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पुराना बाजार की रेल पटरी पर सजता है बाजार, दे रहा अमृतसर जैसे कांड को आमंत्रण

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Vikash pandey

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Dhanbad : पंजाब के अमृतसर में विजयादशमी की शाम रेल पटरी पर हुआ हादसा पूरे देश के लिए सबक है. जिसने 70 से अधिक जानें कुछ ही पलों में छीन ली. सैकड़ों लोग घायल हुए. ऐसा हादसा कहीं और न हो इसके लिए सबको सावधान रहने की जरूरत है. लेकिन रेल प्रशासन के जागरुकता पर धनबाद के पुराना बाजार की स्थिति को देखकर ऐसा नहीं लगता. यहां आती जाती ट्रेनों के बीच रेलवे लाइन पर पूरा बाजार सजा होता है. पुराना बाजार में रेलवे ट्रैक पर सुबह से देर रात तक अस्थायी दुकानें सजती हैं और खरीदारों की भीड़ लगी रहती है. इसके अलावा जोड़ा फाटक, बैंक मोड़ समेत आसपास के सैकड़ों लोग इसी रास्ते से आना जाना करते हैं. जहां कभी भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. फिर भी रेल प्रशासन गहरी नींद में सोया है.

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दुकानदार ही लोगों को करते हैं बचाने का काम !

ट्रैक पर कपड़ा की दुकान लगाने वाले महबूब ने बताया कि 35 साल से यहां दुकान लगा रहे हैं. इस रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही कम हैं. दिन में सिर्फ चार या पांच ट्रेनें ही आती हैं, वह भी सिर्फ मालगाड़ी. इसलिए खतरे वाली कोई बात नहीं है. बल्कि हमलोग खुद ही ट्रेन आने समय लोगों को रोक कर बड़ी दुर्घटना से बचाने का काम करते हैं. अगर दुकान नहीं लगायेंगे तो रोजी रोटी कैसे चलेगा?  हमलोग दुकान भले ही लगाते हैं लेकिन ध्यान भी रखते हैं कि खुद के साथ आने जाने वालों की भी ध्‍यान रखें.

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रेल प्रशासन हटाती है फिर लग सज जाती हैं दुकानें

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इसमें कोई दो राय नहीं कि जिन ट्रैकों पर दुकानें सजती हैं, वहां ट्रेनों की आवाजाही कम है लेकिन बंद तो नहीं है. तेल डिपो तक वैगन ट्रेन इसी ट्रैक से पहुंचती है. यह ट्रैक धनबाद रेलवे यार्ड से भी जुड़ा है. यहां इंजन की आवाजाही होती रहती है. बावजूद इस ट्रैक पर अतिक्रमण कर लोग दुकानें सजाते हैं. रेलवे ने कई बार अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाकर इन दुकानों को ट्रैक से हटाया. लेकिन इसका कोई ठोस असर नहीं दिखता. दूसरे ही दिन स्थिति यथावत हो जाती है.

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ट्रेन आने का पता चलते ही दुकान हटाने लगते हैं दुकानदार

जब ट्रेन या इंजन को पुराना बाजार रेलवे ट्रैक पर आना होता है तो फाटक बंद कर दिया जाता है. रेलवे का कर्मचारी दुकानदारों को दुकानें हटाने को कहते हैं. जल्दी जल्दी में दुकानें हटायी जाती है. ट्रैक के दोनों ओर लोगों का हुजूम जमा हो जाता है. ट्रेन के गुजरते ही दुकानें फिर से सज जाती हैं.

अब उस ट्रैक पर ट्रेन कम चलती है. वहां लोगों को लगाया गया है जो किसी ट्रेन के आते समय ध्यान रखते हैं. दीवार देने की बात चल रही थी, इसके बारे में डीआरएम साहब बता पायेंगे.

पीके मिश्रा, रेलवे सूचना पदाधिकरी

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