर निर्णय लेने की प्रक्रिया की जानकारी दाखिल करने जा रहा है. इस क्रम में जानकारी मिल रही है कि साल 2013 की रक्षा खरीद नीति के अनुसार ही रफाल जेट खरीदे गये थे.  उस समय देश में यूपीए की सरकार थी. बताया गया है कि सुरक्षा पर बनी कैबिनेट कमेटी ने सभी महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं पर अपनी मंजूरी उस समय दी थी जब इस फाइटर जेट को खरीदने की प्रक्रिया चल रही थी.      प्रक्रिया के दौरान कैबिनेट सुरक्षा समिति को न सिर्फ जानकारी दी गयी थी, ​बल्कि कोई भी कदम उठाने से पहले उसकी मंजूरी भी ली गयी थी. रक्षा खरीद मामलों में सरकार की कैबिनेट सुरक्षा समिति ही निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था होती है. सामान्य तौर पर खरीद प्रक्रिया के अंत में कैबिनट सुरक्षा समिति की मंजूरी की जरूरत तब पड़ती है जब फाइनल वित्तीय मंजूरी की प्रकिया शुरू होनी होती है.  यह डील पर साइन होने से पहले का सिर्फ एक कदम भर है.  रक्षा और सैन्य खरीद प्रक्रिया के दौरान हालांकि एक शर्त यह भी होती है फैसले कैबिनेट सुरक्षा समिति के द्वारा रक्षा खरीद बोर्ड की अनुशंसा के आधार पर ही लिये जायेंगे.

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इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार  7.87 बिलियन यूरो की डील पर हस्ताक्षर होने से पूर्व मतभेद सुलझ गये थे

इकॉनॉमिक टाइम्स के अनुसार सितंबर 2016 में कम से कम 10 विवादित बिंदुओं पर मतभेद थे. इन सभी को  7.87 बिलियन यूरो की डील पर हस्ताक्षर होने से पूर्व ही कैबिनेट सुरक्षा समिति ने सुलझा लिया था.  इनमें एक मुद्दा बेंचमार्क कीमतों को अलग करना था. डील से पूर्व टीम के वित्तीय सदस्यों ने कीमतों पर मोलभाव से पहले ही कीमतों का अनुमान लगा​ लिया था.  टीम का मानना था कि 36 जेट के बदले में 5.2 बिलियन यूरो ही अनुमानित कीमत होगी. हालांकि भारतीय टीम में शामिल बहुसंख्यक लोगों का मानना था कि यह तरीका सही नहीं है. सुझाव दिया गया कि इससे पहले की गयी 126 हवाई जहाजों की डील के लिए आयी निविदाओं में से इनपुट लेकर कीमतों का आकलन किया जाना चाहिए.  लेकिन इसका नतीजा यह हुआ कि कीमतें ऊपर चली गयीं और 8.2 बिलियन यूरो तक पहुंच गयीं.  रक्षा अधिग्रहण परिषद के द्वारा पुनरीक्षण के बाद कैबिनेट सुरक्षा समिति ने फॉर्मूला और नयी कीमतों दोनों को मंजूरी दे दी.  इकॉनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीसीएस की अनु​मति फ्रांस की सरकार द्वारा संप्रभु गारंटी  के आधार पर अग्रिम और प्रदर्शन बैंक गारंटी देने से डेसॉल्ट एविएशन को छूट देने के लिए ली गयी थी.

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 डील के सौदे के ऑफसेट हिस्से के लिए बैंक गारंटी हासिल कर ली गयी

भारतीय टीम ने बहुत कोशिश की लेकिन फ्रांस की सरकार ने कहा कि अमेरिका और रूस भी सरकारों के बीच में हुए सौदे में बैंक गारंटी की शर्त नहीं रखते.  हालांकि, डील के सौदे के ऑफसेट हिस्से के लिए बैंक गारंटी हासिल कर ली गयी.  इससे रक्षा मंत्रालय को यह शक्ति मिल गयी कि वह नियमों का पालन न करने वाली फ्रांसीसी फर्मों पर जुर्माना लगा सकती है. कैबिनेट सुरक्षा समिति  द्वारा उठाये गये अन्‍य मुद्दों में 36 जेट विमानों की डिलीवरी की डेट पर हुए फैसले और विधि मंत्रालय द्वारा सुझायी गयी ठेके की शर्तों में परिवर्तन शामिल हैं.  इसके अलावा कैबिनेट सुरक्षा समिति में टीम के सदस्यों ने यूरोफाइटर द्वारा दिये गये जवाबी ऑफर को नकार कर आगे बढ़ते हुए सौदे को मंजूरी दी थी.  इकॉनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार फ्रांसीसी सरकार के साथ ठेके के कागजात पर हस्ताक्षर करने से पहले वार्ता करने वाली टीम के कुछ सदस्यों की आपत्तियां बहुमत के आधार पर नकार दी गयी थीं.

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