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सांसद राकेश सिन्हा की ओछी टिप्पणी से ईसाई समुदाय मर्माहत है : प्रभाकर तिर्की

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Ranchi : राष्ट्रीय ईसाई महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की ने बुधवार को रांची में प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि लोकमंथन कार्यक्रम में सांसद राकेश सिन्हा द्वारा ईसाई के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन चलाने के बयान से ईसाई मर्माहत हैं. उन्होंने कहा कि राज्य में आरएसएस की ओर से लोकमंथन कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, लेकिन किसी भी रूप में लोकमंथन अपने नाम को सार्थक नहीं करता. कार्यक्रम में सिर्फ राज्य की भोली-भाली जनता को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया गया. उन्होंने कहा कि लोकमंथन कार्यक्रम में देश के कई जाने-माने चेहरे आये थे, जिन्होंने जिस तरह बयानबाजी की, उससे साफ प्रतीत होता है कि वे जनता को बरगलाने आये थे. उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा ने जिस तरह से ईसाइयों और धर्म परिवर्तन पर टिप्पणी करते हुए ओछी टिप्पणी की, उससे स्पष्ट होता है कि कार्यक्रम का आयोजन सिर्फ जनता को भड़काने के लिए किया गया था.

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लोकमंथन स्वस्थ परंपरा नहीं

इस दौरान तिर्की ने कहा कि राज्यसभा सदस्य राकेश सिन्हा के दिये गये बयान से काफी लोग आहत हुए हैं. राज्यसभा सदस्य होने के बावजूद उन्होंने संवेदनहीनता बरतते हुए ऐसे मुद्दे पर टिप्पणी की, जो आम जनता के बीच संशय उत्पन्न करनेवाला है. उन्होंने कहा कि यदि लोकमंथन का आयोजन इस लिए किया गया था, तो यह एक स्वस्थ परंपरा नहीं है.

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बीजेपी खंगाले अपना इतिहास

धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि लोकमंथन के दौरान ईसाई मिशनरियों द्वारा तीन सौ साल से राज्य को बर्बाद करने की बात कही गयी. लेकिन, इतिहास पलटकर देख लें कि तीन सौ साल पहले ईसाई धर्म देश में था ही नहीं. उन्होंने कहा कि जब से ईसाई धर्म देश में आया है, तब से इन्होंने आदिवासियों को शिक्षित करने का काम किया है. उन्होंने कहा कि आरएसएस और बीजेपी अपना इतिहास खंगाले कि इन्होंने कितने लोगों को शिक्षित करने का काम किया है.

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आदिवासी समुदाय को कोड दें

तिर्की ने कहा कि ईसाई मिशनरियों पर धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया जाता है, लेकिन इसके समाधान पर कोई ध्यान क्यों नहीं दिया जाता. अगर सरकार आदिवासी हितैषी है, तो इन्हें कोडिफाई कर दें. आदिवासी हित में अगर सरकार सोचती, तो अब तक आदिवासी धर्म संस्कृति की रक्षा के लिए सरना कोड प्रस्ताव को पास कर दी होती.

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आदिवासी समाज को तोड़ने का काम किया सरकार ने

तिर्की ने कहा कि सरकार अगर आदिवासी हित में सोचती, तो कभी भी सीएनटी एक्ट में संशोधन नहीं करती. उन्होंने कहा कि सीएनटी एक्ट में संशोधन कर सरकार ने आदिवासियों को तोड़ने का काम किया है. जिन ईसाइयों पर सरकार आदिवासियों को लूटने का आरोप लगा रही है, उसी ईसाई समुदाय से फादर हॉफमैन संबद्ध थे, जिन्होने वर्ष 1909 में सीएनटी एक्ट बनाया था.

ये थे मौजूद

प्रेस वार्ता के दौरान क्रिस्टी अब्राहम, दीपक तिर्की, विनय केरकेट्टा समेत अन्य मौजूद थे.

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