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पूरी दुनिया के समुद्र पर भारतीय नौसेना की नजर, हर जहाज रहेगा निगरानी में

भारतीय नौसेना अब एक ताकतवर अंतर्राष्ट्रीय नौसेना है. बता दें कि शनिवार को गुरुग्राम में इन्फॉर्मेशन फ्यूज़न सेंटर- इंडियन ओसियन रीज़न ने अपने कार्यकलाप शुरू कर दिये

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 NewDelhi : भारतीय नौसेना अब एक ताकतवर अंतर्राष्ट्रीय नौसेना है. बता दें कि शनिवार को गुरुग्राम में इन्फॉर्मेशन फ्यूज़न सेंटर- इंडियन ओसियन रीज़न ने अपने कार्यकलाप शुरू कर दिये. इसका मतलब यह कि हिंद महासागर के साथ-साथ लगभग पूरी दुनिया के समुद्रों में भारतीय नौसेना की नजर रहेगी. किसी भी समुद्र में चल रहे हर जहाज़ के बारे में हर जानकारी रियल टाइम में भारतीय नौसेना को मिलती रहेगी. बता दें कि इसके लिए अब तक 43 देशों के साथ भारत का समझौता हो चुका है. सूत्रों के अनुसार मुंबई हमले के बाद से ही तय हो गया कि बिना समुद्र की निगरानी के सुरक्षित रह पाना नामुमकिन है. जान लें कि भारत तीन तरफ़ से समंदर से घिरा हुआ है, जिसे इंडियन ओशियन रीजन कहते हैं. हिंद महासागर दुनिया का सबसे व्यस्त जलमार्ग है. दुनिया भर का एक तिहाई सामान और दो-तिहाई तेल इसी समंदर के रास़्ते जाता है. साथ ही यहां समुद्री डकैतों, हथियारों और नशे के तस्करों और आतंकवादियों की मौजूदगी रहती है. यह सब देखते हुए आर्थिक उन्नति और सुरक्षा दोनों के लिए ही हिंद महासागर क्षेत्र को सुरक्षित रखना ज़रूरी है. जानकारी के अनुसार 2012 में इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट एंड एनालिसिस सेंटर यानि आईमेक की नींव रखी गयी थी. जिसने अब काम करना शुरू कर दिया है.

भारत की 7500 किमी लंबी समुद्री सीमा पर कुल 51 रडार स्टेशन

बताया गया कि भारत की 7500 किमी लंबी समुद्री सीमा पर कुल 51 रडार स्टेशन लगाये गये है.  जिनके ज़रिए हिंद महासागर में आने वाले हर जहाज़ के बारे में हर सूचना, जैसे जहाज़ में लदा सामान, जहाज़ का नाम और देश का नाम, कहां से आ रहा है और कहां जाना है, जहाज़ में सवार क्रू के बारे में पूरी जानकारी रियल टाइम में गुरुग्राम के आईमेक तक आती रहती है.  साथ ही 51 स्टेशनों से कैमरों के ज़रिए भी फीड लगातार सेंटर तक आती है. दरअसल, हर जहाज़ को अंतर्राष्ट्रीय नियमों के तहत खुद को रजि़स्टर करना होता है और उसके आटोमैटिक आईडेंटिफिकेशन सिस्टम के ज़रिए उसकी हर गतिविधि पर नज़र रखी जाती है. अगर किसी जहाज़ के पास यह सिस्टम नहीं है या वह किसी और के रज़िस्टर्ड नंबर का इस्तेमाल कर रहा है तो उसका फौरन पता चल जाता है. इससे पूरे हिंद महासागर पर नज़र रखी जाती है. शनिवार को भारतीय नौसेना ने दुनिया के 43 देशों के स्टेशनों को भी इस सेंटर में शामिल कर लिया.

यानि अब वे देश भी भारतीय नौसेना की जानकारियों का फ़ायदा उठा पायेंगे. बदले में भारतीय नौसेना को पूरी दुनिया के हर समंदर में मौजूद किसी भी जहाज़ की जानकारी पा लेना संभव होगा. इस सेंटर से दूसरे देशों से टेलीफोन या इंटरनेट के ज़रिए संपर्क होगा. भविष्य में इन देशों के अधिकारी भी इस सेंटर में बैठ सकेंगे.

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