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पंचायतों के स्वरूप पर अब तक पत्ते नहीं खोल रही सरकार

एक्सटेंशन के बाद किस व्यवस्था के तहत होगा काम, 24 दिनों से बना है संशय

Ranchi: राज्य में विगत 24 दिनों से त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था पर असमंजस बरकरार है. पंचायती राज व्यवस्था को छह माह या अगला चुनाव होने तक विस्तार देने से जुड़े अध्यादेश पर राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद गजट में इसका प्रकाशन भी हो चुका है, लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि एक्सटेंशन के बाद पंचायतों का स्वरूप क्या होगा और किन नियमों के तहत उनका संचालन होगा?

त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था का कार्यकाल खत्म होने के बाद सरकार ने पहले छह महीने के लिए जो एक्सटेंशन दिया था, उसमें ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में बनी कार्यकारी समिति के माध्यम से पंचायतों के काम काज चलाये जा रहे थे. योजनाओं के चयन से लेकर भुगतान तक की व्यवस्था इसी कार्यकारी समिति के माध्यम से चल रही थी.

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अब दूसरी बार छह महीने या अगले चुनाव तक पंचायतों को एक्सटेंशन देने का जो निर्णय हुआ है, उसकी व्यवस्था पर पंचायती राज विभाग अब विधि विभाग से कानूनी मशविरा ले रहा है. विधि विभाग की राय के बाद ही यह तय किया जायेगा कि पंचायतों में अगामी चुनाव होने तक किसके हाथ में कमान रहेगी.

अधिकारियों का कहना है कि विधि विभाग से परामर्श प्राप्त होने के बाद पंचायती राज विभाग नयी व्यवस्था के स्वरूप पर सीएम से मंजूरी प्राप्त करेगा. इसके बाद कैबिनेट के जरिए नयी प्रस्तावित व्यवस्था और नयी नियमावली पर मुहर लगेगी.

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बतातें चलें कि झारखंड में पंचायतों का कार्यकाल दिसंबर 2020 को ही समाप्त हो गया था. कोरोना के कारण राज्य में चुनाव नहीं कराये जा सके. ऐसे में राज्य सरकार ने सात जनवरी को आदेश निकाल कर पंचायतों को छह माह का एक्सटेंशन दिया था.

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यह तय हुआ था कि इससे पूर्व चुनाव करा दिया जायेगा. पंचायतों के संचालन के लिए ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में कार्यकारी समिति गठित की गयी थी. इस समिति का कार्यकाल सात जुलाई को पूरा हो गया था.

इस बार भी कोरोना की दूसरी लहर के कारण चुनाव नहीं कराये जा सके ऐसे में सरकार ने दोबारा एक्सटेंशन देने का निर्णय लिया और अध्यादेश की मंजूरी दी, पर अभी तक कार्यकारी समिति पर फैसला नहीं ले सकी है.

बताया जा रहा है कि इस बार जो नयी व्यवस्था बनने जा रही है, उसमें मुखिया की अनुपस्थिति में उपमुखिया को सिग्नेटरी पावर दिया जा रहा है.

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मनरेगा में बीडीओ को मिल चुका है पावर

झारखंड में मनरेगा के काम में प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पहले ही अधिकार दे दिया गया है. बीडीओ के हस्ताक्षर से ही अभी मनरेगा मजदूरों को मजदूरी मिल रही है.

सामाग्रियों के लिए भुगतान भी इसी माध्यम से हो रहा है. सूत्रों का कहना है कि पंचायतों के काम में भी बीडीओ के अधिकार देने के लिए लॉबिंग चल रही है.

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