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पिछले 18 वर्षों की तुलना में सबसे कम मुठभेड़ के बावजूद झारखंड नक्सलग्रस्त राज्यों में दूसरे नंबर पर बरकरार

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 Ranchi: पिछले 18 वर्षों की तुलना में इस वर्ष सबसे कम नक्सली मुठभेड़ होने के बावजूद झारखंड नक्सलग्रस्त राज्यों में दूसरे नंबर पर बरकरार है. झारखंड में 2018 में अब तक सिर्फ 148 मुठभेड़ हुई है. वहीं बिहार झारखंड से बड़ा राज्य होने के बाबजूद नक्सलग्रस्त राज्यो में दो पायदान खिसक कर पांचवे नंबर पर आ गया है. वर्तमान में, छत्तीसगढ़ पहले नंबर पर, झारखंड दूसरे नंबर पर, महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर, उड़ीसा चौथे नंबर पर और बिहर पांचवे नंबर पर है. गृह मंत्रालय ने यह नयी रैंकिंग जारी की है. इस दौरान बिहार में बड़े नक्सली नेताओं की अवैध संपत्ति की जब्ती के साथ आम लोगों की मौत में भी कमी आयी है.

 झारखंड में पिछले 18 वर्षों में 378 जवान हुए शहीद 

झारखंड में पिछले 18 वर्षों में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में झारखंड पुलिस के 378 जवान शहीद हो चुके हैं. इनमें सबसे ज्यादा जवानों की जान नक्सलियों के द्वारा बिछाए गए लैंड माइंस से हुई है. 27 जून 2018 को भी लातेहार में नक्सलियों ने पुलिस के सात जवानों को लैंड माइंस विस्फोट कर उड़ा दिया था.

 इन 10 जिलों में गंभीर रूप से मौजूद है नक्सलवाद  

लातेहार, पलामू, चतरा, गिरिडीह,पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, लोहरदगा, गुमला, बोकारो और गढ़वा.

खुल रही है नक्सल अभियान की पोल 

उधर, पुलिस का दावा करती है कि झारखंड से नक्‍सली खत्म हो रहे हैं. इधर, एक माह में नक्सलियों ने एक के बाद एक बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया है. अपनी उपस्थिति दर्ज करायी है. यह घटनाएं पुलिस के द्वारा की गयी दावों और चलाये जा नक्‍सल अभियान की पोल खोलती है.

 नक्सलियों के खात्मे की डेडलाईन भी हो रही समाप्त 

डीजीपी डीके पांडेय के द्वारा झारखंड से उग्रवाद के खात्मे की डेडलाईन 31 दिसंबर 2018 है. इससे पहले, डीजीपी ने 2016 में घोषणा की थी कि दिसंबर 2017 में पूरे राज्य से नक्सलियों का सफाया हो जायेगा.  ये मुमकिन नहीं हो पाया और डेडलाइन एक साल बढ़ गयी. 2017 में राज्य को उग्रवाद से मुक्त कराने का दावा करने वाले राज्य के पुलिस महानिदेशक डीके पांडेय ने अब दावा किया है कि साल 2018 के अंत तक राज्य को पूरी तरह से नक्सली उग्रवाद मुक्त कर दिया जायेगा. लेकिन दिसंबर आधे से अधिक गुजर चुका है और नक्सली लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे हैं. इससे लगता है कि डीजीपी का नक्सलियों का सफाया करने का डेडलाइन इस बार भी फेल हो जायेगा.

 नक्सलियों ने लैंड माइंस का बिछा रखा है जाल 

झारखंड में नक्सलियों के लिए बूढ़ा पहाड़,  सारंडा,  पारसनाथ और झुमरा काफी सुरक्षित माने जाते हैं. ऐसी जगहों पर चारों तरफ नक्सलियों ने लैंड माइंस का जाल बिछा रखा है.

पिछले 18 साल में हुए लैंड माइंस विस्फोट और पुलिस व नक्सली मुठभेड़ः

  • वर्ष 2001 में 8 लैंडमाइंस विस्फोट और 312 मुठभेड़
  • 2002 में 8 लैंडमाइंस विस्फोट और 267 मुठभेड़
  • 2003 में 10 लैंडमाइंस विस्फोट और 322 मुठभेड़
  • 2004 में 12 लैंडमाइंस विस्फोट और 279 मुठभेड़
  • 2005 में 8 लैंडमाइंस विस्फोट और 223 मुठभेड़
  • 2006 में 8 लैंडमाइंस विस्फोट और 307 मुठभेड
  • 2007 में 3 लैंडमाइंस विस्फोट और 478 मुठभेड़
  • 2008 में 3 लैंडमाइंस विस्फोट और 436 मुठभेड़
  • 2009 में 41 लैंडमाइंस विस्फोट और 512 मुठभेड़
  • 2010 में 29 लैंडमाइंस विस्फोट और 496 मुठभेड़
  • 2011 में 6 लैंडमाइंस विस्फोट और 504 मुठभेड़
  • 2012 में 4 लैंडमाइंस विस्फोट और 404 मुठभेड़
  • 2013 में 4 लैंडमाइंस विस्फोट और 349 मुठभेड़
  • 2014 में 6 लैंडमाइंस विस्फोट और 231 मुठभेड़
  • 2015 में 196 मुठभेड़
  • 2016 में 4 लैंडमाइंस विस्फोट और 196 मुठभेड़
  • 2017 में 2 लैंडमाइंस विस्फोट और 159 मुठभेड़
  • 2018 में 3 लैंडमाइंस विस्फोट और 145 मुठभेड़

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