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बह रहा है विकास अपरंपार…ये है रघुवर सरकार!

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Akshay Kumar Jha

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सुबह-सुबह फोन की घंटी बजी… देखा तो पता चला कि ये तो वीडियो कॉल है… रांची जिला के नगड़ी प्रखंड से सखी मंडल की एक महिला थी… सर पर दुपट्टा लिए वीडियो में साफ झलक रही थी… फोन जैसे ही उठाया उसने कहा और बताओ कैसे हो…मैंने कहा ठीक हूं…पूछा कि ये बताओ कि कॉल क्यों किया है… वो भी वीडियो… बात आगे बढ़ ही रही थी कि मेरे स्मार्ट फोन पर एक मैसेज फ्लैस हुआ… नोटिफिकेशन गौर से देखा तो याद आया… अरे भाई ये तो वही मुंडा जी हैं… जो सिमडेगा में टीचर हैं… जिन्हें सरकार ने टैब दिया है… पड़ गया पशोपेस में… किससे बात करूं, किससे नहीं… मुंडा जी मेरे बड़े करीबी थे… सो सखी मंडल वाली महिला का फोन काटा और मुंडा जी से बात होने लगी… क्या फर्स्ट क्लास चैट हो रहा था… बिल्कुल क्लियर… मैंने पूछा भाई इतनी आसानी से चैट कैसे कर रहे हो… उसने कहा कि सर सरकार वाला टैब है… एक लंबर चल रहा है… काफी देर तक बात हुई… बात के दौरान उन्होंने पीडीएफ फाइल के साथ कई वीडियो भी स्कूल के भेजे… क्या गजब का स्कूल था… हर क्लास में डेस्क-बेंच… हर क्लास में स्मार्ट बोर्ड… तमाम चीजें… उन्होंने ब्यॉज और गर्ल्स के बाथरूम भी दिखाया… सच में बहुत खूबसूरत था… बात खत्म होने के बाद, मैं घर से निकला… चाय घर पर अच्छी मिली नहीं थी… सो सोचा कि चौराहे पर थोड़ी चुस्की मार लूं… चाय की चुस्की और हाथ में एक अधजली सिगरेट लिए देश और दुनिया के बारे सोच ही रहा था कि पास खड़े भाई साहब की बात सुनने को दिल कर गया… दरअसल उनका भाई झारखंड के स्किल इंडिया वाले कार्यक्रम से सारा कुछ सीख कर गुड़गांव गया था… उनका कहना था कि कल ही भाई ने घर पर पच्चीस हजार भिजवाया है… सारा दुख आज-कल वो ही हर ले रहा है… ऐसा भाई सबको मिले… बात खत्म होती कि देखा कि पूरा ठेला ताजी सब्जियों से भरा सामने से गुजर रहा था… मेरे अलावे और लोगों ने कहा, रोको हमें भी दो… तुम्हारी सारी सब्जियां हम यहीं खरीद लेंगे… लेकिन वो कहां रुकने वाला था… उसने कहा कि जब दिल्ली की कंपनी हमारी सब्जी खरीद रही है, तो भला हम तुम्हें क्यों बेचें… साला… कमीना बोल कर सबने उसे जाने दिया… अब हल्की धूप हो गयी थी… सभी उसे तापने की फिराक में अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर रहे थे. अब सुबह के नौ बज गए थे… ट्रैफिक अचानक से सड़क पर डोरे डालने लगी थी… तभी एक पल्सर वाले हीरो से मैंने पूछा… काहे पगला रहे हो भाई… कहां जाना है… आराम से जाओ… उसने झिड़कते हुए कहा… अबे औकात में रह… ओरमांझी वाली नयी फैक्ट्ररी देखी है… जो मोमेंटम झारखंड होने के बाद बनी है… हम भी परेशान… मैंने झट से पूछ दिया.. भाई ये कंपनी उन्हीं 210 कंपनियों में से है ना, जिससे सरकार ने एमओयू किया था… उसने कहा और क्या… पास खड़े एक किसान ने मुंह खिसोड़ा और कहा… कुछ दिन और रुक जाओ… हाथ में मेरे भी सराकारी स्मार्ट फोन आ जाने दो… फिर बताता हूं… मैं मुंह ताकत आगे बढ़ा… समझ नहीं पा रहा था कि कैसे रिएक्ट करूं… मैंने आव ना देखा ताव सोचा पारा शिक्षक से इनकी भेट आज करा ही दूं… लेकिन वो पारा शिक्षक भी दो दिनों पहले वाला क्रांतिकारी नहीं दिख रहा था… एफआईआर होने की डर से बिना लड़े ही हार मान बैठा… उसने गुस्से में कहा… अबे हमसे काहे पूछ रहे हो… जाओ रसोईया… राजस्व कर्मी… सर्कल इंस्पैक्टर तमाम लोग हैं… हमहीं खाली दिखते हैं क्या… तभी जोर से मेरा दरवाजा किसी ने पीटा… आंख मीचते हुए हर रोज की तरह नींद टूटी… अखबार पढ़ा और संपादक महोदय के लिए एक रोचक सा किस्सा सोच-सोच कर ऑफिस जाने की तैयारी करने लगा…

रास्ते में पढ़ा…बह रहा विकास अपरंपार…ये है रघुवर सरकार…

नोटः बीजेपी ने देश के तीन महत्वपूर्ण राज्य इसी सपने की वजह से गंवायी है…इसलिए चैन से सोना है तो जाग जाओ…

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