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तत्कालीन महापौर रमा खलखो के ससुरालवालों ने सतीश चंद्र बाउल की 5.53 एकड़ जमीन पर कर रखा है कब्जा

2006  में उपायुक्त की तरफ से जमाबंदी रद्द करने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, आज भी सतीश चंद्र बाउल के नाम से कटती है लगान रसीद

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Deepak

Ranchi : राजधानी के अरगोड़ा अंचल के अंतर्गत आनेवाली सतीश चंद्र बाउल की 5.03 एकड़ भूमि पर तत्कालीन महापौर रमा खलखो के ससुराल वालों और अन्य ने कब्जा कर रखा है. कब्जा की गयी जमीन का प्लाट नंबर 1173 और 1169 है. खाता संख्या 134 और 124 बताया जाता है. करोड़ों रुपये के मूल्य की इस जमीन के आगे फिलहाल प्रेमसंस मोटर्स का ट्रू वैल्यू शॉप है.

उपायुक्त ने 2006 में जमाबंदी रद्द करने का आदेश दिया था

इस जमीन को जमाबंदी रद्द वाद संख्या 111 /2001 टीआर20आर15/2001 में उपायुक्त ने रद्द करने का आदेश दिया था. इस आदेश पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. अपने आदेश में उपायुक्त ने 5.9.2006 को कहा था कि सदर अनुमंडल अधिकारी और अपर समाहर्ता की अनुशंसा पर प्लाट संख्या 1173 की कायम जमाबंदी को रद्द किया जाता है.

इसके लिए अंचल अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने का आदेश भी दिया गया था. इसमें कहा गया था कि वासगित किस्म की जमीन में परचा काटने का कोई प्रावधान नहीं है. बिहार प्रीवीलेज पर्सन होम स्टेट टेनेंसी एक्ट 1947 के अनुसार वासगित परचा भूमिहीन व्यक्तियों को आवासीय प्रयोजन के लिए ही ग्रामीण क्षेत्र में निर्गत किया जा सकता है. पंजी-2 में विश्वनाथ राय और खुशी सिंह तथा हेतवा उरांव के नाम से जमाबंदी कायम होने की बातें कही गयी हैं.

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क्यों दावा करते हैं रमा खलखो के ससुरालवाले

रमा खलखो के ससुराल वाले इस जमीन पर अपना कब्जा होने की बातें कहते हैं. आरएस खतियान में यह जमीन हेतना उरांव के नाम से दर्ज है. हेतना उरांव को एक पक्ष जमीन का वास्तविक मालिक बताता है. उनका कहना है कि नामकुम अंचल के सीओ के न्यायालय की याचिका 47 /70-71 और 50 /70-71 के वासगित परचे के आधार पर अपना कब्जा होने की बात कह रहे हैं.

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जमीन के बड़े हिस्से में बना रखा है रेस्टोरेंट, मैरेज हाल

रमा खलखो के ससुराल वालों ने जमीन के एक हिस्से में रेस्टोरेंट, मैरेज बैंक्वेट हाल और अपने रहने का आलीशान मकान बना रखा है. वैसे भी ये सारे निर्माण कार्य श्रीमती खलखो के महापौर रहने के समय और उसके बाद के हैं.

खेवट नंबर आठ की यह जमीन 1932 और 1933 में छप्परबंदी की थी. इसे सतीश चंद्र बाउल ने 16.2.1942 को खरीदी थी. जमीन की बिक्री उस समय जे महली के द्वारा की गयी थी. उस समय विक्रेता जे महली ने स्थायी रूप से छप्परबंदी जमीन 1659 रुपये की सलामी पर बेचा था. अरगोड़ा अंचल के हिनू मौजा की होल्डिंग संख्या 134, 65/393 का जमाबंदी रसीद 2008 तक सतीश चंद्र बाउल के नाम से कटी है. अब जमीन के वास्तविक मालिक को अपनी ही जमीन पर कब्जा लेने में काफी परेशानी हो रही है.

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महत्वपूर्ण लोकेशन पर है जमीन

यह जमीन हिनू से बिरसा चौक के रास्ते में ही है. इसके आगे के हिस्से में बड़ा मार्केटिंग कांपलेक्स बना है. इसकी बगल से न्यू एरिया गांधीनगर जाने का रास्ता भी है. जमीन खूंटी जानेवाले एनएच से सटी हुई है. इसलिए इसकी वैल्यू आज की तारीख में 10 करोड़ रुपये से अधिक की है. अमूमन इस क्षेत्र में प्रति कट्ठा जमीन की दर 12 लाख रुपये कट्ठा से अधिक है.

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