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नियमावली बनाने के लिए अन्य राज्यों का भ्रमण का हवाला देकर सरकार ने छलने का काम किया : पारा शिक्षक

राज्य के पारा शिक्षक पिछले 15 वर्षों से अपनी सेवा स्थायीकरण और वेतनमान की मांग पर आंदोलित हैं.

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Ranchi : राज्य के पारा शिक्षक पिछले 15 वर्षों से अपनी सेवा स्थायीकरण और वेतनमान की मांग पर आंदोलित हैं. वे अपने भविष्य को लेकर सशंकित है. 17 जनवरी 2019 को झारखंड सरकार के साथ पारा शिक्षकों की सेवा स्थायीकरण एवं वेतनमान के लिए 90 दिनों के अंदर समाधान का समझौता किया गया था.

छात्रहित और सरकार के साथ हुए समझौते को देखते हुए राज्यभर के पारा शिक्षकों ने अपने आंदोलन को स्थगित किया था. एकीकृत पारा शिक्षक संघ ने बताया कि आज 90 दिन के बजाय लगभग 240 दिन बीत गये, लेकिन हमारी समस्याएं यथावत बनी हुई है. झारखंड सरकार की शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमिटी का गठन भी किया गया था.

कमिटी का गठन तो हुआ पर कोई रिपोर्ट नहीं आयी. एकीकृत पारा शिक्षक संघ ने आरोप लगाया  कि राज्य सरकार ने नियमावली और स्थायीकरण को लेकर अन्य राज्यों का भ्रमण का हवाला देते हुए हमें छलने  का कार्य किया है. डॉ नीरा यादव ने कोडरमा में 20जुलाई को आयोजित पारा शिक्षक जन चौपाल में वेतनमान और नियमावली को लेकर जल्द ही सौगात देने की बात स्वयं कही थी.

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संघ शिक्षण व्यवस्था ठप करने और उग्र आंदोलन को

 बाध्य होगा

संघ के सदस्यों ने कहा कि शिक्षकों ने हर समय सरकार की बात को माना एवं छात्र हित को ध्यान में रखकर विद्यालय में पठन-पाठन कार्य किया. पर अब सरकार अपने वादे से मुकर रही है.  इधर सरकार के नुमाइंदे नियमावली जल्द निर्माण की बात करते हैं. वहीं दूसरी ओर शिक्षा सचिव के बयान अलग दिशा की ओर प्रदर्शित करता है. एक तरफ हम पारा शिक्षक नियमावली का इंतजार कर रहे थे.

दूसरी ओर राज्य के शिक्षा सचिव ने  18 अगस्त 2019 को मीडिया के माध्यम सूचना दी कि  2022 के बाद  पारा शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी जायेगी. ऐसे में नियमावली की क्या आवश्यकता है .सरकार अगर हमारी भावनाओं के साथ खेलती है. हमें छलने का प्रयास करती है तो निश्चित ही राज्य के पारा शिक्षक  पुनः एक बार  शिक्षण व्यवस्था ठप करने की ओर बढ़ेंगे  एवं उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे. जिसकी सारी जवाबदेही झारखंड सरकार पर जाएगी.

सड़क पर उतर कर आंदोलन करना नहीं चाहते, शिक्षक बनना चाहते हैं

पारा शिक्षक संघ के सदस्यों का कहना है कि  पारा शिक्षक  इस न्याय मार्च माध्यम से सरकार से अपील करते हैं कि तय समझौते के अनुरूप वेतनमान और स्थायीकरण हेतु  नियमावली  लाकर  हम पारा शिक्षकों के भविष्य को  संवारने का काम करें.  हम पारा शिक्षक सड़क पर उतर कर आंदोलन करना नहीं चाहते, शिक्षक बनना चाहते हैं. हमें शिक्षक बनाइए.   राज्य के 42 लाख गरीब बच्चों के भविष्य निर्माण में लगे हम पारा शिक्षकों के भविष्य को भी संवारने के कार्य करें.

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