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हाई कोर्ट ने नगर आयुक्त को लगाई फटकार, कहा- क्यों नहीं रांची निगम की कार्यशैली की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच करायी जाए

Ranchi : डॉ राजेश  कुमार के नक्शा विचलन मामले में दायर नक्शा स्वीकृति से संबंधित राधिका शाहदेव एवं लाल चिंतामणी नाथ शाहदेव की हस्तक्षेप याचिका पर बुधवार को झारखंड हाइकोर्ट में सुनवाई हुई. मामले में नगर आयुक्त शशि रंजन कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए. कोर्ट ने मौखिक रूप से नाराजगी जताते हुए कहा कि गिफ्ट डीड की जमीन का अधिग्रहण किया जाना चाहिए, गिफ्ट की जमीन को किसी से जबरदस्ती नहीं लिया जा सकता है. सरकार को उसे अधिग्रहित करना चाहिए, इसके लिए कोई  नियम बनाया जाना चाहिए.

 

कोर्ट ने नगर आयुक्त से पूछा कि क्या उन्होंने इस मामले में कोर्ट के आदेश का अध्ययन किया है, अगर किया है तो अब तक कोर्ट के आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया गया. सुनवाई के दौरान नगर आयुक्त ने कोर्ट को बताया की गिफ्ट डीड की जमीन नगर निगम के नाम पर म्यूटेशन करने के बाद ही भवन निर्माण शुरू कर करने से संबंधित उन्होंने कोई आदेश पारित नहीं किया है, इसे लेकर उनकी अध्यक्षता में कोई बैठक भी नहीं हुई है. इस संबंध में नगर विकास विभाग के माध्यम से निर्णय लिया जा रहा है. नगर आयुक्त ने कोर्ट को बताया कि वह जल्द से जल्द लंबित नक्शे को स्वीकृत कर देंगे जिससे आम जनों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े.

 

कोर्ट ने नगर आयुक्त को फटकार लगाते हुए पिछले 6 माह का आदेश का पालन नहीं किये जाने पर कड़ी नाराजगी व्यक्त किया और कहा क्यों नहीं नगर निगम की कार्यशैली की किसी स्वतन्त्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच करायी जाए. कोर्ट ने मामले में मुख्य सचिव को 2 सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से यह जानना चाहा था कि गिफ्ट डीड बिल्डर या आम व्यक्ति से कैसे सरकार के फेवर में लिया जाता है. मामले की सुनवाई हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई.

 

Sanjeevani

हस्तक्षेपकर्ता की ओर से अधिवक्ता लाल ज्ञान रंजन नाथ शाहदेव ने पैरवी की. मामले में हस्तक्षेपकर्ता के अधिवक्ता की ओर से कहा गया था कि रांची क्षेत्रीय प्राधिकार ने लाल चिंतामणी नाथ शाहदेव जो रांची व्यवहार न्यायालय में अधिवक्ता हैं उनसे भवन का नक्शा स्वीकृति के लिए 75000 रुपया जमा कर बिल्डर के रूप में निबंधित करते हुए नक्शा जमा करने को कहा था, जो अधिवक्ता अधिनियम के विरुद्ध था.  रांची क्षेत्रीय प्राधिकार ने सड़क चौड़ीकरण के लिए निबंधित गिफ्ट डीड जमा करने, नाली निर्माण के लिए 160075 रुपया जमा करने सहित अन्य शर्त पूरा करने के बाद ही नक्शा स्वीकृति करने की बात कही थी.

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