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रावण दहन की सूचना रेलवे अधिकारियों को नहीं दी गयी, ड्राइवरों ने इमरजेंसी ब्रेक्‍स नहीं लगाये

अमृतसर में हुए भीषण रेल हादसे को लेकर रेल मंत्रालय के उच्‍च-पदस्‍थ सूत्रों का मानना है कि यदि स्‍थानीय रेलवे अधिकारियों ने रेलवे ट्रैक पर भीड़ की मौजूदगी पर ध्‍यान दिया होता तो हादसा टाला जा सकता था.

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Amritsar :  अमृतसर में हुए भीषण रेल हादसे को लेकर रेल मंत्रालय के उच्‍च-पदस्‍थ सूत्रों का मानना है कि यदि स्‍थानीय रेलवे अधिकारियों ने रेलवे ट्रैक पर भीड़ की मौजूदगी पर ध्‍यान दिया होता तो हादसा टाला जा सकता था. उनकी शुरुआती जांच रिपोर्ट्स में यह बात सामने आयी है. अमृतसर के स्‍टेशन सुप्रिटेडेंट आलोक मेहरोत्रा ने द इंडियन एक्‍सप्रेस को बताया, उसके अनुसार अगर हमें रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक कार्यक्रम की जानकारी दी गयी होती, तो हम ड्राइवर और ट्रेन के गार्ड को सतर्क कर देते. और हादसा होने से बच जाता. इस क्रम में उन्‍होंने कहा कि इसमें रेलवे अधिकारियों की गलती नहीं है. कहा कि क्रॉसिंग के लिए डाउन सिग्‍नल दिये जा चुके थे और जौड़ा क्रॉसिंग के गेट बंद थे.

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आतिशबाजी के चलते अच्‍छी-खासी दूरी से रेलवे ट्रैक पर मौजूद भीड़ ड्राइवरों को दिखाई दे रही होगी

सूत्रों ने कहा कि जालंधर से अमृतसर जा रही डीएमयू लोकल ट्रेन और दूसरी तरफ अमृतसर से आ रही अमृतसर हावड़ा मेल के ड्राइवरों ने इमरजेंसी ब्रेक्‍स नहीं लगाये.  कहा कि दशहरे पर हो रही आतिशबाजी के चलते अच्‍छी-खासी दूरी से रेलवे ट्रैक पर मौजूद भीड़ ड्राइवरों को दिखाई दे रही होगी. हादसा एक इंटरलॉक्‍ड लेवल क्रॉसिंग से लगभग 200 मीटर की दूरी पर हुआ. सूत्रों के अनुसार, ट्रेनों को ग्रीन सिग्‍नल देने के लिए गेट बंद होना चाहिए, जो था भी.  लेकिन गेटमैन को गेट बंद करने के  बजाय नजदीकी स्‍टेशन को ख़बर करनी चाहिए थी  ताकि ट्रेनों का आवागमन उसी हिसाब से संचालित किया जा सके .

पंजाब के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ब्रह्म महिंद्रा ने कहा, हादसा इतना भयावह है कि अमृतसर की मॉर्च्‍युरी में लाशों के लिए जगह कम पड़ रही है.   अमृतसर सिविल अस्‍पताल की मार्च्‍युरी में लाशों का ढेर लगा हुआ है.  यहां इतनी जगह नहीं है कि सभी शवों को रखा जा सके सिविल अस्‍पताल और गुरु नानक अस्‍पताल की मॉर्च्‍युरी के बाहर लाशें फर्श पर रखी हुई हैं.  परिजन शवों के साथ ठीक व्‍यवहार न होने पर आगबबूला और व्‍यथित हैं.

 ऐसे हुआ हादसा

रावण दहन के समय पटाखे की गूंज से लोगेां को ट्रेन की सीटी की आवाज नहीं सुनाई दी. जानकारी के अनुसार रावण दहन के दौरान आग की लपटें तेज होने की वजह से लोग दशहरा स्थल से रेल पटरी पर जाकर नजारा देखने में मशगूल हो गये. एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार आग की लपटें तेज होने के बाद लोग रेल पटरी की ओर इस भय से खिसकने लगे कि पुतला कींउनके ऊपर न आ गिरे. उसी दौरान ट्रेन आ गयी.

 

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