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March की गर्मी ने बनाया रिकॉर्ड, भारत में 121 वर्षों के इतिहास में सबसे गर्म महीना

देश भर में अधिकतम तापमान सामान्य से 1.86 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा

New Delhi : भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के एक विश्लेषण से पता चला है कि भारत ने औसतन 121 वर्षों में अपने सबसे गर्म मार्च के दिनों को दर्ज किया है. जी हां, देश के 121 वर्षों में मार्च 2022 सबसे गर्म महीना रहा है. मार्च 2022 में देश भर में अधिकतम तापमान सामान्य से 1.86 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा है.
रिकॉर्ड तोड़ने वाला आंकड़ा उत्तर पश्चिम और मध्य भारत में अधिकतम तापमान का रहा. जबकि उत्तर पश्चिमी क्षेत्र ने अपना उच्चतम औसत अधिकतम दर्ज किया, मध्य ने 1901 के बाद से महीने के लिए दिन के तापमान के मामले में अपना दूसरा सबसे गर्म मार्च दर्ज किया है.

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आंकड़े बताते हैं कि इस साल पड़ने वाला है भयंकर गर्मी

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आंकड़े तापमान विचलन के पैमाने को दर्शाते हैं, जिसने देश के अधिकांश हिस्सों में गर्मी की शुरुआत को प्रभावी ढंग से हुई है. मार्च के दूसरे पखवाड़े के दौरान उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लू दर्ज की गई. आंकड़े बताते हैं कि इस साल भारत में भयंकर गर्मी पड़ने वाली है.

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट

मौसम एक्सपर्ट ने कहा कि असामान्य हवा के पैटर्न का परिणाम, प्रवृत्ति को जलवायु संकट से जोड़ा जा सकता है. जलवायु निगरानी और भविष्यवाणी समूह, आईएमडी, पुणे की प्रमुख ओपी श्रीजीत ने कहा, ”वर्षा की कमी इस गर्मी का एक कारण है.

ग्लोबल वार्मिंग भी एक मुख्य कारण

मार्च के महीने में भी दो हीटवेव घटनाएं हुईं. एक एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन था जिसके कारण पश्चिम की ओर से उत्तर और मध्य भारत में गर्मी का संचार हुआ. कुल मिलाकर ग्लोबल वार्मिंग भी एक मुख्य कारण है. यहां तक कि ला नीना की घटनाओं के दौरान भी हम अक्सर बहुत अधिक तापमान दर्ज कर रहे हैं.”

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अप्रैल में कैसा रहेगा मौसम?

स्काईमेट वेदर सर्विसेज के उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत ने कहा, ”इस साल मार्च में इस तरह के उच्च तापमान की रिकॉर्डिंग के पीछे प्राथमिक कारण वर्षा की कमी है. इसके अलावा उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लगातार शुष्क और गर्म, पश्चिमी हवाएं चलना भी इसका कारण है.
हमने यह भी देखा कि बादल रहित आकाश भी सूर्य की किरणों के सीधे संपर्क में आया, जिससे तापमान अधिक हो गया. अप्रैल में भी इसी तरह की मौसम की स्थिति जारी रहने की संभावना है क्योंकि कोई मौसम प्रणाली विकसित नहीं हो रही है.”

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