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संताल आदिवासियों के पूजास्थल का सरकार नहीं करा रही पक्कीकरण: लखन मुर्मू

Dumka: एक ओर जहां रघुवर सरकार ने सरना-मसना के सौंदर्यीकरण करने की घोषणा, 28 जुलाई 2017 को रांची के ओरमांझी स्थित बाधिनबंडा गांव के एक कार्यक्रम में की थी. वही दूसरी ओर संताल परगना के संताल आदिवासियों के पूजास्थल को सरकार के द्वारा नजरअंदाज किये जाने से ग्राम प्रधान नाराज है. वही शुक्रवार को पुराना दुमका-जरुवाडीह में ग्राम प्रधान/मांझी बाबा लखन मुर्मू की अध्यक्षता में ग्रामीणों ने बैठक की. बैठक में सरकार की उदासीनता के कारण गांव के संताल आदिवासियों का पूजास्थल मांझीथान का पक्कीकरण अबतक नहीं होने पर ग्रामीणों ने दु:ख व्यक्त किया.

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मुख्यमंत्री ने की थी घोषणा

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार 28 जुलाई 2017 को कहा था कि राज्य में सभी सरना-मसना स्थलों की घेराबंदी कराई जाएगी. दो-तीन साल के अंदर झारखंड के सभी सरना-मसना का सौंदर्यीकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा. वह रांची के ओरमांझी स्थित बाधिनबंडा गांव में जिला के सभी प्रखंडों के सरना-मसना की घेराबंदी कार्य के शिलान्यास के मौके पर बोल रहे थे. जनजातीय संस्कृति विरासत के रक्षक मानकी, मुंडा, मांझी, पाहन और हमारे जनजातीय पुरोहित समाज के अभिन्न अंग हैं. इनका योगदान जनजातीय संस्कृति के विकास एवं संरक्षण में अमिट है.

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सरकार के रवैये से नाराज ग्रामीणों ने लिए कई निर्णय

ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि ग्रामीण स्वंय चंदा कर मांझीथान का निर्माण करेंगे. ग्रामीणों ने यह भी निर्णय लिया कि मांझीथान सड़क से बहुत सटा हुआ है, इससे पूजा-पाठ करने में दिक्कत होती है. इसलिए सड़क से दूर मांझीथान धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम के साथ ले जाकर मांझीथान का निर्माण किया जायेगा. इसके साथ-साथ ग्रामीणों द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव में सफाई अभियान चलाया जायेगा.

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इस बैठक में स्टेंशिला हेम्ब्रोम, दुर्गावती मरांडी, पकु मुर्मू, लिलमुनी हांसदा, लुइस हेम्ब्रेम, सुमिर मुर्मू, सरोजनी मरांडी, सोकोल मुर्मू, निर्मल टुडू, लुखिराम सोरेन, अजित सिंह, संतोषनी मुर्मू, रवि मुर्मू, राजू मुर्मू, मेरी सोरेन, राकेश सोरेन, वीरेद्र हेम्ब्रेम, बाबूलाल किस्कू, राजेन्द्र हेम्ब्रेम, मुन्ना मंडल, बबुधन मुर्मू, लुखिराम सोरेन, मकलू सोरेन, शीला सोरेन, मुन्नी मुर्मू, मेरी मुर्मू, सोनी मुर्मू, फुलमुनी सोरेन, सरोजनी मरांडी, रवि मुर्मू, रानी मुर्मू के साथ काफी संख्या में महिला और पुरुष उपस्थित थे.

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