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सामूहिक प्रगति के लिए वरदान हो सकती है चौथी औद्योगिक क्रांति : महेश पोद्दार

दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स पोलिटिकल पार्टीज प्लस डायलॉग को किया संबोधित, तकनीक आधारित ‘सबका साथ-सबका विकास’ है पीएम मोदी का मन्त्र : महेश पोद्दार

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Ranchi: झारखण्ड से राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति भारत के लिए ढेर सारी संभावनाएं लेकर आई है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा है कि चौथी औद्योगिक क्रांति से प्राप्त तकनीक का लाभ लेकर गरीबी कम करने, किसानों के जीवन में सुधार लाने और दिव्यांगों के जीवन को आसान बनाने में सफलता पायी जा सकती है.  श्री पोद्दार दक्षिण अफ्रीका के प्रिटोरिया में आयोजित ब्रिक्स पोलिटिकल पार्टीज प्लस डायलॉग को भारतीय जनता पार्टी के प्रतिनिधि के रूप में संबोधित कर रहे थे. ब्रिक्स पोलिटिकल पार्टीज प्लस डायलॉग के वर्तमान संस्करण का विषय ‘चौथी औद्योगिक क्रांति’ है.

100 मिलियन रोजगार सृजित करने का लक्ष्य

अपने संबोधन में श्री पोद्दार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संचालित मेक इन इंडिया अभियान और इसमें हो रहे आधुनिकतम तकनीक के कुशलतापूर्वक प्रयोग का जिक्र किया. उन्होंने बताया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वकांक्षी अभियान के माध्यम से वर्ष 2022 तक 100 मिलियन अतिरिक्त रोजगार सृजित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

सत्याग्रह का किया जिक्र

श्री पोद्दार ने दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी द्वारा नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए किये गए अहिंसक सत्याग्रह का विशेष तौर पर जिक्र किया और इसके माध्यम से भारत और दक्षिण अफ्रीका के मजबूत संबंधों का महत्व निरुपित किया. उन्होंने बताया कि विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है और मानवता हमारे लिए सबसे बड़ी पहचान.

तकनीकी विकास का संबंध सामाजिक संदर्भ से भी

श्री पोद्दार ने कहा कि सामूहिक प्रगति और समृद्धि के लिए चौथी औद्योगिक क्रांति का बेहतर लाभ उठाया जा सकता है. इसके लिए हमें ऐसे प्रशासनिक तंत्र एवं नीतियों की आवश्यकता है जिससे इसका समावेशी लाभ सुनिश्चित किया जा सके. हमें इस सच्चाई को स्वीकार करना पड़ेगा कि तकनीकी विकास का संबंध सामाजिक संदर्भ से भी है, न कि केवल व्यावसायिक मामलों से.  उन्होंने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति के आगमन से भारत विकास के पारंपरिक चरणों से छलांग लगाते हुए विकसित देशों की श्रेणी की ओर तेजी से बढ़ सकता है. नई टेक्नोलॉजी को बेहतर ढंग से और रणनीति के साथ इस्तेमाल किया जाए, तो संसाधनों और बुनियादी ढांचे में सुधार किया जा सकता है, जो बेहतर गुणवत्ता और अधिक टिकाऊ विकास को संभव बना सकता है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सभी क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है, जिसमें चिकित्सा से लेकर न्याय, उत्पादन और वित्तीय क्षेत्र तक शामिल हैं.

भारत की क्षमता को विश्व आर्थिक मंच ने महसूस किया

चौथी औद्योगिक क्रांति को नेतृत्व देने की भारत की क्षमता को विश्व आर्थिक मंच ने भी महसूस किया है. यही वजह है कि उसने मुंबई में इससे संबंधित सेंटर बनाने के लिए भारत सरकार के साथ साझेदारी की है. यह सेंटर विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रहे विकास को गति देने में सरकार की मदद करेगा ताकि समाज और जनता को अच्छी से अच्छी सेवाएं दी जा सके. चौथी औद्योगिक क्रांति से जुड़ा यह सेंटर केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय संगठन और सिविल सोसायटी के साथ मिलकर ऐसे व्यावहारिक उपकरण बनाने पर काम करेगा जो सरकार के तकनीक आधारित कामकाज में तेजी भरेगा.

सकारात्मक माहौल बनाने पर जोर

श्री पोद्दार ने कहा कि भारत सरकार ने पहले ही इस दिशा में सकारात्मक शुरुआत कर दी थी. उसने स्टार्टअप इंडिया और अटल इनोवेशन मिशन जैसे प्रयासों के माध्यम से आवश्यक संरचनात्मक सुधार लाने और एक उद्यमी माहौल बनाने पर जोर दे रखा है. प्रधानमंत्री मोदी का ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा और बड़े पैमाने पर विकास के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का विचार अब साकार रूप ले रहा है. यह समावेशी विकास और प्रगति को बढ़ावा दे सकता है. इससे पूर्व दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने श्री पोद्दार का अत्यंत गर्मजोशी के साथ स्वागत किया.

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