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बिरसा कृषि विश्वविद्यालय मामले में हाइकोर्ट ने जाहिर की नाराजगी, कहा- मामला अवमानना का

Ranchi : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर सह जूनियर साइंटिस्ट पदों पर नियुक्ति मामले में सोमवार को सुनवाई हुई. कोर्ट में जस्टिस एसएन पाठक को जानकारी देते हुए बताया गया कि कोर्ट में जिन लोगों ने याचिका की है, उनसे यूनिवर्सिटी काम नहीं ले रही है. जबकि संविदा पर कार्यरत प्रोफेसर से काम लिया जा रहा है. कोर्ट ने मामले में नाराजगी व्यक्त की. और कहा कि यह मामला अवमानना का प्रतीत हो रहा है.

यह भेदभावपूर्ण रवैया है. मामले ने कोर्ट ने बीएयू से जवाब मांगा है. अगली सुनवाई के लिए जनवरी में तारीख दी जायेगी. प्रार्थी डा संजीत कुमार व अन्य की ओर से याचिका दाखिल की गयी है.

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हाइकोर्ट में याचिका के बाद नहीं लिया जा रहा काम

इस दौरान प्रार्थी पक्ष से अधिवक्ता अजीत कुमार और चंचल जैन की ओर से पक्ष रखा गया. जिसमें बताया गया कि प्रार्थी की नियुक्ति साल 2015 में संविदा के आधार पर असिस्टेंट प्रोफेसर सह कनीय वैज्ञानिक के पद हुई. हाई कोर्ट ने नयी नियुक्ति के लिए जारी विज्ञापन पर पूर्व में रोक लगा दी थी.

इसके बाद प्रार्थियों का संविदा पर काम करने की अवधि 16 नवंबर को समाप्त हो गयी. ऐसे में हाइकोर्ट के रोक के बाद वैसे लोगों से काम नहीं लिया जा रहा है, जिन्होंने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की है.

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जबकि उन लोगों से अब भी काम लिया जा रहा है, जो हाइकोर्ट नहीं आये. उनकी भी संविदा पर काम करने की अवधि 16 नवंबर को समाप्त हो गयी.

जानकारी हो कि बीएयू में 26 सहायक प्रोफेसर संविदा पर काम कर रहे हैं. जिसमें 13 ने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की है.

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Nayika

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