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भाजपा के पूर्व सांसद अजय मारू ने जिस जमीन को खरीदा, उसका ऑफिशियल डीड है ही नहीं

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Ranchi : झारखंड बनने के बाद आदिवासी जमीन की खरीद-बिक्री चरम पर है. नियम-कानून को ताक पर रखकर सीएनटी जमीन को खरीदा व बेचा गया है. इसमें भाजपा के पूर्व सांसद अजय मारू भी जांच के दायरे में आ गये हैं. विधानसभा की अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा व कमजोर वर्ग कल्याण समिति ने भी अजय मारू की कंपनी द्वारा जमीन खरीदे जाने के मामले की जांच की. उपसमिति ने माना है कि उक्त जमीन की खरीदारी फर्जी तरीके से की गयी है. जिस जमीन की खरीद-बिक्री की गयी है, उसका ऑफिशियल डीड ही नहीं है.

दस्तावेज निरस्त करने की अनुशंसा की गयी

हरमू मुक्तिधाम के समीप अजय मारू की कंपनी द्वारा खरीदी गयी जमीन की खरीद-बिक्री के सभी दस्तावेज विधानसभा उपसमिति ने अवर निबंधक, रांची से मांगे थे. थाना नंबर 205, खाता नंबर 33, प्लॉट नंबर 591 के बाबत जमींदार द्वारा दाखिल रिटर्न के मूल खतियान की प्रति भी मांगी थी. 1956 से अब तक की पंजी पांच की मूल प्रति मांगी गयी थी. उपसमिति ने उक्त जमीन का राजस्व लगान नर्गित करने पर रोक लगाने को भी कहा है. इसके बाद उस जमीन पर बने मॉल की बिक्री के दस्तावेज अजय मारू के पुत्र राहुल मारू द्वारा 27 अगस्त को जिला अवर निबंधक, रांची के समक्ष बिक्री निबंधन के लिए लाया गया था, जिसे जिला अवर निबंधक, रांची द्वारा झारखंड विधानसभा सचिवालय के पत्र संख्या 1566 को आधार बनाते हुए निबंधन अस्वीकार कर दिया. 26 सितंबर 2018 को उक्त भूमि से संबंधित रजिस्ट्री दस्तावेज संख्या 18710, जो 23 दिसंबर 2005 को करायी गयी थी, इसके साथ ही प्लॉट नंबर 591 के अन्य 14 निबंधित दस्तावेज को जिला अवर निबंधक, रांची द्वारा निरस्त करने की अनुशंसा प्रभारी उपसमाहर्ता, विधि शाखा, रांची से की गयी. उपरोक्त पूरे मामले में न्यूज विंग के वरीय संवाददाता ने अजय मारू के बेटे राहुल मारू (एक्सप्रेस रेसिडेंसी प्राइवेट लिमिटेड के मालिक) को उनका पक्ष जानने के लिए तीन बार फोन किया, लेकिन जवाब नहीं मिलने पर व्हाट्सएप के जरिये उन्हें सवाल भेजे. इसके बाद चौथी बार फोन करने पर उन्होंने अपना पक्ष रखा.

भाजपा के पूर्व सांसद अजय मारू ने जिस जमीन को खरीदा, उसका ऑफिशियल डीड है ही नहीं

भाजपा के पूर्व सांसद अजय मारू ने जिस जमीन को खरीदा, उसका ऑफिशियल डीड है ही नहीं

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न्यूज विंग ने राहुल मारू से किये ये सवाल

  1. आपने जिस जमीन (थाना- 205, खाता नंबर- 33, प्लॉट नंबर-591) पर सिटी मॉल बनाया है, क्या वह जमीन आदिवासियों की सीएनटी एक्ट के अंतर्गत आनेवाली जमीन है?
  2. क्या रांची स्थित थाना-205, खाता नंबर- 33, प्लॉट नंबर- 591 से संबंधित निबंधन के 15 दस्तावेजों को रजिस्ट्रार द्वारा रद्द करने की अनुशंसा जिला अवर निबंधक, रांची से की गयी है. इसके क्या कारण हैं?
  3. उपरोक्त जमीन पर आपने मॉल बनाया है. उस जमीन प्रेस खोलने के लिए सीएनटी एक्ट की घारा 49 में परमिशन कराकर ली है. किंतु वहां मॉल बनाया गया है. क्या इसमें आपके द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया है?
  4. 27 अगस्त 2018 को आपके द्वारा रांची रजिस्ट्रार के समक्ष बिक्री के दस्तावेज प्रस्तुत किये गये थे, जिसे रांची रजिस्ट्रार ने अस्वीकार कर दिया है. इसका क्या कारण है?
  5. जहां भवन बना है, उस जमीन में भुइहरी जमीन भी शामिल है, इसे किस नियम के तहत लिया गया है?

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पूर्व सांसद अजय मारू के पुत्र राहुल मारू ने दिये ये जवाब

पूर्व सांसद अजय मारू के पुत्र राहुल मारू ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि विधानसभा उपसमिति जांच कर सकती है, रद्द करने का अधिकार विधानसभा उपसमिति को नहीं है. उपसमिति के विधायकों को जानकारी का अभाव है. कोर्ट से उपरोक्त मामले में सात-आठ अक्टूबर 2018 को स्टे ऑर्डर मिल गया है. जिस जमीन के मामले में विधानसभा उपसमिति ने खरीद-बिक्री और लगान निर्गत करने पर रोक लगयी है, वह मेरी रैयती जमीन है. विधानसभा की उपसमिति की अनुशंसा पर रोक लगाने के संबंध में स्टे ऑर्डर मिल गया है. जिन विधायकों ने जमीन का रजिस्ट्रेशन रद्द करने की अनुशंसा की है, उन्हें यह जानकारी नहीं है कि ऐसा वह नहीं कर सकते हैं.

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विधायकों का बर्ताव हास्यास्पद : राहुल मारू

राहुल मारू ने कहा कि विधायकों का इस तरह बर्ताव करना हास्यास्पद है. बगैर मेरा पक्ष जाने रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं किया जा सकता. मेरे कागजात सही हैं. प्लॉट में रैयती जमीन है. जानकारी के आभाव में विधायक ऐसा कर रहे हैं. प्लॉट के मेरे नाम से रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन दोनों हैं. उच्च न्यायालय की ओर से सात और आठ अक्टूबर को स्टे ऑर्डर भी मिल गया है, जिसके कागजात मेरे पास हैं. इसका प्लॉट संख्या 596 है. जिस प्लॉट पर निर्माण कार्य किया गया है, उसका एक हिस्सा भुइहरी जमीन में आता है. शॉपिंग मॉल के लिए ली गयी जमीन रैयती जमीन भी शामिल है. विधानसभा उपसमिति की ओर से जमीन के निबंधन को निरस्त करने की अनुशंसा ही गलत है, क्योंकि यह उपसमिति जांच कराकर निष्कर्षों के अनुरूप अपना मंतव्य दे सकती है. रैयतों से ली गयी जमीन का निबंधन समाप्त करने का अधिकार उपसमिति को नहीं है.

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