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खत्म होगी सिपाही से सीधे दारोगा बनाने वाली सीमित परीक्षा व्यवस्था, सरकार ने मांगा प्रस्ताव

वर्तमान डीजीपी डीके पांडेय और पूर्व एडीजी मुख्यालय अजय भटनागर ने दो साल पहले इसे बड़े ही जोर-शोर से शुरु किया था.

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Ranchi: सिपाही से सीधे दारोगा बनाने वाली सीमित परीक्षा अब पुलिस विभाग से खत्म होगी. वर्तमान डीजीपी डीके पांडेय और पूर्व एडीजी मुख्यालय अजय भटनागर ने दो साल पहले इसे बड़े ही जोर-शोर से शुरु किया था. पहले चरण में 399 सिपाही सीमित परीक्षा में सफल होकर दारोगा बनें भी. लेकिन अब यह व्यवस्था खत्म होगी. अब कहा जा रहा है कि वर्तमान डीजीपी ने पुलिस विभाग को प्रयोगशाला बना दिया है. पारा मिलिट्री फोर्स की तर्ज पर राज्य पुलिस बल को चलाने के चक्कर में कई बार फैसलों को बदलना पड़ा है. अब इस बार सीमित परीक्षा की व्यवस्था को बदलने की कवायद शुरु कर दी गयी है.

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जानकारी के मुताबिक 14 अगस्त को गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के अवर सचिव ने डीजीपी को एक पत्र लिखा है. पत्र, पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा नियमावली को समाप्त करने के संबंध में लिखा गया है. पत्र में लिखा गया है कि इस संबंध में जल्द से जल्द स्पष्ट मंतव्य उपलब्ध करायें. उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों पुलिस एसोसिएशन और पुलिस मेंस एसोसिएशन के सदस्य आंदोलन पर थे. आंदोलन में एक बिंदु सीमित परीक्षा की प्रक्रिया को खत्म करना भी था. इस मुद्दे पर हुई वार्ता में राज्य के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, गृह सचिव एसकेजी रहाटे और डीजीपी डीके पांडेय ने दोनों एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दे दिया है कि नियमावली को खत्म कर दिया जायेगा.

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तब नहीं सुनी थी डीजीपी व एडीजी मुख्यालय ने

गौर करने वाली बात यह है कि जिस दारोगा सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा नियमावली को खत्म करने का प्रस्ताव डीजीपी डीके पांडेय सरकार को भेजेंगे, उसे लागू करने का प्रस्ताव भी इन्हीं के कार्यकाल में दिया गया था. तब भी पुलिस मेंस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया था. एसोसिएशन के पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल कई बार डीजीपी डीके पांडेय और तत्कालीन एडीजी मुख्यालय अजय भटनागर से मिला था. लेकिन उस वक्त अफसरों ने कुछ नहीं सुना.

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क्या है विरोध की वजह

दारोगा सीमित परीक्षा के विरोध का कारण यह था कि राज्य में दारोगा के जितने भी पद हैं, उसमें से 50 प्रतिशत पदों पर सीधी नियुक्ति होती है. और 50 प्रतिशत पदों को प्रमोशन से भरा जाता रहा है. इस तरह प्रमोशन से भरे जाने वाले पदों पर सिपाही से प्रोन्नति पाकर बनने वाले एएसआई रैंक के पदाधिकारी दारोगा (एसआई) रैंक में प्रोन्नत होते थे. सिपाही संवर्ग के पदाधिकारियों को ज्यादा मौका मिलता था. दो साल पहले पुलिस मुख्यालय ने इस नियम में परिवर्तन कर दिया. नये नियम के तहत प्रोन्नति से भरे जाने वाले 50 प्रतिशत पदों में से 1500 पद सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से भरने का फैसला ले लिया. मेंस एसोसिएशन के पदाधिकारियों का विरोध यह रहा कि ऐसे में सिपाही संवर्ग के लिए प्रोन्नति का रास्ता मुश्किल हो जायेगा.

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