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हाईकोर्ट ने नगर विकास विभाग से पूछा,नगर निगम में टाउन प्लानर की क्या है भूमिका ?

Ranchi: डॉ राजेश कुमार के नक्शा विचलन मामले में दायर नक्शा स्वीकृति से संबंधित राधिका शाहदेव एवं लाल चिंतामणि नाथ शाहदेव की हस्तक्षेप याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. वहीं कोर्ट के आदेश के आलोक में नगर विकास विभाग के टाउन प्लानर गजेंद्र राम कोर्ट में सशरीर उपस्थित हुए. मामले में नगर विकास विभाग की ओर से शपथ पत्र दाखिल किया गया. कोर्ट ने गजेंद्र राम से पूछा कि नगर निगम में टाउन प्लानर की क्या भूमिका होती है , यह अगली सुनवाई में कोर्ट को बताएं. कोर्ट ने गजेंद्र राम से फिर से पूछा कि मास्टर प्लान 2037 में अगर किसी व्यक्ति को कोई परेशानी या शिकायत आती है तो वह इसके निवारण के लिए कहां जायेगा. उसकी समस्या दूर करने की क्या व्यवस्था है? इस पर गजेंद्र राम की ओर से बताया गया कि अगर मास्टर प्लान 2037 के तहत किसी व्यक्ति को कोई परेशानी आती है तो वह नगर निगम में आवेदन देगा. इस आवेदन पर नगर निगम विचार करेगा कि यह सही है या गलत . इसके बाद वह इसे नगर विकास विभाग को भेजेगा जिस पर नगर विकास विभाग न्यायोचित कार्रवाई करेगा. कोई तथ्यात्मक त्रुटि है तो उसे नगर निगम खुद अपने स्तर से दूर कर सकती है. लेकिन अगर मास्टर प्लान 2037 में कोई बदलाव लाना है तो नगर निगम उस पर निर्णय लेकर नगर विकास विभाग को भेजेगी और नगर विकास विभाग इस पर कानून सम्मत निर्णय लेगा. मामले में अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी. मामले की सुनवाई हाइकोर्ट के न्यायमूर्ति एस चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई.
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बता दें कि मामले में हस्तक्षेपकर्ता की ओर से कहा गया था कि रांची क्षेत्रीय प्राधिकार ने लाल चिंतामणि नाथ शाहदेव के लिए 75000 रुपया जमा कर बिल्डर के रूप में निबंधित करते हुए नक्शा जमा करने को कहा था, जो अधिवक्ता अधिनियम के विरुद्ध था. रांची क्षेत्रीय प्राधिकार ने सड़क चौड़ीकरण के लिए निबंधित गिफ्ट डीड जमा करने, नाली निर्माण के लिए 160075 रुपया जमा करने सहित अन्य शर्त पूरा करने के बाद ही नक्शा स्वीकृति करने की बात कही थी.

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