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रांची के पल्स अस्पताल की जमीन की गायब जांच रिपोर्ट मिली, 12 दिनों से ढूंढ रहे थे अधिकारी

Ranchi : करीब 12 दिन की लगातार खोजबिन के बाद जिला प्रशासन को आखिरकार पल्स अस्पातल की जमीन से जुड़ी फाइल मिल गई है. हालांकि, इसकी आधिकारीक पुष्टि नहीं की जा रही है. मगर जानकारी के अनुसार एक पूर्व कर्मी के द्वारा ही जांच रिपोर्ट कार्यालय में कहीं रख दी गई थी. अब वह मिल गई. डीसी के आदेश के बाद एसी कार्यालय लगातार फ़ाइल को ढूंढ़ रहा था. राजस्व शाखा से संबंधित सभी अलमीरा, बक्सा और फाइलों को खंगाला गया. डीसी ने 7 मई को पत्र लिखकर अपर समाहर्ता राजेश बरवार को 48 घंटे में रिपोर्ट उपलब्ध कराने कहा था.

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मगर खोजबिन में रिपोर्ट नहीं मिलने पर 11 मई को राजेश बरवार ने तत्कालीन अपर समाहर्ता (वर्तमान में नगर आयुक्त धनबाद) सत्येंद्र कुमार व बड़गाईं सीओ को पत्र लिखकर जांच से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने कहा था. क्योंकि, जांच टीम और जांच रिपोर्ट से संबंधित कोई सूचना कार्यालय के रजिस्टर में नहीं मिल पा रही थी.

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इसके अलावा अपर समाहर्ता कार्यालय के तत्कालीन कर्मचारी व वर्तमान कर्मी को भी नोटिस देकर अपर समाहर्ता राजेश बरवार ने जांच रिपोर्ट से संबंधित फाइल मांगी थी.

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डीसी ने भी तत्कालीन एसी को लिखा था पत्र

तत्कालीन अपर समाहर्ता की ओर से जांच रिपोर्ट से संबंधित जवाब नहीं देने के मामले में डीसी छवि रंजन ने नाराजगी जाहिर की थी.

उन्होंने खुद तत्कालीन एसी सत्येंद्र कुमार को पत्र लिखकर तीन बिंदुओं पर 48 घंटे के अंदर स्पष्ट प्रतिवेदन या सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश देते हुए कहा था कि इसे अंतिम स्मार समझा जाए.

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जांच में भुईंहरी जमीन होने की बात

पल्स हॉस्पिटल के निर्माण को लेकर नारायण विश्वकर्मा नामक व्यक्ति ने फरवरी 2020 में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से शिकायत की थी यह भुईंहरी जमीन पर बनी है. 13 फरवरी 2020 को ही मुख्यमंत्री ने रांची डीसी को निर्देश देते हुए कहा था कि आरोपियों पर कार्रवाई कर सूचित करें.

 

इसके बाद तत्कालीन डीसी राय महिमापत रे के निर्देश पर अपर समाहर्ता सत्येंद्र कुमार और बड़गाईं सीओ ने जांच की थी. मिली जानकारी के अनुसार उक्त रिपोर्ट में भी कहा गया है कि अस्पताल का निर्माण जिस जमीन पर हुई है वह भुईंहरी नेचर की है.

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रद्द कर दिया गया था म्यूटेशन अपील

भुईंहरी नेचर की जमीन पर ही पल्स हॉस्पिटल का निर्माण हुआ है. जानकारी के अनुसार जमीन के म्यूटेशन के लिए बड़गाईं अंचल में आवेदन किया गया था. मगर तत्कालीन सीओ विनोद प्रजापति ने उसे रिजेक्ट कर दिया.

रिजेक्ट करने के कारण में उन्होंने स्पष्ट किया था कि राजस्व कर्मचारी और अंचल निरीक्षक की ओर से प्रतिवेदित किया गया है कि म्यूटेशन के लिए आवेदित भूमि सर्व खतियान के अनुसार ऑनलाइन बायकास्ट भुईंहरी दर्ज है. जो सरकार के निहित नहीं है. अत: प्रतिवेदन के आधार पर नामांतरण अस्वीकृत किया जाता है.

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