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अफसरों-कर्मियों के प्रमोशन का मामला- खंगाली जा रहीं 21 साल की फाइलें

Ranchi : झारखंड में पिछले 21 साल में सरकारी अधिकारियों-कर्मियों को दिए गये प्रमोशन की फाइलें खंगाली जा रही हैं. सभी विभागों में उन अधिकारियों-कर्मियों की सूची तैयार की जा रही है, जिन्हें इस अवधि में प्रमोशन दिया गया है. सरकार की ओर से गठित समिति ने सबसे पहले सचिवालय सहायक से अवर सचिव,अवर सचिव से उप सचिव व संयुक्त सचिव स्तर तक प्रमोशन के मामलों का अध्ययन शुरू कर दिया है.

इनके अलावा सभी सेवाओं में और सभी पदों पर अब तक दी गयी प्रोन्नति के मामलों की भी जांच की जायेगी. सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के आलोक में कार्मिक विभाग ने सभी विभागों से प्रोन्नति का ब्योरा मांगा है.

विभागों को भेजे गये पत्र में राज्य गठन यानी 15 नवंबर 2000 के उपरांत दिये गये प्रमोशन की कोटिवार सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है.

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राज्य में 6 माह से प्रमोशन पर लगी है रोक

बता दें कि झारखंड सरकार ने बीते दिसंबर में एक आदेश निकाल कर राज्य में सभी सेवाओं और पदों पर प्रमोशन पर रोक लगा दी थी.

एसटी-एससी के कर्मियों को मेरिट के आधार पर समाान्य वर्ग में प्रमोशन देने के लिए विधानसभा की विशेष कमेटी ने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कहा गया था कि एसटी-एससी कर्मियों की प्रोन्नति में नियमों की अवलेहना हुई है.

विधानसभा कमेटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार की तरफ से इस बाबत एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया था. समिति सभी विभागों में अब तक दिये गये प्रमोशन का अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद नयी नियमावली तैयार की जायेगी.

वैसे पदाधिकारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं,जिन्होंने एसटी-एससी प्रमोशन में आरक्षण संबंधी नियमों की अनदेखी की है. यह भी आरोप है कि विधानसभा की विशेष समिति और सरकार को गुमराह किया गया है.

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उच्चस्तरीय समिति कर रही अध्ययन

राज्य सरकार ने प्रमोशन में आ रही अड़चनों को दूर करने के लिए जिस समिति का गठन किया है, उसके अध्यक्ष एल खियांग्ते हैं. इस समिति में कार्मिक सचिव व कल्याण विभाग के प्रधान सचिव सदस्य के रूप में शामिल हैं.

इस समिति को अब तक हुए प्रमोशन के अध्ययन की जिम्मेदारी सौंपी गयी है. समिति सभी विभागों में एसटी-एससी के प्रतिनिधित्व का भी करेगी. कमेटी एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी.

इसकी रिपोर्ट के बाद सरकार प्रमोशन पर नयी नियमावली भी बनायेगी. संभावना है कि इसके बाद प्रमोशन संबंधी अड़चनों को दूर कर अधिकारियों-कर्मियों के प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दी जायेगी.

सभी वर्गों की रिपोर्ट हो रही तैयार

प्रत्येक विभाग में दिये गये प्रमोशन पर सभी वर्ग में सूची तैयार हो रही है. वर्ग क,ख,ग,घ में जितने स्वीकृत बल हैं, उसमें कार्यरत बल के तहत अब तक अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति और अन्य जाति से कितने को प्रमोशन दिया गया है, इसकी रिपोर्ट देने को कहा गया है. विभाग प्रमोशन के प्रोसेस पर अपना रिमार्क्स भी देंगे.

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प्रमोशन को लेकर अनुशंसाएं जो विधानसभा समिति ने की हैं

  • झारखंड गठन से अब तक एसटी-एससी के वरीय कर्मियों को प्रोन्नति से वंचित कर सामान्य वर्ग के कनीय कर्मियों को दी गई प्रोन्नति रद की जाए. प्रमोशन से वंचित एसटी-एससी के वरीय कर्मियों को तत्काल प्रभाव से आर्थिक लाभ के साथ प्रोन्नति दी जाए.
  • नियम की अनदेखी कर प्रोन्नति की कार्रवाई में शामिल प्रोन्नति समिति के तत्कालीन सभी पदाधिकारियों को चिन्हित किया जाए और उनके खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून के तहत कानूनी कार्रवाई के साथ विभागीय कार्रवाई हो.
  • कार्मिक विभाग में नियम विरुद्ध मंतव्य में शामिल सभी लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए. सेवानिवृत्त पदाधिकारी और कर्मी को सेवानिवृत्ति के आधार पर अपराध से मुक्त नहीं किया जाए, क्योंकि उस मंतव्य से एससी-एसटी संवर्ग के सरकारी सेवकों को प्रताड़ना झेलनी पड़ी है, जो अपराध की श्रेणी में आता है.
  • अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की प्रोन्नति से संबंधित कोई मामला अगर लंबे समय से न्यायालय में लंबित है, तो सशर्त प्रोन्नति प्रदान की जाए.
  • वर्ष 2008 में वाणिज्य-कर विभाग झारखंड में वरीय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के पदाधिकारियों को प्रोन्नति से वंचित कर कनीय सामान्य वर्ग के पदाधिकारियों को प्रोन्नति देकर नियम विरुद्ध परंपरा की शुरुआत की गई थी. इसकी निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की अनुशंसा की गई है.

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