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चकाचौंध में खो गया गांव का विकास ! दर-दर ठोकर खाने को मजबूर विधायक के क्षेत्र के लोग

डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया के क्षेत्र का बुरा हाल, MLA 100 रु. मजदूरी पर करवाते हैं काम !

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Palamu/Ranchi: ‘सबका साथ-सबका विकास’ इसी नारे के साथ केंद्र में मोदी की सरकार आयी और झारखंड में भी उसी भाजपा की सरकार है, जो विकास के नारे को बुलंद करती है. लेकिन पलामू के गांवों की हालत देख लगता है, मानों शहरों की चकाचौंध में गांव का विकास कहीं ओझल हो गया है. राजधानी में होर्डिंग, पोस्टर, एलइडी, टीवी के जरिये विकास के बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं. लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल इतर है.

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हम बात कर रहे हैं डालटनगंज विधायक आलोक चौरसिया के विधानसभा क्षेत्र की. विधायक चौरसिया फिलहाल झारखंड राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष भी हैं. राज्य मंत्री का दर्जा भी मिला हुआ. आलोक चौरसिया युवा विधायक हैं, जाहिर है युवा शक्ति से ज्यादा काम-ज्यादा अपेक्षाएं होती हैं. लेकिन उनका क्षेत्र विकास की दौड़ में काफी पीछे छूट गया है.

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दो जून की रोटी को तरसता परिवार

प्लास्टिक लगाकर ट्टूी छत से टपकते पानी को रोकने की कोशिश

पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित माझीगावां पंचायत का नगवा गांव, जहां सोनी देवी नामक महिला अपने परिवार के साथ रहती है. ये इलाका है विधायक आलोक चौरसिया के विधानसभा क्षेत्र का. सात बाई दस फीट के दो कमरे में सोनी अपने पति और चार बच्चों के साथ रहती है. कमरे के एक हिस्से में ही शौचालय है, और शौचालय के दरवाजे के पास वो खाना बनाती है.

छप्पर से पानी टपकता है, जिसे प्लास्टिक लगाकर किसी तरह से रोकने की नाकाम कोशिश सोनी और उसके पति करते हैं. घर की जर्जर हालत इनकी जिंदगी की हकीकत बयां करने के लिए काफी है. इस परिवार को दो जून की रोटी भी नसीब नहीं होती. सुबह खाया तो शाम को भूखे पेट सोना इनकी किस्मत हो गई है.

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नहीं मिला प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ

गरीबी और तंगहाली झेल रही सोनी देवी ने अपनी पीड़ा बताई. इनलोगों के पास सिर्फ एक कट्ठा जमीन है, जिस पर उनके पति के चार भाईयों का हिस्सा है. इसके अलावे उनके पास और कोई जमीन नहीं है. जमीन के किसी तरह के कागजात भी उनके पास नहीं है. ऐसे में एक बड़ा सवाल है कि उसे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलेगा या नहीं. सोनी देवी के परिवार के लिए सबसे बड़ी मुसीबत है कि उन्होंने ब्याज पर 50 हजार का कर्ज ले रखा है. कहीं ऐसा ना हो कि यह परिवार आर्थिक तंगहाली में कोई अनुचित कदम उठा ले.

बमुश्किल होता रोटी का जुगाड़

इस परिवार के मुखिया शुक्ल विश्वकर्मा पहले दो जून की रोटी के जुगाड़ में गांव के बाहर मजदूरी के लिए जाते थे. लेकिन पहले टीबी, फिर ब्लड इंफेक्शन ने शुक्ल को कमजोर कर दिया है. इस कमजोरी के हालत में भी रिश्तेदार के एक वेल्डिंग दूकान में काम करने जाते हैं, ताकि बच्चों को दो वक्त की रोटी खिला सकें.

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विधायक के खेतो में काम करने पर मिलती है कम मजदूरी

आर्थिकतंगी झेल रहा ये परिवार काम नहीं मिलनेकी सूरत में दूसरे के खेतों में काम खोजते हैं. लेकिन वह भी ज्यादा दिन नहीं मिल पाता है. सोनी देवी ने बताया कि पिछले एक महीना में मात्र 5-6 दिन गांव में काम मिला था. विधायक या उनके रिश्तेदारों के लोगों के खेत में काम करते हैं तो एक दिन की मजदूरी सिर्फ 100 रूपये या फिर 5 किलो अनाज दिया जाता है. जबकि अन्य लोग उसी प्रकार के काम के लिए 120 से 130 रूपये मजदूरी देते हैं.

रोजगार कार्ड पड़ा बेकार

सरकारी सुविधा के नाम पर सोनी देवी के पास गुलाबी कार्ड है. जिसपर 30 किलो राशन मिलता है. साथ ही उज्जवला योजना के तहत गैस कनेक्शन मिला हुआ है. मनरेगा में कार्य करने के लिए रोजगार कार्ड बनवाया था, लेकिन उसमें निबंधन संख्या दर्ज नहीं होने के कारण कभी काम नहीं मिल सका.

वही जमीन के कागजात नहीं होने पर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलना भी मुश्किल ही दिखता है. ऐसे में पलामू जिला प्रशासन चाहे तो इस परिवार को हाल में राज्य सरकार द्वारा पारित कानून के तहत 12 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराकर एवं नियमित रोजगार कार्यक्रमों से जोड़ सकती है.

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विकास के नाम पर भाजपा में शामिल हुए थे आलोक

झारखंड राज्य वन विकास निगम के चेयरमैन आलोक चौरसिया इस क्षेत्र में गरीबों की आवाज कहे जाने वाले अनिल चौरसिया जैसे कद्दावर नेता के बेटे है. अनिल चौरसिया, इंदर सिंह नामधारी को चुनाव में कड़ी टक्कर दिया करते थे. जब अनिल चौरसिया की अचानक मौत हुई, तब 2014 में उनके बेटे आलोक चौरसिया ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत संभालते हुए 2014 के विधानसभा चुनाव में झाविमो के टिकट से चुनाव लड़ा. क्षेत्र की जनता ने अपनी सहानुभूति का परिचय देते हुए आलोक चौरसिया को जीत दिलायी. लेकिन सरकार गठन के वक्त, झाविमो का साथ छोड़ विधायक चौरसिया बीजेपी में शामिल हो गये.

विकास की बात कर, आलोक चौरसिया भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन इस दावे की हवा कुछ ऐसे ही निकलती दिखती है, जैसे सोनी देवी के टूटे घर का टूटा दरवाजा हवा के थपेड़ों को रोकने की नाकाम कोशिश करता है.

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