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प्रेमिका के शौक पूरे करने के लिए कारोबारी के 26 लाख रुपये लेकर फरार हुआ है चालक

Ranchi : रांची पुलिस कारोबारी रवींद्र कुमार टिबड़ेवाल के 26 लाख रुपये अब तक बरामद नहीं कर पायी है. इस मामले में इस बात का खुलासा हुआ है कि आरोपी चालक अनिल भगत अपनी प्रेमिका के साथ फरार हुआ है. आरोपी अनिल से उसकी प्रेमिका कई चीजों की मांग करती थी. प्रेमिका को कई बार महंगे गिफ्ट देने के बाद अनिल कारोबारी का अलमारी में रखा पूरा पैसा लेकर फरार हो गया.

पुलिस को अनिल भगत और उसकी प्रेमिका का मोबाइल नंबर नहीं मिल पा रहा है इस वजह से उनका लोकेशन पुलिस को नहीं मिल रहा है. पुलिस के पास अनिल और उसकी प्रेमिका का जो भी नंबर है सब बंद है.

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Sanjeevani

अनिल की प्रेमिका कांके रोड स्थित एक दुवा दुकान में काम करती थी. पुलिस मामले की जांच करते हुए दुकान पहुंची तो युवती का कोई डिटेल दवा दुकानदार के पास नहीं था. जब से अनिल फरार है तभी से युवती दवा दुकान में काम करने नहीं गयी है.

आरोपी अनिल के मोबाइल का अंतिम लोकेशन रांची में ही मिला था. पुलिस आशंका जता रही है कि अनिल अपनी प्रेमिका के साथ रांची से फरार हो गया है.

पुलिस अनिल के घर गयी तो पता चला कि अनिल पिछले चार साल से अपनी पत्नी के पास नहीं गया है. अनिल के बच्चे भी हैं. पत्नी ने पुलिस को बताया कि मोबाइल पर कभी-कभी अनिल बात करता था. लेकिन पत्नी के पास जो नंबर है वह भी बंद है.

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कोरोना होने के बाद कारोबारी का पैसा लेकर हो गया था फरार

कांके रोड स्थित ब्सेसिंग हाइट में रहनेवाले रविंद्र कुमार टिबड़ेवाल ने 5 जुलाई को गोंदा थाना में अनिल भगत के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी थी. दर्ज प्राथमिकी के अनुसार रविंद्र कुमार टिबड़ेवाल (46) एक व्यवसायी हैं.

वे कांके रोड में ब्लेसिंग हाइट में दसवें तल्ले पर अकेले रहते हैं. 24 अप्रैल को वे कोरोना से गंभीर रूप से संक्रमित हो गये थे. इस वजह से उन्हें सेंटेविटा अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. वे गंभीर स्थिति में एक महीने से ज्यादा 28 मई तक अस्पताल में भर्ती रहे. जहां उनका इलाज चल रहा था.

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व्यवसायी होने की वजह से ग्राहकों और डीलरों से कलेक्शन के पैसे उनके पास बीमार होने के दौरान काफी आ गये थे. जिसे वे बैंक में जमा नहीं करा सके थे और अपने फ्लैट में स्थित लकड़ी के अलमीरा में रख दिया था.

गंभीर अवस्था में अस्पताल चले गये थे. उसी अपार्टमेंट में चौथे तल्ले में स्थिति दूसरे फ्लैट में उनकी पत्नी और बच्चे रहते हैं. उसी अपार्टमेंट में नीचे तल्ले के एक फ्लैट में रविंद्र के माता भी रहते हैं.

जब वे अस्पताल से डिस्चार्ज हो कर वापस लौटे तो वे दसवें तल्ले में न जाकर चौथे तल्ले में पत्नी व बच्चों के साथ रहने लगे. जब उनकी तबियत में सुधार आया तो 18 जून को वे पुन: अपने दसवें तल्ले के फ्लैट में गये. अलमीरा खोला तो देखा कि उसमें रखे पैसे गायब थे.

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