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द शिलॉन्ग टाइम्स की संपादक एडिटर्स गिल्ड पर भड़कीं, इस्तीफा दिया, कहा, अर्नब के लिए आवाज उठाई, मेरे लिए नहीं…

मेघालय हाईकोर्ट की एक जज की बेंच ने  पत्रकार मुखिम को सीआरपीसी की धारा 153 के तहत सांप्रदायिक अशांति फैलाने का दोषी माना था और उनपर एक संस्थान- लॉसोहतन दरबार श्नोन्ग द्वारा दर्ज एफआईआर रद्द करने से मना कर दिया था.

NewDelhi : नॉर्थईस्ट के एक प्रमुख अखबार द शिलॉन्ग टाइम्स की पद्मश्री से सम्मानित संपादक पैट्रिसिया मुखिम ने एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से इस्तीफा दे दिया है. बता दें कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (EGI) देशभर के मीडिया संस्थानों के संपादकों के समूह है. पैट्रिसिया मुखिम का आरोप है कि हाल ही में हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जो फैसला सुनाया, उस मामले पर संस्था ने उनका साथ नहीं दिया और पूरी तरह चुप्पी साधे रखी.

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पत्रकार मुखिम सांप्रदायिक अशांति फैलाने की दोषी

जान लें कि    10 नवंबर को मेघालय हाईकोर्ट की एक जज की बेंच ने  पत्रकार मुखिम को सीआरपीसी की धारा 153 के तहत सांप्रदायिक अशांति फैलाने का दोषी माना था और उनपर एक संस्थान- लॉसोहतन दरबार श्नोन्ग द्वारा दर्ज एफआईआर रद्द करने से मना कर दिया था.

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अर्नब गोस्वामी एडिटर्स गिल्ड में भी शामिल भी नहीं हैं

बता दें कि मुखिम को नॉर्थईस्ट में कई मुद्दों पर अपनी बेबाक राय और वहां रहने वाले लोगों के अधिकार के लिए लड़ने वाले पत्रकार के तौर पर जाना जाता रहा है. उनका आरोप है कि एडिटर्स गिल्ड उनके मामले में चुप्पी साधे रहा, जबकि रिपब्लिक टीवी के एडिटर अर्नब गोस्वामी, जो कि गिल्ड में शामिल भी नहीं हैं, उनकी गिरफ्तारी पर गिल्ड ने बयान जारी कर दिया था. वह भी तब जब अर्नब की गिरफ्तारी पत्रकारिता से जुड़े मामले में नहीं हुई थी.

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मैंने हाईकोर्ट का ऑर्डर गिल्ड के साथ साझा कर उम्मीद जताई थी

सोशल मीडिया पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से इस्तीफे का ऐलान करते हुए मुखिम ने लिखा, अब जब दिवाली खत्म हो गयी है और चीजें दोबारा अपनी तरह से शुरू हो चुकी हैं. मैं गिल्ड और उसके सभी सदस्यों को बताना चाहती हूं कि मैं इसकी सदस्यता से इस्तीफा देने का मन बना चुकी हूं. इसलिए मेरा इस्तीफा आज ही स्वीकृत किया जाये. मैंने हाईकोर्ट का ऑर्डर गिल्ड के साथ साझा कर उम्मीद जताई थी कि वह इस आदेश की आलोचना में एक बयान जारी करेगा, पर संस्था  चुप रही.

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