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ग्लोबल वार्मिंग का असर ऐतिहासिक धरोहरों में भी देखा जा रहा है: बुधिया

स्कूली छात्रों ने सीखा,  कैसे संरक्षित होती हैं ऐतिहासिक धरोहरें, बिरसा मुंडा जेल में बच्चों को संरक्षण कार्य की जानकारी दी गयी

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Ranchi :  पिछले कुछ सालों में देश दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग की समस्या इस कदर बढ़ी है कि इससे कोई अछूता नहीं है. जहां लोगों को विभिन्न बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं  प्रदूषण का असर ऐतिहासिक धरोहरों में भी देखा जा रहा है. उक्त बातें विष्णु बुधिया ने कहीं. श्री  बुधिया  आइटीआरएचडी की ओर से विश्व विरासत दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन बिरसा मुंडा कारागार में किया गया.

इस क्रम में उन्होंने कहा कि अब समय ऐसा आ गया है कि जितना जरूरी पर्यावरण को बचाना है , उतना ही जरूरी है कि ऐतिहासिक धरोहरों को बचाया जाये.  राज्य की ही बात की जाये तो कितनी ऐसी धरोहर हैं,  जिसकी सही जानकारी लोगों और सरकार तक को नहीं है.  सूदूर  गांवों में इन विरासतों के होने के कारण ऐसी स्थिति है.

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बच्चों को विरासतों के सरंक्षण की जानकारी दी जाये

आइटीआरएचडी के एसडी सिंह ने कहा कि ऐसी विरासतों को बचाने के लिए जरूरी है कि लोगों में रुचि बढ़ें. कहा कि सरकार अपने स्तर से प्रयास करती है,  लेकिन आम जनता की पहुंच इन स्थानों तक अधिक होती है. स्थानीय लेागों को भी चाहिए कि इन स्थानों का संरक्षण करें. आम जनता और प्रशासन के आपसी सहयोग से ही ऐसे कार्यों को सफल बनाया जा सकता है.

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उन्होंने कहा कि बच्चे आने वाले भविष्य हैं. ऐसे में जरूरी है कि बच्चों को अभी से विरासतों के सरंक्षण की जानकारी दी जाये जरूरी है कि घर में माता पिता और बुजुर्ग बच्चों का रूझान इस दिशा में बढ़ायें. मौके पर विवेक गुप्ता, चंदन कुमार, रजनीश कुमार, रोहित सिंह, अखिल कुमार, पूनम कुमारी समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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धरोहरों को बचाने में अपना योगदान देंं छात्र

कार्यक्रम में दिल्ली पब्लिक स्कूल, गुरुनानक हायर सेंकेंडरी स्कूल, कैंब्रियन पब्लिक स्कूल, लिटिल एजेंल्स स्कूल, मारवाड़ी प्लस टू स्कूल समेत अन्य स्कूल के छात्रों को विरासत सरंक्षण की जानकारी दी गयी.  छात्रों से कहा गया कि वे  इन धरोहरों को बचाने में अपना योगदान दे सकते हैं. लोगों को जागरूक कर सकते हैं.  इस क्रम में बिरसा मुंडा जेल में कराये जा रहे संरक्षण कार्य की जानकारी छात्रों को दी गयी.  संरक्षण कार्य  में इस्तेमाल होने वाले सुर्खी, चूना, खोवा आदि छात्रों को दिखाये गये.

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