JharkhandRanchi

जिन पारा शिक्षकों को अनट्रेंड बता विभाग ने हटाया फिर उन्हीं से बिना मानदेय के लॉकडाउन में लिया जा रहा  काम

RAHUL GURU

Ranchi : झारखंड में 4500 पारा शिक्षकों को शिक्षा विभाग हटा चुका है. शिक्षा विभाग ने इन शिक्षकों को अनट्रेंड बताते हुए हटाया है. झारखंड शिक्षा परियोजना की ओर से 24 जून 2019 को एक पत्र किया गया था.

यह पत्र सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को भेजा गया था. इस पत्र में कहा गया था कि वैसे पारा शिक्षक जिन्होंने 31 मार्च 2019 तक प्रशिक्षण प्राप्त नहीं किया है, उन्हें हटाया जाये.

इसे भी पढ़ेंः सराहनीय भूमिका :  शिक्षक की भूमिका में नजर आये बोकारो के एसपी, प्रत्येक रविवार लेंगे छात्रों की क्लास

 नवंबर 2019 से नहीं विभाग नहीं दे रहा मानदेय

पर जिन 4500 पारा शिक्षकों को शिक्षा विभाग ने हटा दिया है, उन्हीं पारा शिक्षकों से काम भी लिया जा रहा है. इतना ही नहीं शिक्षा विभाग ऐसे पारा शिक्षकों के मानदेय का भुगतान भी नहीं कर रहा है.

इन अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को नवंबर 2019 से ही मानदेय नहीं मिला है. अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग का यह रवैया अमानवीय है. मानदेय नहीं मिलने से खाने से लेकर इलाज तक में मुश्किल हो गया है.

अब तक इलाज के अभाव में 6 से अधिक अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की मौत हो चुकी है. 

 क्वारेंटाइन सेंटर में लगी है ड्यूडी

जिन पारा शिक्षकों को अप्रशिक्षित कह विभाग हटा चुका है, उन्हीं पारा शिक्षकों से क्वारेंटाइन सेंटर्स में ड्यूडी करायी जा रही है. सात माह से बिना मानदेय काम कर रहे अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की ड्यूटी क्वारेंटाइन सेंटर में बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था दिये करायी जा रही है.

अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों ने बताया कि क्वारेंटाइन सेंटर में शिक्षकों से आठ-आठ घंटे के शिफ्ट में काम लिया जा रहा है. इससे पहले इन्हीं अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को मिड डे मील चावल वितरण काम में लगाया गया था.

इसे भी पढ़ेंः #LockDownEffect: बेरोजगार ऑटो चालकों ने सरकार से लगायी मदद की गुहार, कहा- सिर्फ 10kg चावल से नहीं चल जाता परिवार

 

सरकार ने बदली नियमावली, तो हटाये गये पारा शिक्षक

राज्य में पारा शिक्षकों की नियुक्ति सर्व शिक्षा अभियान के तहत ग्राम शिक्षा समिति के जरिये हुई. जब इन शिक्षकों की नियुक्ति हुई तब ये ग्राम शिक्षा समिति की सभी अर्हता को पूरा करते थे. इनकी नियुक्ति के साथ ही शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत अप्रशिक्षित प्रशिक्षण देने का प्रावधान किया गया.

लेकिन राज्य और केंद्र सरकार के बार-बार बदलते नियम के कारण साल 2015 के बाद से अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को प्रशिक्षण लेने में परेशानी हुई. प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी एनआइओएस (नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग) को मिली.

  गलती कहां हुई, इसे समझिये

अगस्त 2017 में डीएलएड के लिए एनआइओएस ने एडमिशन लिया. 28 अगस्त 2017 को एनआइओएस के क्षेत्रीय निदेशक अनिल कुमार सिंह ने पत्र जारी कर सूचना दी कि स्नातक पास अप्रशिक्षित शिक्षकों के लिए 12वीं में पचास प्रतिशत अंक जरूरी नहीं है. ऐसे में जिन शिक्षकों का इंटर में पचास प्रतिशत से कम अंक है, उन्हें मार्क्स इंप्रूव के लिए फिर से नामाकंन करने की जरूरत नहीं.

इसके ठीक नौ महीने बाद एनआइओएस की ओर से पत्र निर्गत किया. पत्र में इंटर में पचास प्रतिशत अंक को जरूरी बताया गया. लेकिन इस अधिसूचना के साथ मार्क्स इंप्रूवमेंट के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया. इसके बाद भी कुछ शिक्षकों ने इंटर में एनआइओएस में नामाकंन कराया.

लेकिन एनआइओएस की ओर से कोई व्यवस्था नहीं की गयी. और न ही कोर्स मैटेरियल उपलब्ध कराया गया. ऐसे में शिक्षक डीएलएड में अच्छे अंक होने के बावजूद, इंटर का प्रमाण पत्र नहीं मिलने से शिक्षक कार्य से वंचित हो गये.

इसे भी पढ़ेंः लॉकडाउन का असर :  2019 के मुकाबले 2020 में इलेक्ट्रोनिक बाजार 200 करोड़ रुपये से पहुंचा शून्य पर

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button