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जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट की भयावह तसवीर, अर्थव्यवस्था को हाेगा अरबों डॉलर का नुकसान

औसत वैश्विक तापमान बहुत तेजी से बढ़ रहा है. यह आधुनिक सभ्यता द्वारा अनुभव की गयी किसी भी चीज की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है. इसका कारण मानवीय गतिविधियां हैं

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Washington : अमेरिकी सरकार की जलवायु परिवर्तन और उसके विनाशकारी प्रभावों के बारे में जारी की गयी  नयी रिपोर्ट भयावह तसवीर पेश कर रही है. रिपोर्ट के अनुसार इस सदी के अंत तक जलवायु परिवर्तन से अर्थव्यवस्था को सैकड़ों अरब डॉलर का नुकसान होगा. बता दें कि नेशनल ओशिएनिक ऐंड ऐटमॉसफेरिक ऐडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के निदेशक (टेक्निकल सपोर्ट यूनिट) डेविड एस्टर्लिग ने कहा है कि औसत वैश्विक तापमान बहुत तेजी से बढ़ रहा है. यह आधुनिक सभ्यता द्वारा अनुभव की गयी किसी भी चीज की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है. इसका कारण मानवीय गतिविधियां हैं.  रिपोर्ट के अनुसार अत्यधिक गर्मी के कारण हम दक्षिण-पूर्व में 2100 आधा अरब श्रमिक घंटे खो देंगे.  किसानों के लिए बेहद मुश्किल हालात होंगे. अमेरिका में फसलों की गुणवत्ता और मात्रा में उच्च तापमान, सूखा और बाढ़ के कारण गिरावट आयेगी.  कहा गया है कि  हीट स्ट्रेस के कारण दुध उत्पादन में अगले 12 सालों में 0.60 फीसदी से 1.35 फीसदी तक की गिरावट आयेगी.  जान लें कि हीट स्ट्रेस के कारण  2010 में इस उद्योग को 1.2 अरब डॉलर की चपत लगी है.  रिपोर्ट में कहा गया कि उच्च तापमान के कारण ज्यादा लोग मरेंगे.

हम जो अपनी आंखों से देख रहे हैं उस पर हमें विश्वास करना चाहिए

अमेरिका के वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट के निदेशक डैन लाशोफ कहते हैं कि इस रिपोर्ट का संदेश स्पष्ट और निर्विवाद है कि तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है. कैलिफॉर्निया में लगी भयंकर आग इसका संकेत है कि जलवायु परिवर्तन का आगे चलकर और कितना हानिकारक असर हो सकता है.  लाशोफ ने कहा, हम जो अपनी आंखों से देख रहे हैं उस पर हमें विश्वास करना चाहिए, जो कि ज्यादा तीव्र जंगल की आग, समुद्री तूफान, बाढ़ और हीट वेव्स के रूप में दिख रही है.  इसे ही जलवायु परिवर्तन कहते हैं और अगर हमने तेजी से कम-कार्बन वाली अर्थव्यवस्था की तरफ स्थानांतरन नहीं किया तो आगे स्थिति और खराब होगी. इस रिपोर्ट में तापमान में बढ़ोतरी का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधन को जलाना बताया गया है.

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के अर्थ इंस्टिट्यूट के विजिटिंग वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक रिचर्ड मॉस का कहना है कि ट्रंप प्रशासन को खुद की इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेना चाहिए और जलवायु प्रदूषण को रोकने के साथ ही इससे होनेवाली जान की हानि और वित्तीय नुकसान को रोकने के द्विपक्षीय उपाय करने होंगे.  सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार हालांकि संघीय अनिवार्य अध्ययन चौथा राष्ट्रीय जलवायु आकलन दिसंबर में जारी किया जाना था, लेकिन इसे राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार को ही जारी कर दिया.

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