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बाजार में नहीं हैं ईको फ्रेंडली पटाखे, दिवाली से तीन माह पहले पटाखों का ऑर्डर देते है डीलर

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Ranchi: दिवाली के दिन रात 8 से 10 बजे तक पटाखे जलाने के साथ ही ईको फ्रेंडली पटाखें जलाने का सुप्रीम कोर्ट ने ऑर्डर दिया है. SC के इस ऑर्डर को लेकर पटाखा दुकानदारों में उदासीनता देखने को मिल रही है. राजधानी रांची के विभिन्न डीलरों से इस विषय में बात करने से पता चला है कि डीलरों के पास ईको फ्रेंडली पटाखें नहीं हैं. साहु एंड सन्स, एम के एंड सन्स, जे शाह एंड सन्स समेत अन्य राजधानी के डीलरों ने बताया कि पटाखें जो हर साल बेचे जाते है इस बार भी वही चल रहे हैं. इसमें किसी तरह का परिवर्तन नहीं हुआ है. इन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों से ईको फ्रेंडली पटाखों की बात लगातार की जा रही है, लेकिन अभी तक बाजार में ईको फ्रेंडली पटाखें नहीं आये हैं.

कुछ डीलरों को नहीं पता क्या है ईको फ्रेंडली पटाखे राजधानी के कुछ डीलरों से जब ईको फ्रेंडली पटाखें के बारे में बात की गयी तो उन्होंने कहा कि ईको फ्रेंडली पटाखें की जानकारी नहीं है. बाजार में जो पटाखें आते है वही मिल रही हैं. इन डीलरों ने बताया कि पटाखों में ईको फ्रेंडली जैसी कोई बात नहीं, जैसे पटाखें होते है वैसे ही मिल रहे हैं.

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तीन माह पूर्व करते है ऑर्डर

चैंबर ऑफ कॉमर्स के महासचिव कुणाल आजमानी का कहना है कि त्योहार को दस दिन रह गये है. ऐसे में पटाखों की नयी किस्म बाजार में आना असंभव है. डीलर दिवाली के तीन माह पूर्व ही पटाखों का ऑर्डर कर देते हैं. जबकि दुर्गा पूजा के पहले छोटे-छोटे दुकानदार इन डीलरों से पटाखें खरीदते हैं. ऐसे में दस दिन में ईको फ्रेंडली पटाखें बाजार में आना असंभव है. उन्होंने कहा कि चैंबर अगले वर्ष से ईको फ्रेंडली पटाखें के लिये पूर्व से पहल करेगा.

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राजधानी में है छह डीलर

कुणाल आजमानी ने बताया कि पिछले एक साल में पटाखों में लगे विभिन्न प्रतिबंधों के बाद वर्तमान में लाइसेंसधारी मात्र छह डीलर राजधानी में है. इन्हीं डीलरों से राजधानी के अन्य दुकानदार पहले पटाखें लें बेचते थे, लेकिन अब लोग इन डीलरों से ही पटाखें ले सकते है. इधर उधर लगने वाले पटाखों के दुकानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.

ईको फ्रेंडली पटाखा क्‍या है

ईको फ्रेंडली पटाखें वैक्यूम कंबशन मैथड से बनाये जाते है. जिसके कारण समान्य पटाखों की तुलना में इससे कम ध्वनि निकलती है. वहीं इन पटाखों में रिसाइक्लड पेपर, कम रसायन जैसे कि सल्फर, पोटैशियम नाइट्रेट आदि का इस्तेमाल नहीं किया जाता है. जिससे इन पटाखों से कम ध्वनि के साथ प्रदूषण भी नहीं होता.

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