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इन सड़क दुर्घटनाओं में सरकार का दोष ज्यादा  है!

नतीजा देश में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों की संख्या 1.5 लाख से भी ज्यादा है.

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Rajesh Das
घटना दिल्ली की है और विचारणीय है, भारतीय एयर फोर्स से रिटायर 68 वर्षीय डॉक्टर मधुसूदन चौधरी ने रविवार की शाम अपने पूर्वी दिल्ली स्थित नर्सिंग होम से वापस लौटते हुए बारापुला फ्लाईओवर पर एक नवदंपत्ति, जिनके विवाह के हाल में ही एक वर्ष पूरे हुए थे और वे त्रिलोकपुरी स्थित अपने परिचित के घर से एक पारिवारिक समारोह से अपने घर की ओर लौट रहे थे, उन्हें अपनी SUV से धक्का मार दिया. इस सड़क दुर्घटना में मोटरसाइकिल के पीछे बैठी 30 वर्षीय पत्नी निशा की मौत हो गयी और पति सन्नी सफदरजंग अस्पताल में गंभीर अवस्था में इलाजरत है. डॉक्टर साहब पर IPC की 279, 337 और 304-A जैसी धाराएं लगाई गई हैं, जो बेहद गंभीर हैं. उन्हें जीवन के इस वृद्धावस्था में कानूनी कारवाई का सामना करना पड़ेगा, जिसमें उन्हें सजा भी हो सकती है. दूसरी तरफ एक हंसता खेलता परिवार भी खत्म हो गया, पत्नी की मौत हो गयी और पेशे से ड्राइवर पति के दाएं पैर को काटने की नौबत भी आ सकती है, जिससे उसका पेशेवर जीवन भी समाप्त हो सकता है.

इस दुखद घटना से कुछ संदेश और आगे के लिए कुछ जरूरी सबक भी मिलते हैं

  1. आप यह मानकर चलिये कि सरकार की नीति देशभर में ऑटोमोबाइल के प्रसार की है, उनका अपने नागरिकों की मौत से कोई लेना देना नहीं है, वे गाड़ियों को केंद्र में रखकर नीतियां बनाते हैं, और नतीजा देश में सड़क दुर्घटनाओं में हो रही मौतों की संख्या 1.5 लाख से भी ज्यादा है.

  2. भारत की सरकार ने ब्रासीलिया में 2015 नवंबर में एक लक्ष्य लिया था कि वर्ष 2000 तक वे हमारे देश में सड़क दुर्घटना से हो रही मौतों की संख्या को आधी कर देंगे, इस संकल्प का हश्र सबके सामने है.

  3. देशभर में सड़कों पर गाड़ियां और उन्हें चलाने वाले ड्राइवर्स की संख्या बढ़ती जा रही है, तो क्या पूरे देश और सड़कों को गाड़ियों से भर देने का इरादा रखती है ये सरकार?

  4. चूंकि सरकार पब्लिक ट्रांसपोर्ट के मुद्दे पर बुरी तरह से फेल है और वे ऑटो लॉबी के इंफ्लुएंस में काम कर रहे हैं, इसीलिए देश गाड़ियों से भरता जा रहा है. लोगों के पास शेयर मोबिलिटी के अच्छे विकल्प नहीं हैं, इसलिए वे निजी गाड़ियों की ओर आकर्षित होते हैं.

  5. गाड़ियों की संख्या बढ़ने से हर जगह ट्रैफिक जाम हो जाता है, गाड़ियों से निकलता धुआं पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक है.

  6. जबकि विश्व के बड़े और विकसित देश निजी गाड़ियों को अपने नागरिकों से दूर कर रहे हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अच्छे साधन लोगों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं, तो यहां की सरकार निजी गाड़ियों के लिए सड़कों पर पार्किंग किस तरह हो, इस विषय को लेकर चिंतित है और वेस्टेड इंटरेस्ट की वजह से इसी पर कार्य भी कर रही है.

  7. जब हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी नीदरलैंड जाते हैं तो हंसते हुए साइकिल की सवारी करते हैं, मैं उनसे आग्रहपूर्वक पूछना चाहता हूँ कि क्या 2019 चुनाव में वे देशभर में साइकिलों के उचित प्रसार के लिए सिक्योर्ड साइकिल लेन्स जैसी कोई नीति लेकर जनता के बीच वोट मांगेंगे, अगर नहीं तो मैं इन मुद्दों को लेकर सड़क दुर्घटना के शिकार व्यक्तियों और उनके परिवार के व्यक्तियों तक पहुंचने का प्रयास करूंगा ताकि देश की आबादी सड़क दुर्घटना के दंश से मुक्त रहे.

  8. सबसे जरूरी बात कि जब भारत में किसी भी श्रेणी की सड़क पर गाड़ियों को चलाये जाने की अधिकतम गति 120KMPH पर निर्धारित की गई है तो फिर हमारी गाड़ियों को 120 KMPH से अधिक गति से चलाये जाने के लिए गाड़ियों में मेकेनिकल साधन आखिर किस मापदंड पर प्रदान किये गए हैं? आखिर हम यह क्यों ना यह मान लें कि 120 KMPH से अधिक गति के दौरान होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में सरकार भी बराबर की दोषी है और जो धाराएं गाड़ी के ड्राइवर पर लगनी चाहिए, वही धाराएं सरकार के ऊपर भी लगाई जानी चाहिए, बल्कि उनपर और भी कड़ी धाराएं लगाई जानी चाहिए क्योंकि उन्हें पता है कि 120 KMPH से अधिक की गति अति कालकारी हैं, मगर वे इसे होने दे रहे हैं.

मुझे दुख है कि भारत की सरकार उपरोक्त मुद्दों पर जानते बूझते हुए मौन हैं!!

(ये लेखक के निजी विचार हैं)

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