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मुर्गी ने जन्मा मोर… अब मोर कन्फ्यूज कि मम्मी कुकड़ू कू क्यों बोलती है! देखें वीडियो

Ranchi: सब अंडे का फंडा है. अंडा से मुर्गी का चूजा निकलता है, और मोर के बच्चे भी अंडे से ही निकलते हैं. कहानी झारखंड के सुदूरवर्ती गांव की है. गांव का नाम नहीं बता सकते हैं, क्योंकि गांव वालों को लगता है कि नाम बता दिए जाने से खामखाह पुलिस उन्हें परेशान करेगी. बेचारे गरीब और लाचार हैं. वो कहते हैं कि आप तो फोटो खींच कर चले जाएंगे, लेकिन पुलिस को बात पता चलेगी तो वो उन्हें बहुत परेशान करेगी. इसलिए नाम डिसक्लोज नहीं कर सकता. हां तो बात उस कहानी कि कैसे एक मुर्गी ने मोर को जन्मा. और वो मोर आखिर अपनी मां-बाप को देखकर कन्फ्यूज क्यों है.

एक गांव में एक पेड़ के नीचे बैठकर उमस भरी गर्मी में ठंडी हवा का मजा ले रहा था. तभी नजर वहां मंडराती मुर्गी और मुर्गें पर पड़ी. साथ में उनके कई चूजे भी थे. लेकिन इन मुर्गी-मुर्गों और उनके चूजों के बीच एक बात बड़ी अजीब लगी. वो थे अजीबो-गरीब तीन चूजे. जो घूम तो रहे थे अपनी मुर्गी और मुर्गों की टोली के साथ. लेकिन काफी कन्फ्यूज दिख रहे थे. उनकी कन्फ्यूजन को देखकर मैं अपनी कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए आस-पास के लोगों से बात करनी शुरू कर की. तो लोगों ने बताया कि दरअसल ये तीन चूजे जो हैं वो मुर्गी के नहीं बल्कि मोर के बच्चे हैं.

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Sanjeevani

मैं और कन्फ्यूज, भला मोर के बच्चों को मुर्गी कैसे गोद ले सकती है. इस सवाल के जवाब ने मुझे इस बात पर सोचने पर मजबूर कर दिया कि गोद लेने की प्रथा सिर्फ इंसानों में नहीं बल्कि मुर्गे-मुर्गियों की बिरादरी में भी चल पड़ी है.

दरअसल गांव जो कि एक बड़े जंगल के करीब है. वहां आदिवासी समाज के लोग अकसर कुछ ना कुछ काम के लिए जाते रहते हैं. उन्होंने वहां देखा कि मोरनी ने तीन अंडे दिए हैं. लेकिन वो काफी बीमार हालत में हैं और शायद ही उसके प्राण बच पाए. तो लोगों ने उनके अंडे काफी संभाल कर अपने धर ले आए. उनके घर में काफी मुर्गे और मुर्गियां हैं. तो उन्होंने इन तीन अंडों को मुर्गी के अंडों के साथ रख दिया. मुर्गियों ने भी परहेज नहीं किया. जितनी शिद्दत से वो अपने अंडों को सेक रही थी. उतनी ही शिद्दत से उन्होंने मोर के अंडों को भी सेंका.

नतीजा कि कुछ दिनों में ही मुर्गी के चूजों के साथ मोर के चूजों ने जन्म लिया. सबसे बड़ी चौकाने वाली बात यह कि इन मोर के चूजों को लगता है कि वो भी मुर्गे ही हैं. अपनी माता-पिता के साथ दिन भर घूमते रहते हैं. जो मुर्गे और मुर्गियां चुगते हैं, मोर के बच्चे भी वहीं चुगते हैं. कोई भेदभाव नहीं. इन्हें देख कर सीख मिली कि जाति, धर्म और वंश की बात तो छोड़ दीजिए पता नहीं कैसे एक प्रजाति या नस्ल के नहीं होने के बावजूद साथ इतने प्यार से साथ में रहते हैं.

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