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झारखंड के अनुसूचित क्षेत्र के विस्तार के लिए ‘पंचायत उपबंध नियामवली’ का प्रारूप तैयार हो रहा

निदेशक ने की समीक्षा, संबंधित पदाधिकारियों को दिये आवश्यक दिशा-निर्देश

Ranchi : “झारखंड पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों के विस्तार नियामवली का” प्रारूप तैयार हो रहा है. इस नियमावली के प्रारूप पर समीक्षा के लिए बुधवार को पंचायती राज निदेशक राजेश्वरी बी ने समीक्षा बैठक भी की. निदेशक ने अधिकारियों को इस नियमावली को लेकर आवश्यक निर्देश भी दिये. प्रारूप में पंचायत की शक्तियों तथा कर्तव्य को स्पष्ट रूप से अंकित किया जायेगा. इसके लिए नियमावली में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गयी. पेसा अधिनियम के प्रावधानों को धरातल पर लाने के लिए संबंधित विभागों द्वारा नियमावली का निर्माण एवं पूर्व की नियमावली में संशोधन किया जायेगा.

एफएफपी भवन सभागर में आयोजित बैठक में संयुक्त सचिव, राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, संयुक्त सचिव, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, संयुक्त सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग, संयुक्त सचिव, उत्पाद एवं मॖद्ध निषेध विभाग, संयुक्त सचिव, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, संयुक्त सचिव, गृह कार्य एवं आपदा प्रबंधन विभाग, संयुक्त सचिव, विधि न्याय विभाग उपस्थित थे. जल्द ही विभागीय मंत्री की स्वीकृति लेते हुए राज्य के मुख्यमंत्री और फिर कैबिनेट की स्वीकृति लेकर इसे लागू किया जायेगा.

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Sanjeevani

क्या है नियमावली में

इस नियमावली का विस्तार झारखंड राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में होगा. इस नियमवाली के अनुसार ग्राम सभा क्षेत्र में परंपरा से प्रचलित रीति-रिवाज के अनुसार मान्यता प्राप्त मांझी, मुंडा, पाहन महत्व या किसी अन्य नाम से जाना जाता हो वह ग्राम प्रधान होगा. अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की बैठक में शामिल हो सकेंगे. अनुसूचित क्षेत्रों में सामुदायिक संसाधनों जैसे भूमि जल वन खनिज और अन्य संसाधन निजी संसाधन लघु वन उपज, गैर लघु वन उपज जैसे बांस, झाड़, टूट, बेत्को या शहद, आंवला, केंदु पत्ता, पौधे, जड़ी बूटियां, कंदमूल व इस तरह के अन्य लघु वन उपज, लघु जलाशय इत्यादि इस नियमावली के अंतर्गत आयेंगे और ग्राम सभा इनके प्रबंध और निष्पादन करेगी.

नियमावली में ग्राम सभा को यह अधिकार दिया गया है कि वह चाहे तो एक से अधिक ग्राम सभा का गठन करेंगे जिसमें गांव टोला का समूह रूढ़ियों एवं रीति-रिवाजों के अनुसार अपने कार्यकलापों का प्रबंध निष्पादन करते हों. ग्राम सभा निवासी सदस्य अलग ग्राम सभा गठन की इच्छा रखेंगे तो वह प्रपत्र भर कर उपायुक्त को देंगे.

ग्रामसभा अपनी कृतियों एवं कर्तव्य के निर्वहन के लिए स्थायी समिति का निर्माण करेगी. ग्राम पंचायत का सचिव ग्राम सभा का सचिव होगा. ग्राम सभा की बैठक 3 महीने में एक बार होगी परंतु ग्राम सभा के सदस्यों की कुल संख्या की 1 बटा 10 या संबंधित ग्राम सभा के सदस्यों में 25 सदस्य में जो भी कम हो द्वारा लिखित मांग किये जाने पर अथवा पंचायत समिति जिला परिषद या उपायुक्त द्वारा अपेक्षित किये जाने पर ग्राम सभा की बैठक बुलायी जा सकेगी. 3 महीने में होनेवाली ग्राम सभा की नियमित बैठक तथा ग्राम सभा के सदस्यों के कुल संख्या 1 बटा 10 सदस्य द्वारा लिखित मांग पर किये जाने वाली बैठक की तारीख स्थान समय मुखिया के द्वारा परंपरागत ग्राम प्रधान से चर्चा आम सहमति लेते हुए लेते हुए तय किया जायेगा.

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पंचायत समिति व जिला परिषद या उपायुक्त राज्य सरकार द्वारा अपेक्षित ग्राम सभा की बैठक की तिथि और स्थान का निर्धारण मुखिया के द्वारा किया जायेगा. आनंद की ग्राम सभा की अध्यक्षता उस ग्राम सभा के अनुसूचित जनजाति के ऐसे सदस्य द्वारा की जायेगी जो संबंधित पंचायत का मुखिया उप मुखिया या प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र का सदस्य नहीं होगा.

आयुष ग्राम सभा क्षेत्र परंपरा से प्रचलित रीति रिवाज के अनुसार अनुसूचित जनजाति के मान्यता प्राप्त व्यक्ति जो ग्राम प्रधान अथवा मांझी मुंडा पहाड़ या किसी अन्य नाम से जाना जाता हो के द्वारा की जायेगी. परंपरा के अनुसार यह मांग की मुंडा आदि उपस्थित नहीं हो तो 75% सदस्यों के बहुमत से ग्राम सभा पूरी की जायेगी. ग्राम पंचायत की कार्रवाई के प्रति पंचायत सचिव के माध्यम से ग्राम पंचायत को भेजी जायेगी.
दो समिति भी होगी

ग्रामसभा अपनी कृतियों एवं कर्तव्य के निर्वहन के लिए स्थायी समिति का निर्माण करेगी जिसमें ग्राम विकास समिति और सार्वजनिक संपदा समिति होगी.

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