न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

सस्ते 5G के लिए सरकार की सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी की योजना, वैल्यू छह लाख करोड़!

अनुमान लगाया जा रहा है कि 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी की वैल्यू छह लाख करोड़ रुपये होगी.  इन स्पेक्ट्रम की नीलामी के बाद किफायती 5जी सर्विसेज की शुरुआत हो सकेगी.

36

NewDelhi ;  मोदी सरकार सस्ते 5G के लिए सबसे बड़ी स्पेक्ट्रम नीलामी की योजना बना रही है. खबरों के अनुसार टेलिकॉम स्पेक्ट्रम के लिए अब तक की यह सबसे बड़ी नीलामी  योजना होगी.  अनुमान लगाया जा रहा है कि 5G स्पेक्ट्रम की नीलामी की वैल्यू छह लाख करोड़ रुपये होगी.  इन स्पेक्ट्रम की नीलामी के बाद किफायती 5जी सर्विसेज की शुरुआत हो सकेगी.  इनमें ग्रामीण इलाकों में फाइबर-टू-द-होम (FTTH) इंटरनेट को पहुंचाना भी शामिल है.  टेलिकॉम मामलों के फैसले लेने वाला सर्वोच्च संस्थान डिजिटल कम्युनिकेशंस कमीशन (DCC )की इस योजना के तहत  इस साल के आखिर तक करीब 8,600 मेगाहर्ट्ज के मोबाइल एयरवेज की नीलामी सरकार करेगी.  इनमें टेलिकॉम सर्विसेज के मौजूदा व्यवस्था के लिए स्पेक्ट्रम भी शामिल होंगे. इसके अलावा नई 5जी सर्विसेज के स्पेक्ट्रम भी होंगे.

eidbanner

इसे भी पढ़ेंः  टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज  : सालाना एक करोड़ से ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों  की संख्या 100 के पार

सरकार को कम से कम 5.8 लाख करोड़ रुपये नेट मिलेंगे

टाइम्स ऑफ इंडिया  के अनुसार टेलिकॉम सेक्रेटरी और डीसीसी के चेयरपर्सन अरुणा सुंदरराजन ने  बताया कि अगर सभी स्पेक्ट्रम को रिजर्व दामों में भी बेचा जाता है, तो भी सरकार को कम से कम 5.8 लाख करोड़ रुपये नेट मिलेंगे. हालांकि, सरकार का आइडिया इस स्पेक्ट्रम नीलामी से ज्यादा से ज्यादा रेवेन्यू पाना नहीं बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि टेलिकॉम सर्विसेज पहले से ज्यादा बेहतर हों.  डीसीसी ने ट्राई से पिछले चरणों में स्पेक्ट्रम बिक्री के कमजोर रहने के कारणों के बारे में पूछा है.  बता दें कि    ट्राई ने पहले ही नये चरण की नीलामी के लिए रिजर्व दामों का सुझाव दिया है.

टेलिकॉम मिनिस्ट्री के एक शीर्ष अधिकारी ने  बताया कि ट्राई को सभी सिफारिशों को एक बार दोबारा देखना चाहिए ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौजूदा सिफारिशें प्रधानमंत्री के सभी के लिए ब्रॉडबैंड विजन को सुनिश्चित करती हैं या नहीं.  टेलिकॉम मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, हमें यह सुनिश्चित करना है कि 5जी का इस्तेमाल न केवल स्मार्ट कारों और स्मार्ट शहरों के लिए हो, बल्कि दूसरी सर्विसेज जैसे ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए भी यह काम आये.  हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि चीनी कंपनी हुवावे नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकती है या नहीं.

Related Posts

जम्मू-कश्मीर : आसिया अंद्राबी ने एनआईए के सामने कबूला, विदेशों से फंड लेकर घाटी में करवाया जाता था प्रदर्शन

आसिया अंद्राबी ने कबूल किया कि वह विदेशी स्रोतों से दान और फंड ले रही थी. इसके एवज में उसकी संस्था दुखतारन-ए-मिल्लत घाटी में मुस्लिम महिलाओं से प्रदर्शन करवाती थी.

इसे भी पढ़ेंः   अरविंद सुब्रमण्यम का दावा, 2011-12 से 2016-17 के बीच में जीडीपी सात फीसदी नहीं,  4.5 फीसदी की दर से बढ़ी

स्पेक्ट्रम नीलामी में एरिक्सन, नोकिया और सैमसंग जैसी कंपनियां भी हिस्सेदार बनें

सरकार की कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि टेस्टिंग फेज के लिए रेगुलर टेलिकॉम ऑपरेटर्स (रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया) की जगह स्पेक्ट्रम नीलामी में एरिक्सन, नोकिया और सैमसंग जैसी कंपनियां भी हिस्सेदार बनें. मंत्रालय के अधिकारी ने बताया, हम चाहते हैं कि स्टार्टअप और एजुकेशनल संस्थानों के पास भी 5जी टेस्ट ट्रायल का ऐक्सिस होना चाहिए.  5,000 रुपये की वन-टाइम लाइसेंस फीस के साथ एक साल के लिए ट्रायल स्पेक्ट्रम देने के अलावा, हम एक टाइम-बाउंड (ऐप्लिकेशन) क्लियरेंस मैकनिज्म पर विचार कर रहे हैं.

इसे भी पढ़ेंः  चेन्नई  : ऑफिस में पानी नहीं है, घर पर रह कर काम करें, आईटी कंपनियों का अपने कर्मचारियों से आग्रह

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: