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अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा खेल, जन औषधि केंद्र में बिक रही ब्रांडेड दवाएं

Vivek Sharma

Ranchi: मरीजों को सस्ती और क्वालिटी वाली दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजधानी के दो बड़े सरकारी हॉस्पिटलों में जन औषधि केंद्र की शुरुआत की गई है. जिससे मरीजों को अच्छी से अच्छी दवाएं सस्ती कीमत पर उपलब्ध हो जाए. लेकिन सदर हॉस्पिटल बिल्डिंग में चल रहे जन औषधि केंद्र का संचालक मनमानी पर उतर आया है. केंद्र में सस्ती दवाओं के बदले ब्रांडेड दवाएं बेची जा रही है. अधिकारियों की नाक के नीचे यह खेल चल रहा है. इसके बावजूद न तो संचालकों को रोक-टोक की जा रही है और न ही उन पर कोई कार्रवाई की जा रही है. यहीं वजह है कि उनका मन काफी बढ़ चुका है. इसी का फायदा उठाकर वे जेनरिक की बजाय ब्रांड की दवाएं और प्रोडक्ट्स केंद्र में भरते जा रहे है.

जन औषधि की तय है कीमत

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जन औषधि केंद्र में सप्लाई की जाने वाली दवाओं की कीमत सरकार ने तय कर रखी है. यह ब्रांड की तुलना में काफी सस्ती है. जिससे कोई भी आसानी से खरीद सकता है. ऐसे में संचालक प्रिंट रेट से ज्यादा में दवा की बिक्री नहीं कर सकता. ऐसे में अपनी जेब भरने के लिए ब्रांडेड दवाएं बेच रहे है. जहां अपनी मर्जी से रेट भी वसूल रहे है. जिसका सीधा असर केंद्र से दवाएं खरीदने वालों पर पड़ रहा है.

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केस 1

न्यू बॉर्न बच्चों को डॉक्टर विटामिन डी 3 प्रेस्क्राइब करते है. जन औषधि में जहां इसकी कीमत 20 रुपए है, जो उपलब्ध नहीं है. जबकि लीफोर्ड ब्रांड की कंपनी के सिरप के लिए 38 रुपए लिए जा रहे है. वहीं कंपनी बदलने पर यह कीमत और बढ़ जाती है.

केस 2

50 एमएल ग्लिसरीन की कीमत जन औषधि में 19 रुपए तय है. जिससे कि 100 एमएल खरीदने पर 38 रुपए चुकाने होंगे. लेकिन ब्रांड का ग्लिसरीन 100 एमल 60 रुपए में बेचा जा रहा है. जबकि प्रधानमंत्री जन औषधि की ग्लिसरीन लंबे समय से नहीं मंगाई जा रही.

इस मामले में सिविल सर्जन डॉ विनोद कुमार का कहना है कि ऐसी कोई जानकारी उन्हें नहीं है. इस मामले में संचालक से पूछताछ होगी कि आखिर वे ब्रांड की दवा कैसे बेच रहे है. इसके बाद उनपर कार्रवाई की जाएगी.

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